आम बजट 2015-16 की प्रमुख 100 बातें …

  1. भारतीय अर्थव्यवस्था की साख बढ़ी है।
  2. राज्यों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया गया।
  3. मुद्रास्फीति दर 5.1% तक गिरी।
  4. चालू खाता घाटा 1.3% से कम रहने की संभावना।
  5. जीडीपी विकास दर 7.4% रहने की उम्मीद।
  6. जन धन योजना से वित्तीय समावेशन सुनिश्चित।
  7. स्वच्छ भारत के तहत 50 लाख शौचालय बने।
  8. डीबीटी के लिए जन-धन, आधार, मोबाइल
    की त्रिसूत्री योजना।
  9. महंगाई पर काबू पाना हमारी बड़ी उपलब्धि।
  10. 2022 तक 2 करोड़ घरों की आवश्यकता।
  11. प्रत्येक परिवार से 1 सदस्य को मिले रोज़गार।
  12. 2020 तक 20 हजार गांव का विद्युतीकरण
    का लक्ष्य।
  13. हर बच्चे के लिए 5 किमी. के भीतर एक सीनियर
    सेकेन्डरी स्कूल हो।
  14. भारत को मैन्युफैक्चरिंग हब बनाया जाएगा।
  15. ‘मेक इन इंडिया’ का उद्देश्य उत्पादन व निर्यात
    बढ़ाना।
  16. 14वें वित्त आयोग के सुझाव ऐतिहासिक।
  17. वित्त आयोग के सुझाव सहकारी संघवाद का उत्तम
    उदाहरण।
  18. केन्द्र मनरेगा को जारी रखेगा।
  19. वित्तीय घाटे को 4.1% तक सीमित रखेंगे।
  20. अगले 3 वर्ष में वित्तीय घाटे को 3% से नीचे लाने
    का लक्ष्य।
  21. डीबीटी के तहत छात्रवृत्ति लाभार्थियों की संख्या 1
    करोड़ से बढ़ाकर 10.3 करोड़ का लक्ष्य।
  22. एलपीजी में 6335 करोड़ रु. का प्रत्यक्ष अंतरण।
  23. कृषि क्षेत्र को भारी प्रोत्साहन।
  24. उर्वरता में सुधार के लिए मृदा स्वास्थ्य कार्ड
    स्कीम।
  25. जैव खेती को मिलेगा प्रोत्साहन।
  26. ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ के द्वारा उत्पादन बढ़ाने
    का लक्ष्य।
  27. सूक्ष्म सिंचाई और जल संभर के लिए 5,300 करोड़
    रु।
  28. ग्रामीण अवसंरचना विकास कोष के लिए 25,000
    करोड़ रु।
  29. दीर्घावधि ग्रामीण ऋण कोष के लिए 15.000 करोड़
    रु।
  30. अल्पावधि सहकारी ग्रामीण ऋण पुनर्वित्त हेतु
    45,000 करोड़ रु।
  31. किसानों के लिए 8.5 लाख करोड़ का ऋण प्रदान
    करने का लक्ष्य।
  32. मनरेगा के लिए 34,699 करोड़ रु. का आरंभिक
    आवंटन।
  33. नई सूक्ष्म इकाईयों के लिए ‘MUDRA’ नामक
    विकास बैंक।
  34. ‘MUDRA’ छोटे और पिछड़े उद्यमियों को सहयोग
    करेगी।
  35. ‘MUDRA’ के लिए 20,000 करोड़ रु.
    की निधि का प्रस्ताव।
  36. जन धन के लिए 1,54,000 डाकघरों के नेटवर्क
    का होगा उपयोग।
  37. नई प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना शीघ्र
    होगी शुरू।
  38. 12 रुपये प्रति वर्ष के प्रीमियम पर 2 लाख
    का दुर्घटना बीमा।
  39. अटल पेंशन योजना की होगी शुरुआत।
  40. 18-50 आयु वर्ग के लिए प्रधानमंत्री जीवन
    ज्योति बीमा योजना।
  41. योजना का प्रीमियम 330 रु. प्रतिवर्ष अथवा 1 रु.
    प्रतिदिन से कम।
  42. प्राकृतिक मृत्यु पर 2 लाख का कवर देगी।
  43. PPF में 3,000 करोड़, EPF में 6,000 करोड़
    बिना दावे की राशि।
  44. बिना दावे की राशि का उपयोग कमजोर वर्गों के
    उत्थान में होगा।
  45. वरिष्ठ नागरिकों (BPL) के लिए शारीरिक
    सहायता यंत्र।
  46. SC, ST, महिलाओं के कल्याण के लिए बजटीय
    आवंटन बढ़ा।
  47. SC के लिए 30,851 करोड़ रु. ST के लिए 19,980
    करोड़ रु.।
  48. महिला कल्याण के लिए 79,258 करोड़ रु.
    का आवंटन।
  49. अवसंरचना क्षेत्र में सार्वजनिक निवेश बढ़ाए जाने
    की जरूरत।
  50. अल्पसंख्यक युवाओं के लिए ‘नई मंजिल’ नामक
    योजना।
  51. अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के लिए आवंटन 3,738
    करोड़।
  52. राष्ट्रीय निवेश और अवसंरचना निधि स्थापित करने
    का प्रस्ताव।
  53. रेल, सड़क, सिंचाई परियोजनाओं के लिए करमुक्त
