प्राचीन भारतीय गोत्र प्रणाली

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गोत्र शब्द का अर्थ होता है वंश/कुल (lineage)
गोत्र प्रणाली का मुख्या उद्देश्य किसी व्यक्ति को उसके मूल प्राचीनतम व्यक्ति से
जोड़ना है।
उदहारण के लिए यदि को व्यक्ति कहे की उसका गोत्र भरद्वाज है तो इसका अभिप्राय
यह है की उसकी पीडी वैदिक ऋषि भरद्वाज से प्रारंभ होती है या ऐसा समझ लीजिये
की वह व्यक्ति ऋषि भरद्वाज की पीढ़ी में जन्मा है ।
इस प्रकार गोत्र एक व्यक्ति के पुरुष वंश में मूल प्राचीनतम व्यक्ति को दर्शाता है.
The Gotra is a system which associates a person with his most ancient
or root ancestor in an unbroken male lineage.
ब्राह्मण स्वयं को निम्न आठ ऋषियों (सप्तऋषि +अगस्त्य ) का वंशज मानते है ।
जमदग्नि,अत्रि ,गौतम,कश्यप,वशिष्ठ ,विश्वामित्र,भरद्वाज,अगस्त्य
Brahmins identify their male lineage by considering themselves to be the descendants of the 8 great Rishis ie Saptarshis (The Seven Sacred Saints)
Agastya
उपरोक्त आठ ऋषि मुख्य गोत्रदायक ऋषि कहलाते है ।
तथा इसके पश्चात जितने भी अन्य गोत्र अस्तित्व में आये है वो इन्ही आठ मे से
एक से फलित हुए है और स्वयं के नाम से गौत्र स्थापित किया .
उदा० => अंगीरा की ८ वीं पीडी में कोई ऋषि क हुए तो परिस्थतियों के अनुसार उनके
नाम से गोत्र चल पड़ा।
और इनके वंशज क गौत्र कहलाये किन्तु क गौत्र स्वयं अंगीरा से उत्पन्न हुआ है ।
इस प्रकार अब तक कई गोत्र अस्तित्व में है ।
किन्तु सभी का मुख्य गोत्र आठ मुख्य गोत्रदायक ऋषियों मेसे ही है ।
All other Brahmin Gotras evolved from one of the above Gotras.
What this means is that the descendants of these Rishis over time
started their own Gotras.
All the established Gotras today,each of them finally trace back to
one of the root 8 Gotrakarin Rishi.
गौत्र प्रणाली में पुत्र का महत्व | Importance of Son in the Gotra System:
गौत्र द्वारा पुत्र व् उसे वंश की पहचान होती है ।
यह गोत्र पिता से स्वतः ही पुत्र को प्राप्त होता है ।
परन्तु पिता का गोत्र पुत्री को प्राप्त नही होता ।
उदा ० माने की एक व्यक्ति का गोत्र अंगीरा है और उसका एक पुत्र है ।
और यह पुत्र एक कन्या से विवाह करता है जिसका पिता कश्यप गोत्र से है ।
तब लड़की का गोत्र स्वतः ही गोत्र अंगीरा में परिवर्तित हो जायेगा जबकि कन्या
का पिता कश्यप गोत्र से था ।
इस प्रकार पुरुष का गोत्र अपने पिता का ही रहता है और स्त्री का पति के
अनुसार होता है न की पिता के अनुसार ।
यह हम अपने देनिक जीवन में देखते ही है,कोई नई बात नही !
परन्तु ऐसा क्यू ?
पुत्र का गोत्र महत्वपूर्ण और पुत्री का नही ।
क्या ये कोई अन्याय है ??
बिलकुल नही !!
देखें कैसे :
गुणसूत्र का अर्थ है वह सूत्र जैसी संरचना जो सन्तति में माता पिता के गुण पहुँचाने
का कार्य करती है ।
हमने स्कूल में पढ़ा था की मनुष्य में २ ३ जोड़े गुणसूत्र होते है ।
प्रत्येक जोड़े में एक गुणसूत्र माता से तथा एक गुणसूत्र पिता से आता है ।
इस प्रकार प्रत्येक कोशिका में कुल ४ ६ गुणसूत्र होते है जिसमे २ ३ माता से व् २ ३
पिता से आते है ।
जैसा की कुल जोड़े २ ३ है ।
इन २ ३ में से एक जोड़ा लिंग गुणसूत्र कहलाता है यह होने वाली संतान का लिंग
निर्धारण करता है अर्थात पुत्र होगा अथवा पुत्री ।
यदि इस एक जोड़े में गुणसूत्र xx हो तो सन्तति पुत्री होगी और यदि xy हो तो पुत्र होगा ।
परन्तु दोनों में x सामान है ।
जो माता द्वारा मिलता है और शेष रहा वो पिता से मिलता है ।
अब यदि पिता से प्राप्त गुणसूत्र x हो तो xx मिल कर स्त्रीलिंग निर्धारित करेंगे और
यदि पिता से प्राप्त y हो तो पुर्लिंग निर्धारित करेंगे ।
इस प्रकार x पुत्री के लिए व् y पुत्र के लिए होता है ।
इस प्रकार पुत्र व् पुत्री का उत्पन्न होना पूर्णतया पिता से प्राप्त होने वाले x अथवा y
गुणसूत्र पर निर्भर होता है माता पर नही ।
अब यहाँ में मुद्दे से हट कर एक बात और बता दूँ की जैसा की हम जानते है की पुत्र
की चाह रखने वाले परिवार पुत्री उत्पन्न हो जाये तो दोष बेचारी स्त्री को देते है जबकि
अनुवांशिक विज्ञानं के अनुसार जैसे की अभी अभी उपर पढ़ा है की “पुत्र व् पुत्री का
उत्पन्न होना पूर्णतया पिता से प्राप्त होने वाले x अथवा y गुणसूत्र पर निर्भर होता है
न की माता पर “
फिर भी दोष का ठीकरा स्त्री के माथे मांड दिया जाता है ।
है ना मूर्खता !
अब एक बात ध्यान दें की स्त्री में गुणसूत्र xx होते है और पुरुष में xy होते है ।
इनकी सन्तति में माना की पुत्र हुआ (xy गुणसूत्र). इस पुत्र में y गुणसूत्र पिता से
ही आया यह तो निश्चित ही है क्यू की माता में तो y गुणसूत्र होता ही नही !
और यदि पुत्री हुई तो (xx गुणसूत्र). यह गुण सूत्र पुत्री में माता व् पिता दोनों से आते है ।
१. xx गुणसूत्र ;-
xx गुणसूत्र अर्थात पुत्री . xx गुणसूत्र के जोड़े में एक x गुणसूत्र पिता से तथा दूसरा x
गुणसूत्र माता से आता है ।
तथा इन दोनों गुणसूत्रों का संयोग एक गांठ सी रचना बना लेता है जिसे Crossover
कहा जाता है ।
२. xy गुणसूत्र ;-
xy गुणसूत्र अर्थात पुत्र . पुत्र में y गुणसूत्र केवल पिता से ही आना संभव है क्यू की माता
में y गुणसूत्र है ही नही ।
और दोनों गुणसूत्र असमान होने के कारन पूर्ण Crossover नही होता केवल ५ %
तक ही होता है । और ९ ५ % y गुणसूत्र ज्यों का त्यों (intact) ही रहता है ।
तो महत्त्वपूर्ण y गुणसूत्र हुआ । क्यू की y गुणसूत्र के विषय में हम निश्चिंत है की
यह पुत्र में केवल पिता से ही आया है ।
बस इसी y गुणसूत्र का पता लगाना ही गौत्र प्रणाली का एकमात्र उदेश्य है जो
हजारों/लाखों वर्षों पूर्व हमारे ऋषियों ने जान लिया था ।
वैदिक गोत्र प्रणाली य गुणसूत्र पर आधारित है अथवा y गुणसूत्र को ट्रेस करने का
एक माध्यम है।
उदहारण के लिए यदि किसी व्यक्ति का गोत्र कश्यप है तो उस व्यक्ति में विधमान y
गुणसूत्र कश्यप ऋषि से आया है या कश्यप ऋषि उस y गुणसूत्र के मूल है ।
चूँकि y गुणसूत्र स्त्रियों में नही होता यही कारन है की विवाह के पश्चात स्त्रियों को
उसके पति के गोत्र से जोड़ दिया जाता है ।
वैदिक/ हिन्दू संस्कृति में एक ही गोत्र में विवाह वर्जित होने का मुख्य कारन यह है की
एक ही गोत्र से होने के कारन वह पुरुष व् स्त्री भाई बहिन कहलाये क्यू की उनका
पूर्वज एक ही है ।
परन्तु ये थोड़ी अजीब बात नही ? की जिन स्त्री व् पुरुष ने एक दुसरे को कभी देखा
तक नही और दोनों अलग अलग देशों में परन्तु एक ही गोत्र में जन्मे,
तो वे भाई बहिन हो गये .?
इसका एक मुख्य कारन एक ही गोत्र होने के कारन गुणसूत्रों में समानता का भी है ।
आज की आनुवंशिक विज्ञान के अनुसार यदि सामान गुणसूत्रों वाले दो व्यक्तियों
में विवाह हो तो उनकी सन्तति आनुवंशिक विकारों का साथ उत्पन्न होगी ।
ऐसे दंपत्तियों की संतान में एक सी विचारधारा,पसंद, व्यवहार आदि में कोई
नयापन नहीं होता। ऐसे बच्चों में रचनात्मकता का अभाव होता है।
विज्ञान द्वारा भी इस संबंध में यही बात कही गई है कि सगौत्र शादी करने पर
अधिकांश ऐसे दंपत्ति की संतानों में अनुवांशिक दोष अर्थात् मानसिक विकलांगता,
अपंगता, गंभीर रोग आदि जन्मजात ही पाए जाते हैं।
शास्त्रों के अनुसार इन्हीं कारणों से सगौत्र विवाह पर प्रतिबंध लगाया था।
first cousin marriage increases the risk of passing on genetic abnormalities.
But for Bittles,35 years of research on the health effects of cousin marriage
have led him to believe that the risks of marrying a cousin have been greatly exaggerated.
There’s no doubt that children whose parents are close biological relatives
are at a greater average risk of inheriting genetic disorders,
Bittles writes.
Studies of cousin marriages worldwide suggest that the risks of illness
and early death are three to four percent higher than in the rest of the
population.