    बांड।
  54. अवसंरचना विकास में PPP मॉडल को मज़बूत करना।
  55. अटल नवोन्मेश मिशन की स्थापना का प्रस्ताव।
  56. नवोन्मेश मिशन के लिए 150 करोड़ की आरंभिक
    राशि।
  57. ‘समावेशी और स्थायी विकास कार्यनीति का मुख्य
    आधार’।
  58. वैश्विक पूंजी जुटाने की अधिक उदार प्रणाली पर
    जोर।
  59. स्वरोज़गार एवं प्रतिभा के उपयोग हेतु सरकार सेतु
    नामक तंत्र।
  60. स्वरोज़गार के लिए नीति आयोग के तहत 1000
    करोड़ का आवंटन।
  61. निजी क्षेत्र के पत्तनों के प्रोत्साहन के उपाय।
  62. 5 नई अल्ट्रा मेगा विद्युत परियोजनाएं शुरू करने
    का प्रस्ताव।
  63. प्रत्येक अल्ट्रा मेगा परियोजना की क्षमता 4000
    मेगावाट।
  64. कुडनकुलम संयंत्र की दूसरी इकाई 2015-16 में
    होगी चालू।
  65. मनरेगा के लिए 5000 करोड़ आवंटन बढ़ाने
    का होगा प्रयास।
  66. ICDS के लिए 1500 करोड़, सिंचाई योजना के लिए
    3000 करोड़।
  67. अवसंरचना विकास के लिए लोक ऋण प्रबंधन
    एजेंसी का प्रस्ताव।
  68. वायदा बाजार आयोग के सेबी में विलय का प्रस्ताव।
  69. वायदा बाजार को मज़बूत करना और
    सट्टेबाज़ी रोकना मकसद।
  70. क्षेत्रीय तटस्थ वित्तीय निपटान
    एजेंसी की स्थापना पर कार्यबल।
  71. भारतीय वित्त संहिता को संसद में विचारार्थ प्रस्तुत
    किया जाएगा।
  72. प्रतिस्पर्धी प्रत्यक्ष कर प्रणाली का प्रस्ताव।
  73. कर्मचारियों को EPF या NPS चुनने का विकल्प।
  74. स्वर्ण मुद्रीकरण स्कीम जारी की जाएगी।
  75. भारतीय स्वर्ण सिक्का बनाने का काम शुरू करने
    का प्रस्ताव।
  76. कालाधन रोकने के लिए नकद लेन-देन हतोत्साहित
    करने पर जोर।
  77. विदेशी निवेश के लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाने के
    उपाय।
  78. महिलाओं की सुरक्षा के लिए सरकार वचनबद्ध।
  79. निर्भया कोष में अतिरिक्त 1000 करोड़ मुहैया कराने
    का निर्णय।
  80. विश्व धरोहर स्थलों पर बेहतर सुविधाओं
    का होगा विकास।
  81. 150 देशों के पर्यटकों को आगमन पर वीज़ा सुविधा।
  82. नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता लक्ष्य 2022 के लिए
    1.75 लाख मेगावाट।
  83. स्किल इंडिया और मेक इन इंडिया कार्यक्रम में
    बेहतर तालमेल।
  84. दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना के लिए
    1500 करोड़।
  85. छात्रवृति योजनाओं की निगरानी के लिए वित्तीय
    सहायता प्राधिकरण।
  86. जम्मू-कश्मीर, पंजाब, तमिलनाडु, हिमाचल प्रदेश,
    असम में एम्स की स्थापना।
  87. बिहार में एम्स जैसे अन्य संस्थान
    की स्थापना का प्रस्ताव।
  88. कर्नाटक में आईआईटी की स्थापना का प्रस्ताव।
  89. आईएसएम धनबाद को पूर्ण आईआईटी में अपग्रेड
    करने का प्रस्ताव।
  90. अमृतसर में बागवानी अनुसंधान संस्थान स्थापित करने
    का प्रस्ताव।
  91. जम्मू-कश्मीर और आंध्र प्रदेश में आईआईएम होंगे
    स्थापित।
  92. नागालैंड, ओडिशा में विज्ञान तथा शिक्षा अनुसंधान संस्थान का प्रस्ताव।
  93. सरकारी क्षेत्र के बैंकिंग प्रशासन में सुधार के लिए बैंक बोर्ड ब्यूरो।
  94. राष्ट्रीय ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क कार्यक्रम
    को और बढ़ाना।
  95. बिहार और पश्चिम बंगाल को विशेष सहायता देने का प्रस्ताव।
  96. मध्याह्न भोजन सहित शिक्षा क्षेत्र के लिए
    68,968 करोड़ का आवंटन।
  97. स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए 33,152 करोड़
    का आवंटन।
  98. मनरेगा सहित ग्रामीण विकास कार्यों के लिए
    79,526 करोड़ का आवंटन।
  99. आवास एवं शहरी विकास के लिए 22,407 करोड़ का आवंटन।
  100. महिला एवं बाल विकास के लिए 10,351 करोड़ का आवंटन।