http://www.eurekalert.org/pub_re…/2012-04/nesc-wnm042512.php

http://www.huffingtonpost.com/…/why-ban-cousin-marriages_b_…

http://www.thenews.com.pk/Todays-News-9-160665-First-cousin…

अब यदि हम ये जानना चाहे की यदि चचेरी,ममेरी,मौसेरी, फुफेरी आदि बहिनों से विवाह
किया जाये तो क्या क्या नुकसान हो सकता है ।
इससे जानने के लिए आप उन समुदाय के लोगो के जीवन पर गौर करें जो अपनी चचेरी,
ममेरी,मौसेरी,फुफेरी बहिनों से विवाह करने में १ सेकंड भी नही लगाते ।
फलस्वरूप उनकी संताने बुद्धिहीन,मुर्ख,प्रत्येक उच्च आदर्श व् धर्म (जो धारण करने
योग्य है ) से नफरत,मनुष्य-पशु-पक्षी आदि से प्रेमभाव का आभाव आदि जैसी
मानसिक विकलांगता अपनी चरम सीमा पर होती है ।
या यूँ कहा जाये की इनकी सोच जीवन के हर पहलु में विनाशकारी (destructive) व्
निम्नतम होती है तथा न ही कोई रचनात्मक (constructive), सृजनात्मक,
कोई वैज्ञानिक गुण,देश समाज के सेवा व् निष्ठा आदि के भाव होते है ।
यही इनके पिछड़ेपन का प्रमुख कारण होता है ।
उपरोक्त सभी अवगुण गुणसूत्र,जीन व् डीएनए आदि में विकार के फलस्वरूप ही
उत्पन्न होते है।
इन्हें वर्ण संकर (Genetic Mutations) भी कह सकते है !!
ऐसे लोग (?) अक्ल के पीछे लठ लेकर दौड़ते है ।
यदि आप कंप्यूटर प्रोग्रामिंग के जानकार है तो गौत्र प्रणाली को आधुनिक सॉफ्टवेयर
निर्माण की भाषा ऑब्जेक्ट ओरिएंटेड प्रोग्रामिंग (Object Oriented Programming :
oop) के माध्यम से भी समझ सकते है ।
Object Oriented Programming के inheritance नामक तथ्य को देखें ।
हम जानते है की inheritance में एक क्लास दूसरी क्लास के function, variable
आदि को प्राप्त कर सकती है ।
ऊपर फोटो में एक चित्र मल्टीप्ल इनहेरिटेंस का है
इसमें क्लास b व् c क्लास a के function, variable को प्राप्त (inherite) कर रही है ।
और क्लास d क्लास b,c दोनों के function, variable को एक साथ प्राप्त (inherite)
कर रही है।
अब यहाँ भी हमें एक समस्या का सामना करना पड़ता है जब क्लास b व् क्लास c में
दो function या variable एक ही नाम के हो !
उदा ० यदि माने की क्लास b में एक function abc नाम से है और क्लास c में भी
एक function abc नाम से है।
जब क्लास d ने क्लास b व् c को inherite किया तब वे एक ही नाम के दोनों function
भी क्लास d में प्रविष्ट हुए ।
जिसके फलस्वरूप दोनों functions में टकराहट के हालात पैदा हो गये ।
इसे प्रोग्रामिंग की भाषा में ambiguity (अस्पष्टता) कहते है ।

जिसके फलस्वरूप प्रोग्राम में error उत्पन्न होता है ।
अब गौत्र प्रणाली को समझने के लिए केवल उपरोक्त उदा ० में क्लास को स्त्री व् पुरुष
समझिये , inherite करने को विवाह,समान function, variable को समान गोत्र तथा
ambiguity को आनुवंशिक विकार ।
ऋषियों के अनुसार कई परिस्थतियाँ ऐसी भी है जिनमे गोत्र भिन्न होने पर भी विवाह नही होना चाहिए ।
देखे कैसे :
असपिंडा च या मातुरसगोत्रा च या पितु:
सा प्रशस्ता द्विजातिनां दारकर्मणि मैथुने ….मनुस्मृति ३ /५
-जो कन्या माता के कुल की छः पीढ़ियों में न हो और पिता के गोत्र की न हो,
उस कन्या से विवाह करना उचित है ।
When the man and woman do not belong to six generations from the
maternal side and also do not come from the father’s lineage,marriage
between the two is good.
-Manusmriti 3/5
उपरोक्त मंत्र भी पूर्णतया वैज्ञानिक तथ्य पर आधारित है देखें कैसे :
वह कन्या पिता के गोत्र की न हो अर्थात लड़के के पिता के गोत्र की न हो ।
लड़के का गोत्र = पिता का गोत्र
अर्थात लड़की और लड़के का गोत्र भिन्न हो।
माता के कुल की छः पीढ़ियों में न हो ।
अर्थात पुत्र का अपनी माता के बहिन के पुत्री की पुत्री की पुत्री …………६ पीढ़ियों तक
विवाह वर्जित है।
Manusmriti 3/5

PK फ़िल्म समीक्षा

मैं ना तो राजू हिरानी को भारत के सर्वश्रेष्ठ निर्देशकों में से एक मानता हूँ ना आमिर खान को सर्वश्रेष्ठ कलाकारों में से एक. हिरानी साहब “इमोशनल कनेक्ट” वाली मूवीज बनाते हैं जो पूरे ताम झाम के साथ रिलीज़ होती है. लेकिन चाहे मुन्ना भाई एमबीबीएस हो या लगे रहो मुन्ना भाई या फिर हाइली ओवररेटेड थ्री इडियट्स, ये सारी मूवीज हकीकत से बहुत दूर हैं. और आमिर खान साहब एक अच्छे कलाकार हैं जो बहुत अच्छी मूवीज और बहुत ही अच्छे करैक्टर चुनते हैं. उनकी परख बॉलीवुड के किसी भी सितारे से बहुत अच्छी है और यही कारण है की आमिर खान को आज चोटी का कलाकार माना जाता है.

पीके एक “प्रीटेनशियस” मूवी है, जिसका कोई ख़ास मकसद नहीं है. गँवई लहजे में बोलने वाला आमिर खान का करैक्टर काफी बचकाना है. दरअसल में पीके आपको कभी रेंचो लगेगा तो कभी मुन्ना. फिल्म की स्क्रिप्ट काफी ढीली है जो इंटरवल के बाद औंधे मुह गिरती है. फिल्म के गाने भी कुछ ख़ास नहीं हैं.

अब आते हैं फिल्म के “हिडन एजेंडा” पे. ये फिल्म धर्म के ऊपर एक सटायर या फिर कहिये तो चोट है. “जो डर गया वो मंदिर गया” को मूवी की अंडरलायिंग थीम कह सकते हैं. ये मूवी हिन्दू धर्म में फैले आडम्बरों पर प्रहार करती है, यदाकदा बाकी धर्मों पर भी चोट करती है. पर इस मूवी की सीधी लड़ाई हिन्दू धर्म में फैले झूठ, फरेब, मूर्ति पूजन और नकली बाबाओं इत्यादि से है. जब कोई चोटी का कलाकार एक माने हुए निर्देशक के साथ ऐसी बाते कहता है तो लोग सोंचने पर मजबूर हो जाते हैं. और ये मूवी ऐसा करने में बहुत हद तक सफल होती है. और इसके लिए आमिर और राजू बधाई के पात्र है. लेकिन मेरा नौट-सो-रिलीजियस-माइंड भी ये समझ नहीं पाता की निर्देशकों के लिए हिन्दू धर्म पर चोट करना कितना आसान होता है जबकि बाकी धर्मों के लिए उनका स्टांस इवेज़िव होता है.

अगर हिन्दू धर्म इतना ही सडा-गला होता तो शायद ऑस्ट्रेलिया में एक हिन्दू बंदूकधारी लोगों को बंधक बनाता, पेशावर की घटना शायद पटना या पुणे में होती कोई बजरंग दल जैसा ग्रुप इसकी ज़िम्मेदारी लेता. इस्लामिक स्टेट की जगह हिन्दू स्टेट दुनिया की परेशानी का सबब बनता. लेकिन नहीं, ऐसा नहीं है. तो फिर फिल्मवालों को क्यों लगता है की हम ही सारे अवगुणों की खान है?