बहुत सुँदर पंक्तियाँ- “संयुक्त परिवार”

वो पंगत में बैठ के
निवालों का तोड़ना,
वो अपनों की संगत में
रिश्तों का जोडना,

वो दादा की लाठी पकड़
गलियों में घूमना,
वो दादी का बलैया लेना
और माथे को चूमना,

सोते वक्त दादी पुराने
किस्से कहानी कहती थीं,
आंख खुलते ही माँ की
आरती सुनाई देती थी,

इंसान खुद से दूर
अब होता जा रहा है, 
वो संयुक्त परिवार का दौर
अब खोता जा रहा है।

माली अपने हाथ से
हर बीज बोता था, 
घर ही अपने आप में
पाठशाला होता था,

संस्कार और संस्कृति
रग रग में बसते थे,
उस दौर में हम
मुस्कुराते नहीं
खुल कर हंसते थे।

मनोरंजन के कई साधन
आज हमारे पास है, 
पर ये निर्जीव है
इनमें नहीं साँस है,

फैशन के इस दौर में
युवा वर्ग बह गया,
राजस्थान से रिश्ता बस
जात जडूले का रह गया।

ऊँट आज की पीढ़ी को
डायनासोर जैसा लगता है,
आँख बंद कर वह
बाजरे को चखता है।

आज गरमी में एसी
और जाड़े में हीटर है,
और रिश्तों को
मापने के लिये
स्वार्थ का मीटर है।
      
वो समृद्ध नहीं थे फिर भी
दस दस को पालते थे,   
खुद ठिठुरते रहते और
कम्बल बच्चों पर डालते थे।

मंदिर में हाथ जोड़ तो
रोज सर झुकाते हैं,
पर माता-पिता के धोक खाने
होली दीवाली जाते हैं।

मैं आज की युवा पीढी को
इक बात बताना चाहूँगा, 
उनके अंत:मन में एक
दीप जलाना चाहूँगा

ईश्वर ने जिसे जोड़ा है
उसे तोड़ना ठीक नहीं,
ये रिश्ते हमारी जागीर हैं
ये कोई भीख नहीं।

अपनों के बीच की दूरी
अब सारी मिटा लो,
रिश्तों की दरार अब भर लो
उन्हें फिर से गले लगा लो।

अपने आप से
सारी उम्र नज़रें चुराओगे,
अपनों के ना हुए तो
किसी के ना हो पाओगे
सब कुछ भले ही मिल जाए
पर अपना अस्तित्व गँवाओगे

बुजुर्गों की छत्र छाया में ही
महफूज रह पाओगे।
होली बेईमानी होगी
दीपावली झूठी होगी,
अगर पिता दुखी होगा
और माँ रूठी होगी।।

अन्तःकरण को छूने वाली है ये कविता।

लेखक : अज्ञात

अकबर बीरबल की कहानियां – 2

रेत और चीनी

बादशाह अकबर के दरबार की कार्यवाही चल रही थे, तभी एक दरबारी हाथ मी शीशे का एक मर्तबान लिए वहाँ आया बादशाह ने पूछा “क्या है इस मर्तबान मे?”

दरबारी बोला “इसमे रेत और चीनी का मिश्रण है“

“वह किसलिए”, फ़िर पूछा अकबर ने

“माफ़ी चाहता हूँ हुजुर” दरबारी बोला, “हम बीरबल की काबिलियत को परखना चाहते हैं, हम चाहते हैं की वह रेत से चीनी का दाना दाना अलग कर दे”

बादशाह अब बीरबल से मुखातिब हुए, “देख लो बीरबल, रोज ही तुम्हारे सामने एक नई समस्या रख दी जाती है, अब तुम्हे बिना पानी मे घोले इस रेत मे से चीनी को अलग करना है “

“कोई समस्या नहीं जहाँपनाह” बीरबल बोले, यह तो मेरे बाएँ हाथ का काम है, कहकर बीरबल ने मर्तबान उठाया और चल दिया दरबार से बाहर।

बीरबल बाग़ मे पहुंचकर रुका और मर्तबान मे भरा सारा मिश्रण आम के एक बड़े पेड़ के चारो और बिखेर दिया “यह तुम क्या कर रहे हो?”, एक दरबारी ने पूछा

बीरबल बोले, “यह तुम्हे कल पता चलेगा”

अगले दिन फ़िर वे सभी उस आम के पेड़ के नीचे जा पहुंचे। वहाँ अब केवल रेत पड़ी थी। चीनी के सारे दाने चीटियाँ बटोर कर अपने बिलों मे पहुंचा चुकी थीं। कुछ चीटियाँ तो अभी भी चीनी के दाने घसीट कर ले जाती दिखायी दे रही थीं।

“लेकिन सारी चीनी कहाँ चली गई ?” दरबारी ने पूछा

“रेत से अलग हो गई” बीरबल ने कहा

सभी जोर से हंस पड़े।

बादशाह ने दरबारी से कहा कि “अब तुम्हे चीनी चाहिये तो चीटियों के बिल मे घुसों”

सभी ने जोर का ठहाका लगाया और बीरबल की अक्ल की दाद दी।

राज्य में कितने कौए है

एक दिन अकबर अपने मत्रीं बीरबल के साथ अपने महल के बाग में घूम रहे थे | अकबर बागों में उडते कौओं को देखकर कुछ सोचने लगे और बीरबल से पूछा, “क्यों बीरबल, हमारे राज्य में कितने कौए होंगे”?

बीरबल ने कुछ देर अंगुलियों पर कुछ हिसाब लगाया और बोले,”हुज़ूर, हमारे राज्य में कुल मिलाकर 95,463 कौए हैं”

“तुम इतना विश्वास से कैसे कह सकते हो?”

हुज़ूर, “आप खुद गिन लीजिए”, बीरबल बोले

अकबर को कुछ इसी प्रकार के जवाब का अंदेशा था।

उन्होंने ने पूछा, ”बीरबल, यदि इससे कम हुए तो”?

“तो इसका मतलब है कि कुछ कौए अपने रिश्तेदारों से मिलने दूसरे राज्यों में गये हैं”

“और यदि ज्यादा हुए तो?”

“तो इसका मतलब यह हैं हुजूर कि कुछ कौए अपने रिश्तेदारों से मिलने हमारे राज्य में आये हैं”, बीरबल ने मुस्कुरा कर जवाब दिया।

अकबर एक बार फिर मुस्कुरा कर रह गये।

Via_ http://bit.ly/ThaluaClub

अकबर बीरबल की कहानियां

हरा घोडा

एक दिन बादशाह अकबर घोड़े पर बैठकर शाही बाग में घूमने गए। साथ में बीरबल भी था। चारों ओर हरे-भरे वृक्ष और हरी-हरी घास देखकर अकबर को बहुत आनन्द आया। उन्हें लगा कि बगीचे में सैर करने के लिए तो घोड़ा भी हरे रंग का ही होना चाहिए।

उन्होंने बीरबल से कहा, “बीरबल मुझे हरे रंग का घोड़ा चाहिए। तुम मुझे सात दिन में हरे रंग का घोड़ा ला दो। यदि तुम हरे रंग का घोड़ा न ला सके तो हमें अपनी शक्ल मत दिखाना।” हरे रंग का घोड़ा तो होता ही नहीं है। अकबर और बीरबल दोनों को यह मालूम था। लेकिन अकबर को तो बीरबल की परीक्षा लेनी थी।

दरअसल, इस प्रकार के अटपटे सवाल करके वे चाहते थे कि बीरबल अपनी हार स्वीकार कर लें और कहें कि जहांपनाह मैं हार गया, मगर बीरबल भी अपने जैसे एक ही थे। बीरबल के हर सवाल का सटीक उत्तर देते थे कि बादशाह अकबर को मुंह की खानी पड़ती थी।

बीरबल हरे रंग के छोड़ की खोज के बहाने सात दिन तक इधर-उधर घूमते रहे। आठवें दिन वे दरबार में हाजिर हुए और बादशाह से बोले, “जहांपनाह ! मुझे हरे रंग का घोड़ा मिल गया है।” बादशाह को आश्चर्य हुआ। उन्होंने कहा, “जल्दी बताओ, कहां है हरा घोड़ा ? बीरबर ने कहा, “जहांपनाह ! घोड़ा तो आपको मिल जाएगा, मैंने बड़ी मुश्किल से उसे खोजा है, मगर उसके मालिक ने दो शर्त रखी हैं।

बादशाह ने कहा, “क्या शर्ते हैं?”

“पहली शर्त तो यह है कि घोड़ा लेने कि लिए आपको स्वयं जाना होगा।

“यह तो बड़ी आसान शर्त है। दूसरी शर्त क्या है ?

“घोड़ा खास रंग का है, इसलिए उसे लाने का दिन भी खास ही होगा। उसका मालिक कहता है कि सप्ताह के सात दिनों के अलावा किसी भी दिन आकर उसे ले जाओ।

अकबर बीरबल का मुंह देखते रह गए।

बीरबल ने हंसते हुए कहा, “जहांपनाह! हरे रंग का घोड़ा लाना हो, तो उसकी शर्तें भी माननी ही पड़ेगी।

अकबर खिलखिला कर हंस पड़े। बीरबल की चतुराई से वह खुश हुए। समझ गए कि बीरबल को मूर्ख बनाना सरल नहीं है।

सबसे बड़ी चीज़

एक दिन बीरबल दरबार में उपस्थित नहीं थे। ऐसे में बीरबल से जलने वाले सभी सभासद बीरबल के खिलाफ अकबर के कान भर रहे थे। अकसर ऐसा ही होता था, जब भी बीरबल दरबार में उपस्थित नहीं होते थे, तभी दरबारियों को मौका मिल जाता था। आज भी ऐसा ही मौका था।

बादशाह के साले मुल्ला दो प्याजा की शह पाए कुछ सभासदों ने कहा-”जहांपनाह ! आप वास्तव में बीरबल को आवश्यकता से अधिक मान देते हैं, हम लोगों से ज्यादा उन्हें चाहते हैं। आपने उन्हें बहुत सिर चढ़ा रखा है। जबकि जो काम वे करते हैं, वह हम भी कर सकते हैं। मगर आप हमें मौका ही नहीं देते।”

बादशाह को बीरबल की बुराई अच्छी नहीं लगती थी, अतः उन्होंने उन चारों की परीक्षा ली-”देखो, आज बीरबल तो यहाँ हैं नहीं और मुझे अपने एक सवाल का जवाब चाहिए। यदि तुम लोगों ने मेरे प्रश्न का सही-सही जवाब नहीं दिया तो मैं तुम चारों को फांसी पर चढ़वा दूंगा।” बादशाह की बात सुनकर वे चारों घबरा गए।

उनमें से एक ने हिम्मत करके कहा-”प्रश्न बताइए बादशाह सलामत ?” “संसार में सबसे बड़ी चीज क्या है ? और अच्छी तरह सोच-समझ कर जवाब देना वरना मैं कह चुका हूं कि तुम लोगों को फांसी पर चढ़वा दिया जाएगा।” बादशाह अकबर ने कहा- “अटपटे जवाब हरगिज नहीं चलेंगे। जवाब एक हो और बिलकुल सही हो।” “बादशाह सलामत ? हमें कुछ दिनों की मोहलत दी जाए।” उन्होंने सलाह करके कहा।

“ठीक है, तुम लोगों को एक सप्ताह का समय देता हूं।” बादशाह ने कहा।

चारों दरबारी चले गए और दरबार से बाहर आकर सोचने लगे कि सबसे बड़ी चीज क्या हो सकती है ?