मैं सेल्फ स्टाइल्ड समाज सुधारक आमिर खान को चैलेंज देता हूँ की एक ऐसी ही मूवी बनाये जहाँ वो इस्लाम पर चोट करते दिखाई दें. शरिया के बर्बर कानून की धज्जियाँ उड़ायें, बहुपत्नीवाद पर सटायर करें, खतना और बुर्का का रेलेवेंस समझायें, अल्लाह के नाम पर मासूमों का खून बहाने वाले जिहाद पर अपनी राय दें? मुश्किल है ,क्यूंकि सहिष्णुता का ठेका बस हिन्दुओं का है. हिन्दू धर्म के अलावा किसी और धर्म पर चोट करने वाली मूवी को सिनेमा घर ही नसीब नहीं होंगे.

ये है दोगलापन
ये है पक्षपात
ये है क्रिएटिव लोगों का ईविल साइड।

PK फ़िल्म से निकले कुछ सवाल

PK के आमिर खान से कुछ सवाल और अगर आपके पास सवालो के जवाब हे तो दीजियेगा अन्यथा आमिर खान तक पहुँचाने में मदद कीजियेगा:-
1:अगर गाय को घास खिलाने से धर्म होता हो या नहीं लेकिन उसका पेट जरूर भरता है लेकिन अपने धर्म गुरु के कहने से आप तो बकरे को काटते हैं आपने इसका विरोध क्यों नहीं किया?
2:अगर माता रानी के दरबार और अमरनाथ जाने से धर्म नहीं होता है तो मक्का मदीना जाने से कैसे हो सकता है ,आपने मक्का मदीना का विरोध् क्यों नहीं किया?
3:अगर मंदिर बनाना धर्म नहीं तो आपने मस्जिद बनाने का विरोध क्यों नहीं किया जबकि सर्वे बताते हैं की देश में मंदिर के अनुपात में मस्जिद बनाने में भंयकर तेजी आई है वो भी सरकारी पैसे से
4:अगर शीवजी को दूध चढ़ाने से अच्छा किसी भूके को दान देना अच्छा है तो देश में लोग ठण्ड से ज्यादा मर रहे है आपने मज़ार की चादर का विरोध क्यों नहीं किया
5:अगर पैदल तीर्थो पर जाना धर्म नहीं तो या हुसैन करके अपना खून बहाने से कैसे धर्म हुआ जबकि उस खून को धोंने के लिए आप लोग अरबो लीटर साफ़ पानी ढोलते है जो किसी प्यासे की प्यास बुझा सकता था ,आपने उसका विरोध क्यों नहीं किया
6:अगर क्रिस्चियन लालच देकर  धर्म परिवर्तन कर रहे है तो आपने इस्लामिक स्टेट का विरोध क्यों नहीं किया जबकि इसमें तो मौत का तांडव हो रहा है
7:अमृतसर से कश्मीरीयो को आपदा के समय लाखो लोगो को खाना दिया और आपने उन्ही को खाने के लिए भीख मांगते दिखाया जबकि सबसे ज्यादा गरीब मुस्लिम है
8:क्या सारे हिन्दू धर्म गुरु पाखंडी होते है जबकि सबसे ज्यादा पाखंडी और धर्म के नाम पर अन्धविश्वास फेलाने में मुस्लिम धर्म गुरु आगे हैं आपने उनका विरोध क्यों नहीं किया
9:आपने बताया मुस्लिम लड़के इतने अच्छे और वफादार होते हैं तो 90% आतंकी मुस्लिम लड़के होते हैं आपने ये क्यों नहीं दिखाया
10:अगर आप कहते हैं की धर्म गुरु मंदिर का विरोध करने पर भगवान् की निंदा का डर बताते हैं तो आपने इस्लाम में ईश निंदा के जुल्म में मौत की सजा दी जाती है इसका विरोध किस डर के कारण नहीं किया
11:खान बंधू स्टारर मूवी में नायिका का पात्र हमेशा हिन्दू और नायक हमेशा मुस्लिम क्यों होता है
आमिर खान जी हिन्दू धर्म या अन्य धर्म करने से पुण्य मिलता हो या ना मिलता हो , धर्म होता हो या ना होता हो लेकिन किसी का बुरा तो हरगिज़ नहीं करते लेकिन इस्लाम के नाम पर पूरी दुनिया की क्या हालात है आज सभी जानते है अगर आपको वाकई में सिस्टम सुधारना ही था तो आपने शुरुआत वही से क्यों नहीं की क्यों आपने मुस्लिम लड़के को इतना वफादार बताया आपने ये क्यों नहीं बताया की लाखो हिन्दू लडकिया मुस्लिम लड़को से शादी करने के बाद वैश्या वृति में धकेल दी जाती ह
मै मूवी का विरोध नहीं कर रहा लेकिन आप सभी से मेरा सिर्फ इतना अनुरोध है की इस माध्यम से ये हम सब के दिल और दिमाग में क्या बिठाना चाहते हैं अपने विवेक से सोचे और समझे और अगर आपको लगे की ये सत्य है तो सचेत ही जाए🙏

भारत मुसलमानों के लिए स्वर्ग क्यों है ?

विश्व की कुल जनसंख्या में प्रत्येक चार में से एक मुसलमान है। मुसलमानों की 60 प्रतिशत जनसंख्या एशिया में रहती है तथा विश्व की कुल मुस्लिम जनसंख्या का एक तिहाई भाग अविभाजित भारत यानी भारत, पाकिस्तान और बंगलादेश में रहता है। विश्व में 75 देशों ने स्वयं को इस्लामी देश घोषित कर रखा है। पर, विश्व में जितने भी बड़े-बड़े मुस्लिम देश माने जाते हैं, मुस्लिमों को कहीं भी इतनी सुख-सुविधाएं या मजहबी स्वतंत्रता नहीं है जितनी कि भारत में। इसीलिए किसी ने सच ही कहा है कि ‘मुसलमानों के लिए भारत बहिश्त (स्वर्ग) है।’ परन्तु यह भी सत्य है कि विश्व के एकमात्र हिन्दू देश भारत में इतना भारत तथा हिन्दू विरोध कहीं भी नहीं है, जितना ‘इंडिया दैट इज भारत’ में है। इस विरोध में सर्वाधिक सहयोगी हैं-सेकुलर राजनीतिक स्वयंभू बुद्धिजीवी तथा कुछ चाटुकार नौकरशाह। उनकी भावना के अनुरूप तो इस देश का सही नाम ‘इंडिया दैट इज मुस्लिम’ होना चाहिए .क्योंकि विश्व में भारत एकमात्र ऐसा देश है जहाँ केवल जनसंख्या के आधार पर मुसलमानों की जायज नाजायज मांगें पूरी कर दी जाती हैं , भले वह देश को बर्बाद करने में कोई कसर नहीं छोड़ें ,