एक दरबारी बोला-”मेरी राय में तो अल्लाह से बड़ा कोई नहीं।”

“अल्लाह कोई चीज नहीं है। कोई दूसरा उत्तर सोचो।” दूसरा बोला।

“सबसे बड़ी चीज है भूख जो आदमी से कुछ भी करवा देती है।” तीसरे ने कहा।

“नहीं…नहीं, भूख भी बरदाश्त की जा सकती है।”

“फिर क्या है सबसे बड़ी चीज ?” छः दिन बीत गए लेकिन उन्हें कोई उत्तर नहीं सूझा। हार कर वे चारों बीरबल के पास पहुँचे और उसे पूरी घटना कह सुनाई, साथ ही हाथ जोड़कर विनती की कि प्रश्न का उत्तर बता दें।

बीरबल ने मुस्कराकर कहा-”मैं तुम्हारे प्रश्न का उत्तर दूंगा, लेकिन मेरी एक शर्त है।” “हमें आपकी हजार शर्तें मंजूर हैं।” चारों ने एक स्वर में कहा-”बस आप हमें इस प्रश्न का उत्तर बताकर हमारी जान बख्शी करवाएं। बताइए आपकी क्या शर्त है ?” “तुम में से दो अपने कन्धों पर मेरी चारपाई रखकर दरबार तक ले चलोगे। एक मेरा हुक्का पकड़ेगा, एक मेरे जूते लेकर चलेगा।” बीरबल ने अपनी शर्त बताते हुए कहा।

यह सुनते ही वे चारों सन्नाटे में आ गए। उन्हें लगा मानो बीरबल ने उनके गाल पर कसकर तमाचा मार दिया हो। मगर वे कुछ बोले नहीं। अगर मौत का खौफ न होता तो वे बीरबल को मुंहतोड़ जवाब देते, मगर इस समय मजबूर थे, अतः तुरन्त राजी हो गए।

दो ने अपने कन्धों पर बीरबल की चारपाई उठाई, तीसरे ने उनका हुक्का और चौथा जूते लेकर चल दिया। रास्ते में लोग आश्चर्य से उन्हें देख रहे थे। दरबार में बादशाह ने भी यह मंजर देखा और वह मौजूद दरबारियों ने भी। कोई कुछ न समझ सका। तभी बीरबल बोले, ”महाराज, दुनिया में सबसे बड़ी चीज है-गरज। अपनी गरज से ये पालकी यहां तक उठाकर लाए हैं।” बादशाह मुस्कराकर रह गए। वे चारों सिर झुकाकर एक ओर खड़े हो गए।

सबसे बड़ा हथियार

अकबर और बीरबल के बीच कभी-कभी ऐसी बातें भी हुआ करती थीं जिनकी परख करने में जान का खतरा रहता था। एक बार अकबर ने बीरबल से पूछा-”बीरबल, संसार में सबसे बड़ा हथियार कौन-सा है ?” “बादशाह सलामत ! संसार में सबसे बड़ा हथियार है आत्मविश्वास।” बीरबल ने जवाब दिया।

अकबर ने बीरबल की इस बात को सुनकर अपने दिल में रख लिया और किसी समय इसकी परख करने का निश्चय किया। दैवयोग से एक दिन एक हाथी पागल हो गया। ऐसे में हाथी को जंजीरों में जकड़ कर रखा जाता था।

अकबर ने बीरबल के आत्मविश्वास की परख करने के लिए उधर तो बीरबल को बुलवा भेजा और इधर हाथी के महावत को हुक्म दिया कि जैसे ही बीरबल को आता देखे, वैसे ही हाथी की जंजीर खोल दे।

बीरबल को इस बात का पता नहीं था। जब वे बादशाह अकबर से मिलने उनके दरबार की ओर जा रहे थे तो पागल हाथी को छोड़ा जा चुका था। बीरबल अपनी ही मस्ती में चले जा रहे थे कि उनकी नजर पागल हाथी पर पड़ी, जो चिंघाड़ता हुआ उनकी तरफ आ रहा था।

बीरबल हाजिर जवाब, बेहद बुद्धिमान, चतुर और आत्मविश्वासी थे। वे समझ गए कि बादशाह अकबर ने आत्मविश्वास और बुद्धि की परीक्षा के लिए ही पागल हाथी को छुड़वाया है।

दौड़ता हुआ हाथी सूंड को उठाए तेजी से बीरबल की ओर चला आ रहा था। बीरबल ऐसे स्थान पर खड़े थे कि वह इधर-उधर भागकर भी नहीं बच सकते थे। ठीक उसी वक्त बीरबल को एक कुत्ता दिखाई दिया। हाथी बहुत निकट आ गया था। इतना करीब कि वह बीरबल को अपनी सूंड में लपेट लेता। तभी बीरबल ने झटपट कुत्ते की पिछली दोनों टांगें पकड़ीं और पूरी ताकत से घुमाकर हाथी पर फेंका। बुरा तरह घबराकर चीखता हुआ कुत्ता जब हाथी से जाकर टकराया तो उसकी भयानक चीखें सुनकर हाथी भी घबरा गया और पलटकर भागा।

अकबर को बीरबल की इस बात की खबर मिल गई और उन्हें यह मानना पड़ा कि बीरबल ने जो कुछ कहा है, वह सच है। आत्मविश्वास ही सबसे बड़ा हथियार है।

सब लोग एक जैसा सोचते है
दरबार की कार्यवाही चल रही थी। सभी दरबारी एक ऐसे प्रश्न पर विचार कर रहे थे जो राज-काज चलाने की दृष्टि से बेहद अहम न था। सभी एक-एक कर अपनी राय दे रहे थे। बादशाह दरबार में बैठे यह महसूस कर रहे थे कि सबकी राय अलग है। उन्हें आश्चर्य हुआ कि सभी एक जैसे क्यों नहीं सोचते!

तब अकबर ने बीरबल से पूछा, “क्या तुम बता सकते हो कि लोगों की राय आपस में मिलती क्यों नहीं ? सब अलग-अलग क्यों सोचते हैं ?”

“हमेशा ऐसा नहीं होता, बादशाह सलामत !” बीरबल बोला, “कुछ समस्याएं ऐसी होती हैं जिन पर सभी के विचार समान होते हैं।” इसके बाद कुछ और काम निपटा कर दरबार की कार्यवाही समाप्त हो गई। सभी अपने-अपने घरों को लौट चले।

उसी शाम जब बीरबल और अकबर बाग में टहल रहे थे तो बादशाह ने फिर वही राग छेड़ दिया और बीरबल से बहस करने लगे।

तब बीरबल बाग के ही एक कोने की ओर उंगली से संकेत करता हुआ बोला, “वहां उस पेड़ के निकट एक कुआं है। वहां चलिए, मैं कोशिश करता हूं कि आपको समझा सकूं कि जब कोई समस्या जनता से जुड़ी हो तो सभी एक जैसा ही सोचते हैं। मेरे कहने का मतलब यह है कि बहुत सी ऐसी बातें हैं जिनको लेकर लोगों के विचार एक जैसे होते हैं।”

अकबर ने कुछ देर कुंए की ओर घूरा, फिर बोले, “लेकिन मैं कुछ समझा नहीं, तुम्हारे समझाने का ढंग कुछ अजीब सा है।” बादशाह जबकि जानते थे कि बीरबल अपनी बात सिद्ध करने के लिए ऐसे ही प्रयोग करता रहता है।

“सब समझ जाएंगे हुजूर !” बीरबल बोला, “आप शाही फरमान जारी कराएं कि नगर के हर घर से एक लोटा दूध लाकर बाग में स्थित इस कुएं में डाला जाए। दिन पूर्णमासी का होगा। हमारा नगर बहुत बड़ा है, यदि हर घर से एक लोटा दूध इस कुएं में पड़ेगा तो यह दूध से भर जाएगा।”

बीरबल की यह बात सुन अकबर ठहाका लगाकर हंस पड़े। फिर भी उन्होंने बीरबल के कहेनुसार फरमान जारी कर दिया।

शहर भर में मुनादी करवा दी गई कि आने वाली पूर्णमासी के दिन हर घर से एक लोटा दूध लाकर शाही बाग के कुएं में डाला जाए। जो ऐसा नहीं करेगा उसे सजा मिलेगी।

पूर्णमासी के दिन बाग के बाहर लोगों की कतार लग गई। इस बात का विशेष ध्यान रखा जा रहा था कि हर घर से कोई न कोई वहां जरूर आए। सभी के हाथों में भरे हुए पात्र (बरतन) दिखाई दे रहे थे।

बादशाह अकबर और बीरबल दूर बैठे यह सब देख रहे थे और एक-दूसरे को देख मुस्करा रहे थे। सांझ ढलने से पहले कुएं में दूध डालने का काम पूरा हो गया हर घर से दूध लाकर कुएं में डाला गया था। जब सभी वहां से चले गए तो अकबर व बीरबल ने कुएं के निकट जाकर अंदर झांका। कुआं मुंडेर तक भरा हुआ था। लेकिन यह देख अकबर को बेहद हैरानी हुई कि कुएं में दूध नहीं पानी भरा हुआ था। दूध का तो कहीं नामोनिशान तक न था।

हैरानी भरी निगाहों से अकबर ने बीरबल की ओर देखते हुए पूछा, “ऐसा क्यों हुआ ? शाही फरमान तो कुएं में दूध डालने का जारी हुआ था, यह पानी कहां से आया ? लोगों ने दूध क्यों नहीं डाला ?”

बीरबल एक जोरदार ठहाका लगाता हुआ बोला, “यही तो मैं सिद्ध करना चाहता था हुजूर ! मैंने कहा था आपसे कि बहुत सी ऐसी बातें होती हैं जिस पर लोग एक जैसा सोचते हैं, और यह भी एक ऐसा ही मौका था। लोग कीमती दूध बरबाद करने को तैयार न थे। वे जानते थे कि कुएं में दूध डालना व्यर्थ है। इससे उन्हें कुछ मिलने वाला नहीं था। इसलिए यह सोचकर कि किसी को क्या पता चलेगा, सभी पानी से भरे बरतन ले आए और कुएं में उड़ेल दिए। नतीजा…दूध के बजाय पानी से भर गया कुआं।”