1-कम्युनिस्ट देश तथा मुस्लिम

आज जो कम्यूनिस्ट सेकुलरिज्म के बहाने मुसलमानों के अधिकारों की वकालत करते हैं , उन्हें पता होना चाहिए कि कम्युनिस्ट देशों में मुसलमानों की क्या हालत है।
विश्व के दो प्रसिद्ध कम्युनिस्ट देशों-सोवियत संघ (वर्तमान रूस) तथा चीन में मुसलमानों की जो दुर्गति हुई वह सर्व विदित है तथा अत्यन्त भयावह है। कम्युनिस्ट देश रूस में भयंकर मुस्लिम नरसंहार तथा क्रूर अत्याचार हुए। नारा दिया गया ‘मीनार नहीं, मार्क्स चाहिए।’ हजारों मस्जिदों को नष्ट कर हमाम (स्नान घर) बना दिए गए। हज की यात्रा को अरब पूंजीपतियों तथा सामन्तों का धन बटोरने का तरीका बताया गया। चीन में हमेशा से उसका उत्तर-पश्चिमी भाग शिनचियांग-मुसलमानों की वधशाला बना रहा। इस वर्ष भी मुस्लिम अधिकारियों तथा विद्यार्थियों को रमजान के महीने में रोजे रखने तथा सामूहिक नमाज बढ़ने पर प्रतिबन्ध लगाया गया।

2-यूरोपीय देश तथा मुस्लिम

सामान्यत: यूरोप के सभी प्रमुख देशों-ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, आदि में मुसलमानों के अनेक सामाजिक रीति-रिवाजों पर प्रतिबंध है। प्राय: सभी यूरोपीय देशों में मुस्लिम महिलाओं के बुर्का पहनने तथा मीनारों के निर्माण तथा उस पर लाउडस्पीकर लगाने पर प्रतिबंध है। बिट्रेन में इंडियन मुजहीद्दीन सहित 47 मुस्लिम आतंकवादी संगठनों पर प्रतिबंध लगा हुआ है। ब्रिटेन का कथन है कि ये संगठन इस्लामी राज्य स्थापित करने और शरीयत कानून को लागू करने का अपना लक्ष्य प्राप्त करने के लिए हिंसा का प्रयोग करते हैं। जर्मनी में भी बुर्के पर पाबन्दी है। जर्मनी के एक न्यायालय ने मुस्लिम बच्चों के खतना (सुन्नत) को ‘मजहबी अत्याचार’ कहकर प्रतिबंध लगा दिया है तथा जो डाक्टर उसमें सहायक होगा, उसे अपराधी माना जाएगा। जर्मनी के कोलोन शहर की अदालत ने बुधवार को सुनाए गए एक फैसले में कहा कि धार्मिक आधार पर शिशुओं का खतना करना उनके शरीर को कष्टकारी नुकसान पहुंचाने के बराबर है.और प्राकृतिक नियमों में हस्तक्षेप है
जर्मनी में मुस्लिम समुदाय इस फैसले का कड़ा विरोध कर रहे हैं और वे इस बारे में कानूनविदों से मशविरा कर रहे हैं.
आशा है विश्व के सारे देश जल्द ही जर्मनी का अनुसरण करने लगेंगे.इसी तरह फ्रांस विश्व का पहला यूरोपीय देश था जिसने पर्दे (बुर्के) पर प्रतिबंध लगाया।

3-मुस्लिम देशों में मुसलमानों की हालत

विश्व के बड़े मुस्लिम देशों में भी मुसलमानों के मजहबी तथा सामाजिक कृत्यों पर अनेक प्रकार के प्रतिबंध है। तुर्की में खिलाफत आन्दोलन के बाद से ही रूढ़िवादी तथा अरबपरस्त मुल्ला- मौलवियों की दुर्गति होती रही है। तुर्की में कुरान को अरबी भाषा में पढ़ने पर प्रतिबंध है। कुरान का सार्वजनिक वाचन तुर्की भाषा में होता है। शिक्षा में मुल्ला-मौलवियों का कोई दखल नहीं है। न्यायालयों में तुर्की शासन के नियम सर्वोपरि हैं। रूढ़िवादियों की सोच तथा अनेक पुरानी मस्जिदों पर ताले डाल दिए गए हैं। (पेरेवीज, ‘द मिडिल ईस्ट टुडे’ पृ. 161-190; तथा ऐ एम चिरगीव -इस्लाम इन फरमेन्ट, कन्टम्परेरी रिव्यू, (1927)। ईरान व इराक में शिया-सुन्नी के खूनी झगड़े-जग जाहिर हैं। पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग ने भी यह स्वीकार किया है कि यहां मुसलमान भी सुरक्षित नहीं हैं। यहां मुसलमान परस्पर एक-दूसरे से लड़ते रहते हैं। उदाहरण के लिए जमात-ए-इस्लामी पाकिस्तान ने अहमदिया सम्प्रदाय के हजारों लोगों को मार दिया। इसके साथ हिन्दुओं के प्रति उनका क्रूर व्यवहार, जबरन मतान्तरण, पवित्र स्थलों को अपवित्र करना, हिन्दू को कोई उच्च स्थान न देना आदि भी जारी है। उनकी क्रूरता के कारण पाकिस्तानी हिन्दू वहां से जान बचाकर भारत आ रहे हैं। वहां हिन्दुओं की जनसंख्या घटकर केवल एक प्रतिशत के लगभग रह गई है। हिन्दुओं की यही हालत 1971 में बने बंगलादेश में भी है। वहां भी उनकी जनसंख्या 14 प्रतिशत से घटकर केवल 1 प्रतिशत रह गई है। साथ ही बंगलादेशी मुसलमान भी लाखों की संख्या में घुसपैठियों के रूप में जबरदस्ती असम में घुस रहे हैं।
अफगानिस्तान की अनेक घटनाओं से ज्ञात होता है जहां उन्होंने हिन्दुओं तथा बौद्धों के अनेक स्थानों को नष्ट किया, वहीं जुनूनी मुस्लिम कानूनों के अन्तर्गत मुस्लिम महिलाओं को भी नहीं बख्शा, नादिरशाही फतवे जारी किए। मंगोलिया में यह प्रश्न विवादास्पद बना रहा कि यदि अल्लाह सभी स्थानों पर है तो हज जाने की क्या आवश्यकता है? सऊदी अरब में मुस्लिम महिलाओं के लिए कार चलाना अथवा बिना पुरुष साथी के बाहर निकलना मना है। पर यह भी सत्य है कि किसी व्यवधान अथवा सड़क के सीध में न होने की स्थिति में मस्जिद को हटाना उनके लिए कोई मुश्किल नहीं है।

4-भारत में मुस्लिम तुष्टीकरण

अंग्रेजों ने भारत विभाजन कर, राजसत्ता का हस्तांतरण कर उसे कांग्रेस को सौंपा। साथ ही इन अलगाव विशेषज्ञों ने, अपनी मनोवृत्ति भी कांग्रेस का विरासत के रूप में सौंप दी। अंग्रेजों ने जो हिन्दू-मुस्लिम अलगाव कर तुष्टीकरण की नीति अपनाई थी, वैसे ही कांग्रेस ने वोट बैंक की चुनावी राजनीति में इस अलगाव को अपना हथियार बनाया। उसने मुस्लिम तुष्टीकरण में निर्लज्जता की सभी हदें पार कर दीं। यद्यपि संविधान में ‘अल्पसंख्यक’ की कोई निश्चित परिभाषा नहीं दी गई हैं, परन्तु व्यावहारिक रूप से चुनावी राजनीति को ध्यान में रखते हुए मुसलमानों को अल्पसंख्यक मान लिया गया तथा उन्हें खुश करने के लिए उनकी झोली में अनेक सुविधाएं डाल दीं। उनके लिए एक अलग मंत्रालय, 15 सूत्री कार्यक्रम व बजट में विशेष सुविधाएं, आरक्षण, हज यात्रा पर आयकर में छूट तथा सब्सिडी आदि। सच्चर कमेटी तथा रंगनाथ आयोग की सिफारिशों ने इन्हें प्रोत्साहन दिया। भारतीय संविधान की चिन्ता न कर, न्यायालय के प्रतिरोध के बाद भी, मजहबी आधार पर आरक्षण के सन्दर्भ में कांग्रेस के नेता वक्तव्य देते रहते हैं।

5-हज सब्सिडी में घोटाले

विश्व में मुस्लिम देशों में हज यात्रा के लिए कोई विशेष सुविधा नहीं है। बल्कि मुस्लिम विद्वानों ने हज यात्रा के लिए दूसरे से धन या सरकारी चंदा लेना गुनाह बतलाया है। पर कांग्रेस शासन में 1959 में बनी पहली हज कमेटी के साथ ही सिलसिला शुरू हुआ हज में सुविधाओं का। सरकारी पूंजी का खूब दुरुपयोग हुआ। हज घोटालों के लिए कई जांच आयोग भी बैठे। हज सद्भावना शिष्ट मण्डल, हज में भी ‘वी.आई.पी. कोटा’ आदि की सूची बनने लगी। सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी के बाद जम्मू-कश्मीर के अब्दुल रसीद ने सरकार द्वारा सदभावना शिष्टमण्डल के सदस्यों के चयन पर प्रश्न खड़ा किया। क्योंकि उसमें 170 हज यात्रियों के नाम बदले हुए पाए गए। आखिर सर्वोच्च न्यायालय ने दखल दिया तथा ‘अति विशिष्टों की’ संख्या घटाकर 2500 से केवल 300 कर दी।
सामान्यत: प्रत्येक हज यात्री पर सरकार का लगभग एक लाख रु. खर्च होता है, परन्तु सरकारी प्रतिनिधियों पर आठ से अट्ठारह लाख रु. खर्च कर दिए जाते हैं। गत वर्ष राष्ट्रीय हज कमेटी ने यात्रियों को कुछ कुछ अन्य सुविधाएं प्रदान की, जिसमें 70 वर्ष के आयु से अधिक के आवेदक व्यक्तियों के लिए निश्चित यात्रा, चुने गए आवेदकों को आठ महीने रहने का परमिट तथा हज यात्रा पर जाने वाले यात्री के लिए पुलिस द्वारा सत्यापन में रियायत दी गई। इसके विपरीत श्रीनगर से 135 किलोमीटर की कठिन अमरनाथ यात्रा के लिए, जिसमें इस वर्ष 6 लाख 20 हजार यात्री गए, और आने-जाने के 31 दिन में 130 श्रद्धालु मारे गए, जिनके शोक में एक भी आंसू नहीं बहाया गया।

6-भारत का इस्लामीकरण

असम में बंगलादेश के लाखों मुस्लिम घुसपैठियों के प्रति सरकार की उदार नीति, कश्मीर में तीन वार्ताकारों की रपट पर लीपा-पोती, मुम्बई में 50,000 मुस्लिम दंगाइयों द्वारा अमर जवान ज्योति या कहें कि राष्ट्र के अपमान पर कांग्रेस राज्य सरकार और केन्द्र की सोनिया सरकार की चुप्पी तथा दिल्ली के सुभाष पार्क में अचानक उग आयी अकबराबादी मस्जिद के निर्माण को न्यायालय द्वारा गिराने के आदेश पर भी सरकारी निष्क्रियता, क्या यह आश्चर्यजनक नहीं है कि गत अप्रैल में भारत के तथाकथित सेकुलरवादियों ने हैदराबाद के उस्मानिया विश्वविद्यालय में गोमांस भक्षण उत्सव मनाया तथा उसकी पुनरावृत्ति का प्रयास दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में किया गया? मांग की गई थी कि छात्रावासों में गोमांस भक्षण की सुविधा होनी चाहिए। पर सरकार न केवल उदासीन बनी रही बल्कि जिन्होंने इसका विरोध किया, उनके ही विरुद्ध डंडा चलाया गया। इस विश्लेषण के बाद गंभीर प्रश्न यह है कि सरकार की मुस्लिम तुष्टीकरण अथवा वोट बैंक को खुश करने की इस नीति से मुस्लिम समाज का अरबीकरण हो रहा है या भारतीयकरण? क्या इससे वे भारत की मुख्य धारा से जुड़ रहे हैं या अलगावादी मांगों के पोषण से राष्ट्रीय स्थिरता के लिए खतरा बन रहे हैं? क्या चुनावी वोट बैंक की राजनीति, राष्ट्रहित से भी ऊपर है? देश के युवा विशेषकर पढ़े-लिखे युवकों को इस पर गंभीरत से विचार करना होगा, ताकि समाज की उन्नति के साथ राष्ट्र निर्माण में उनका सक्रिय सहयोग हो सके।