बीरबल की यह चतुराई देख अकबर ने उसकी पीठ थपथपाई।

बीरबल ने सिद्ध कर दिखाया था कि कभी-कभी लोग एक जैसा भी सोचते हैं।

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प्रवेश परीक्षाएं-12 वीं कक्षा के बाद

12वीं बोर्ड की परीक्षा एक ओर जहाँ ख़त्म हो जाती है। वहीं, प्रतियोगी परीक्षाओं का दबाव अब बढ़ जाता है। कई प्रतियोगी परीक्षाओं की आवेदन प्रक्रिया जारी हो जाती है, जिनके लिए 12वीं पास विद्यार्थी ही नहीं, 12वीं की परीक्षा की तैयारी में जुटे विद्यार्थी भी आवेदन कर सकते हैं।
इनमें कुछ परीक्षाएं ऐसी हैं, जिनके लिए किसी भी स्ट्रीम के विद्यार्थी योग्य हैं, जबकि कुछ के लिए किसी खास स्ट्रीम के विद्यार्थी ही आवेदन कर सकते हैं। जिन परीक्षाओं के लिए किसी भी स्ट्रीम के विद्यार्थी आवेदन कर सकते हैं, उनमें प्रमुख हैं- नेशनल काउंसिल फॉर होटल मैनेजमेंट एंड कैटरिंग टेक्नोलॉजी (एनसीएचएमएटी) जेइइ परीक्षा और कॉमन लॉ एंट्रेंस टेस्ट (क्लैट) की परीक्षा। इनके लिए आवेदन कर रहे विद्यार्थी बोर्ड परीक्षाओं के साथ ही इनकी तैयारी कर सकते हैं।
एनसीएचएमएटी जेइइ
यह ज्वॉइंट एंट्रेंस एग्जाम (जेइइ) नेशनल काउंसिल ऑफ होटल मैनेजमेंट एंड कैटरिंग टेक्नोलॉजी और इंदिरा गांधी ओपन यूनिवर्सिटी (इग्नू) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित होता है। इसके माध्यम से 21 केंद्रीय संस्थानों, राज्य सरकारों के 14 और होटल मैनेजमेंट का कोर्स कराने वाले 15 निजी संस्थानों में प्रवेश मिलता है।
योग्यता : किन्हीं पांच विषयों के साथ 12वीं की परीक्षा पास करनेवाले या बोर्ड परीक्षा में बैठ रहे विद्यार्थी इसके लिए आवेदन कर सकते हैं। जिस वर्ष आवेदन मांगे जाते हैं उस वर्ष में सामान्य और अन्य पिछड़ा वर्ग के आवेदकों की अधिकतम उम्र 22 वर्ष होनी चाहिए।
कैसे करें आवेदन : इस परीक्षा के लिए आवेदन ऑनलाइन करना होता। भरे हुए आवेदन पत्र परीक्षा आयोजित करने वाले संबंधित संस्थान के पते पर भेजें जाते हैं। जैसा कि छात्र जानते हैं कि प्रतिवर्ष क्रमानुसार विभिन्न आइआइटी द्वारा इस परीक्षा का आयोजन किया जाता है।
परीक्षा पैटर्न : परीक्षा तीन घंटे की होती, जिसमें 200 अंकों के प्रश्न आते हैं। इसमें 0.25 अंकों की निगेटिव मार्किग भी होती है। परीक्षा में पांच भाग होते है। न्यूमेरिकल एबिलिटी और साइंटिफिक एप्टीट्यूट, रीजनिंग एंड लॉजिकल डिडेक्शन और जनरल नॉलेज एंड करेंट अवेयरनेस से 30-30 प्रश्न पूछे जाते हैं। इंगलिश लैंग्वेज से 60 और एप्टीट्यूड फॉर सर्विस सेक्टर से 50 प्रश्न पूछे जाते हैं। दिया गया पैर्टन परिवर्तित भी हो सकता है नवीनतम सूचना प्राप्त करने के लिए विभिन्न समाचार माध्यम से जानकारी प्राप्त करते रहें और विकासपीडिया भी आपको इस विषय पर अद्यतन जानकारी यहां पर पोस्ट करेगा। आप चाहे तो आइआइटी संस्थानों की वेबसाइट पर जाकर जानकारी ले सकते हैं।
क्लैट – सयुंक्त विधि स्नात्तक परीक्षा
क्लैट लॉ के अंडर ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स में दाखिला पाने की राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा है। देश की 14 लॉ यूनिवर्सिटी इसे बारी-बारी से आयोजित करती हैं।नवीनतम सूचना प्राप्त करने के लिए विभिन्न समाचार माध्यम से जानकारी प्राप्त करते रहें और विकासपीडिया भी इस विषय पर अद्यतन जानकारी देता रहेगा। आप चाहे तो आइआइटी संस्थानों की वेबसाइट पर जाकर जानकारी ले सकते हैं।
योग्यता : 12वीं किसी भी स्ट्रीम से 45 फीसदी अंकों के साथ पास विद्यार्थी इसके लिए योग्य हैं। आवेदन मांगे गये साल में आवेदकों की अधिकतम उम्र 20 वर्ष होनी चाहिए।
कैसे करें आवेदन : इसके लिए आवेदन ऑनलाइन करना होता है।
परीक्षा पैटर्न : परीक्षा दो घंटे की होती है। इसमें 1-1 अंक के 200 बहुवैकल्पिक वस्तुनिष्ठ प्रश्न पूछे जाते हैं। गलत जवाब पर 0 .25 अंक काटे जाते हैं। परीक्षा में पास होने के बाद इंटरव्यू और ग्रुप डिस्कशन भी होता। परीक्षा में पांच हिस्से होंते हैं। इंगलिश (कॉम्प्रीहेंशन) के 40, जनरल नॉलेज व करेंट अफेयर्स के 50, एलिमेंट्री मैथमेटिक्स (न्यूमेरिकल एबिलिटी) के 20, लीगल एप्टीट्यूड के 50, लॉजिकल रीजनिंग के 40 प्रश्न।
वेबसाइट- http://www.clat.ac.in