लाइफ में एक “शार्क” जरूरी है

जापान में हमेशा से ही मछलियाँ खाने का एक ज़रुरी हिस्सा रही हैं । और ये जितनी ताज़ी होतीं हैँ लोग उसे उतना ही पसंद करते हैं । लेकिन जापान के तटों के आस-पास इतनी मछलियाँ नहीं होतीं की उनसे लोगोँ की डिमांड पूरी की जा सके । नतीजतन मछुआरों को दूर समुंद्र में जाकर मछलियाँ पकड़नी पड़ती हैं।जब इस तरह से मछलियाँ पकड़ने की शुरुआत हुई तो मछुआरों के सामने एक गंभीर समस्या सामने आई । वे जितनी दूर मछली पक़डने जाते उन्हें लौटने मे उतना ही अधिक समय लगता और मछलियाँ बाजार तक पहुँचते-पहुँचते बासी हो जातीँ , ओर फिर कोई उन्हें खरीदना नहीं चाहता ।इस समस्या से निपटने के लिए मछुआरों ने अपनी बोट्स पर फ्रीज़र लगवा लिये । वे मछलियाँ पकड़ते और उन्हें फ्रीजर में डाल देते । इस तरह से वे और भी देर तक मछलियाँ पकड़ सकते थे और उसे बाजार तक पहुंचा सकते थे । पर इसमें भी एक समस्या आ गयी । जापानी फ्रोजेन फ़िश ओर फ्रेश फिश में आसनी से अंतर कर लेते और फ्रोजेन मछलियों को खरीदने से कतराते , उन्हें तो किसी भी कीमत पर ताज़ी मछलियाँ ही चाहिए होतीं ।एक बार फिर मछुआरों ने इस समस्या से निपटने की सोची और इस बार एक शानदार तरीका निकाला , उन्होंने अपनी बड़ी – बड़ी जहाजों पर फ़िश टैंक्स बनवा लिए ओर अब वे मछलियाँ पकड़ते और उन्हें पानी से भरे टैंकों मे डाल देते । टैंक में डालने के बाद कुछ देर तो मछलियाँ इधर उधर भागती पर जगह कम होने के कारण वे जल्द ही एक जगह स्थिर हो जातीं ,और जब ये मछलियाँ बाजार पहुँचती तो भले वे ही सांस ले रही होतीं लकिन उनमेँ वो बात नहीं होती जो आज़ाद घूम रही ताज़ी मछलियों मे होती , ओर जापानी चखकर इन मछलियों में भी अंतर कर लेते ।तो इतना कुछ करने के बाद भी समस्या जस की तस बनी हुई थी।अब मछुवारे क्या करते ? वे कौन सा उपाय लगाते कि ताज़ी मछलियाँ लोगोँ तक पहुँच पाती ?नहीं, उन्होंने कुछ नया नहीं किया , वें अभी भी मछलियाँ टैंक्स में ही रखते , पर इस बार वो हर एक टैंक मे एक छोटी सी शार्क मछली भी ङाल देते। शार्क कुछ मछलियों को जरूर खा जाती पर ज्यादातर मछलियाँ बिलकुल ताज़ी पहुंचती।ऐसा क्यों होता ? क्योंकि शार्क बाकी मछलियों की लिए एक चैलेंज की तरह थी। उसकी मौज़ूदगी बाक़ी मछलियों को हमेशा चौकन्ना रखती ओर अपनी जान बचाने के लिए वे हमेशा अलर्ट रहती। इसीलिए कई दिनों तक टैंक में रह्ने के बावज़ूद उनमे स्फूर्ति ओर ताजापन बना रहता।  Friends, आज बहुत से लोगों की ज़िन्दगी टैंक मे पड़ी उन मछलियों की तरह हो गयी है जिन्हे जगाने की लिए कोई shark मौज़ूद नहीं है। और अगर unfortunately आपके साथ भी ऐसा ही है तो आपको भी आपने life में नये challenges accept करने होंगे। आप जिस रूटीन के आदि हों चुकें हैँ ऊससे कुछ अलग़ करना होगा, आपको अपना दायरा बढ़ाना होगा और एक बार फिर ज़िन्दगी में रोमांच और नयापन लाना होगा। नहीं तो , बासी मछलियों की तरह आपका भी मोल कम हों जायेगा और लोग आपसे मिलने-जुलने की बजाय बचते नजर आएंगे।और दूसरी तरफ अगर आपकी लाइफ में चैलेंजेज हैँ , बाधाएं हैँ तो उन्हें कोसते मत रहिये , कहीं ना कहीं ये आपको fresh and lively बनाये रखती हैँ , इन्हेँ accept करिये, इन्हे overcome करिये और अपना  तेज बनाये रखिये।।

ना भया, ना निर्भया…

ये अचानक क्या हुआ
जल जल उठा है क्यूँ धुआ

बाल बिखरे फटे वसन
रक्त से लथपथ नयन

रो रोके किस्सा फिर कहा
वो दुक्ख का हिस्सा फिर कहा

जा रही थी मैं कहीं
साथ कोई था नहीं

एक रिक्शे तक गयी
वो मिला मुझको वहीँ

चल पड़ी मैं भी तो संग
पर दिखाया उसने रंग

रोक एक सुनसान पर
आ पास बोला कान पर

मैं चीखी मैं चिल्लाई थोड़ी
पर उसने न कलाई छोड़ी

खींचता था अपनी ओर
मैं चीखती थी मुझको छोड़

पर एक ना वो मानता
राक्षस था जानता

पास उसने कुछ निकाला
मुझपे छिड़का कुछ था डाला

मैं हुयी बेहोश तब
बेसुध पड़ी मदहोश तब

मेरे वसन फिर चीर डाले
मैं हवस के थी हवाले

फिर भी खुद को मैंने सम्भाला
हाथ उसका काट डाला

भागी मैं फिर थी उतरकर
भागना चाहती थी मैं घर

पर फिर वो मेरे पीछे आया
मन में मेरे रुदन छाया

भागती सी मैं गिरी फिर
चोट खाती मैं फिरी फिर

सहमी सहमी डर गयी मैं
जैसे कुछ पल मर गयी मैं

लेकर के पेड़ की मैं ओट
छिप छिपाकर अपनी चोट

सिसकियाँ मैं रोकती
अपने मन को टोकती

पास ही एक सलाख थी
मेरे लिए ज्यो साख थी

धीरे से जो मैंने उठाई
दौड़ता आया कसाई

डर के मारे जोर से
बचके सारे शोर से

दे मारी मैंने उसके सर
एक वार में गया वो मर

बस्ती में एक पहुंची मैं फिर
बेहोश होकर रही मैं गिर

होश आया आँखें खुली
अस्पताल में खुदको मिली

मैंने किया अपराध क्या
इसमें कोई बाध क्या

जो कोई ऐसा आएगा
वो तो मारा जाएगा

महिसासुर की देखो बलि
देने को अब दुर्गा चली

सन्न अस्पताल था
वो दिन भी क्या कमाल था

एक चंडी थी जागी तब
जैसे विकृतता सब भागी तब

आत्मरक्षा पहला धर्म
ये ही नारी तेरा कर्म

बनके चंडी चलती जा
दुष्टों को यूँ कुचलती जा!!

___सौरभ कुमार

कौटिल्य अर्थशास्त्र के राजधर्म संबंधी नीतिवचन

करीब ढाई हजार वर्ष पूर्व भारतभूमि पर जिस मौर्य सामाज्य की स्थापना हुई थी उसका श्रेय उस काल के महान राजनीतिज्ञ चाणक्य को जाता है । राजनैतिक चातुर्य के धनी चाणक्य को ही कौटिल्य कहा जाता है । उनके बारे में मैंने पहले कभी अपने इसी ब्लॉग में लिखा है । कौटिलीय अर्थशास्त्र चाणक्य-विरचित ग्रंथ है, जिसमें राजा के कर्तव्यों का, आर्थिक तंत्र के विकास का, प्रभावी शासन एवं दण्ड व्यवस्था आदि का विवरण दिया गया है । उसी ग्रंथ के तीन चुने हुए श्लोकों का उल्लेख मैं यहां पर कर रहा हूं ।

(कौटिलीय अर्थशास्त्र, प्रथम अधिकरण, अध्याय 18)

1. प्रजासुखे सुखं राज्ञः प्रजानां तु हिते हितम् ।
नात्मप्रियं हितं राज्ञः प्रजानां तु प्रियं हितम् ॥

(प्रजा-सुखे सुखम् राज्ञः प्रजानाम् तु हिते हितम्, न आत्मप्रियम् हितम् राज्ञः प्रजानाम् तु प्रियम् हितम् ।)

प्रजा के सुख में राजा का सुख निहित है, प्रजा के हित में ही उसे अपना हित दिखना चाहिए । जो स्वयं को प्रिय लगे उसमें राजा का हित नहीं है, उसका हित तो प्रजा को जो प्रिय लगे उसमें है ।

2. तस्मान्नित्योत्थितो राजा कुर्यादर्थानुशासनम् ।
अर्थस्य मूलमुत्थानमनर्थस्य विपर्ययः ॥

(तस्मात् नित्य-उत्थितः राजा कुर्यात् अर्थ अनुशासनम्, अर्थस्य मूलम् उत्थानम् अनर्थस्य विपर्ययः ।)

इसलिए राजा को चाहिए कि वह नित्यप्रति उद्यमशील होकर अर्थोपार्जन तथा शासकीय व्यवहार संपन्न करे । उद्यमशीलता ही अर्थ (संपन्नता) का मूल है एवं उसके विपरीत उद्यमहीनता अर्थहीनता का कारण है ।

3. अनुत्थाने ध्रुवो नाशः प्राप्तस्यानागतस्य च ।
प्राप्यते फलमुत्थानाल्लभते चार्थसम्पदम् ॥

(अनुत्थाने ध्रुवः नाशः प्राप्तस्य अनागतस्य च, प्राप्यते फलम् उत्थानात् लभते च अर्थ-सम्पदम् ।)

उद्यमशीलता के अभाव में पहले से जो प्राप्त है एवं भविष्य में जो प्राप्त हो पाता उन दोनों का ही नाश निश्चित है । उद्यम करने से ही वांछित फल प्राप्त होता है ओर उसी से आर्थिक संपन्नता मिलती है ।

कौटिल्य ने इन श्लोकों के माध्यम से अपना यह मत व्यक्त किया है कि राजा का कर्तव्य अपना हित साधना और सत्तासुख भोगना नहीं है । आज के युग में राजा अपवाद रूप में ही बचे हैं और उनका स्थान अधिकांश समाजों में जनप्रतिनिधियों ने ले लिया है जिन्हें आम जनता शासकीय व्यवस्था चलाने का दायित्व सोंपती है । कौटिल्य की बातें तो उन पर अधिक ही प्रासंगिक मानी जायेंगी क्योकि वे जनता के हित साधने के लिए जनप्रतिनिधि बनने की बात करते हैं । दुर्भाग्य से अपने समाज में उन उद्येश्यों की पूर्ति विरले जनप्रतिनिधि ही करते हैं ।

उद्योग शब्द से मतलब है निष्ठा के साथ उस कार्य में लग जाना जो व्यक्ति के लिए उसकी योग्यतानुसार शासन ने निर्धारित किया हो, या जिसे उसने अपने लिए स्वयं चुना हो । राजा यानी शासक का कर्तव्य है कि वह लोगों को अनुशासित रखे और कार्यसंस्कृति को प्रेरित करे । अनुशासन एवं कार्यसंस्कृति के अभाव में आर्थिक प्रगति संभव नहीं है । जिस समाज में लोग लापरवाह बने रहें, कार्य करने से बचते हों, समय का मूल्य न समझते हों, और शासन चलाने वाले अपने हित साधने में लगे रहें, वहां संपन्नता पाना संभव नहीं यह आचार्य कौटिल्य का संदेश है ।