तैयारी क्लैट की: हर विषय के साथ संतुलन है जरूरी
क्लैट में सफलता के लिए जरूरी है तैयारी के दौरान हर विषय को बराबर समय देना और मॉडल प्रश्नपत्रों का लगातार अभ्यास करना। बेहतर रणनीति के साथ तैयारी करने से इस परीक्षा में अपना अच्छा परिणाम प्राप्त किया जा सकता है।।
सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल एक जनहित याचिका में कहा गया था कि क्यों न ऐसी एकीकृत प्रवेश परीक्षा शुरू की जाये, जो भविष्य के वकीलों को बेहतर कानूनी दृष्टिकोण तो प्रदान करे, साथ ही न्यायपालिका को भी मजबूती दे। इसके बाद कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट सामने आया। 12वीं के बाद छात्र लॉ के डिग्री प्रोग्राम में प्रवेश ले सकते हैं। क्लैट का आयोजन देश के नेशनल लॉ स्कूल/ यूनिवर्सिटीज अपने अंडर ग्रेजुएट (एलएलबी) और पोस्ट ग्रेजुएट (एलएलएम) प्रोग्रामों में प्रवेश के लिए करते हैं।

परीक्षा पैटर्न को जानें
प्रश्नों का स्तर 12वीं स्तर का होता है। इसलिए 12वीं के सभी विषयों के कांसेप्ट पूरी तरह क्लियर होने चाहिए।
क्लैट अंडरग्रेजुएट परीक्षा में 40 अंक की अंगरेजी पूछी जाती है। इसमें कॉम्प्रीहेंशन, वर्ड मीनिंग, करेक्ट, इनकरेक्ट, फिल इन द ब्लैंक्स, चूजिंग द राइट वर्ड जैसी चीजें प्रमुख हैं। मैथ्स प्रश्नपत्र में मात्र 20 अंकों की मैथ्स आती है। प्रश्न हाइस्कूल स्तर के होते हैं। 50 प्रश्नों वाले जीके सेक्शन की अच्छी तैयारी के लिए साल भर के राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम, पुरस्कार, विज्ञान आदि की उपलब्धियों आदि से संबधित प्रश्नों का अध्ययन करें। 40 प्रश्नों वाले लॉजिकल रीजिनिंग के सेक्शन का प्रावधान उम्मीदवारों की तार्किक योग्यता परखने के ल्एि किया गया है। इसमें एनालॉजी, लॉजिकल सीक्वेंस, सिलोगिज्म जैसी चीजों पर ज्यादा फोकस रहता है। 50 अंकों वाला लीगल एप्टीट्यूड इस प्रश्नपत्र का सबसे खास भाग है। इसके जरिये सही मायने में एक वकील के मूलभूत गुणों की परख की जाती है।

तैयारी के लिए बनाएं रणनीति
क्लैट में सफलता के लिए परीक्षा की प्रकृति के मुताबिक तैयारी का खाका खींचना होगा। इसमें सफलता का एक ही मंत्र है- कड़ी तैयारी। यहां कुछ ऐसे ही फामरूले दिये जा रहे हैं, जो क्लैट की पहेली का हल बन सकते हैं।
प्वॉइंट 1 : सबसे पहले अपनी परीक्षा को जानें। इसके लिए क्लैट के प्रारूप को पूरी तरह समझना होगा। उसके आधार पर खुद की क्षमता का आकलन करें। इसके लिए पुराने प्रश्नपत्रों को हल करें, यानी एनएलएलएसआइयू, क्लैट, एनएएलएसएआर, एनएलयू-जे, एनएलयू-डी जैसी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र।
प्वॉइंट 2 : इसके बाद खुद को जानें। परीक्षा कोई भी हो, अपनी क्षमताओं की परख सबसे जरूरी है। परीक्षा से पहले खुद की अभिरुचियों, स्ट्रांग प्वांइट को जानना आवश्यक है। वकालत एक ऐसा पेशा है, जिसमें तर्कशील मस्तिष्क, पारखी दृष्टि, अध्ययनशील मनोवृत्ति व लाजवाब कम्युनिकेशन की सख्त दरकार होती है।
प्वॉइंट 3 : ऊपर के दोनों प्वॉइंट अगर क्लियर हो गये, तो अब क्लैट की तैयारी में कोई परेशानी नहीं होगी।

हर विषय की करें तैयारी
वस्तुनिष्ठ परीक्षा की तैयारी के लिए स्पीड और एक्यूरेसी दो की वर्डस हैं। आप प्रैक्टिस के साथ रीडिंग स्पीड बढ़ायेंगे, तो कम समय में बेहतर तैयारी कर सकेंगे।
जीके है खास : करेंट पर पकड़ आपको काफी सहायता पहुंचा सकती है। यह देखें कि जीके के किस सेक्शन में आप कमजोर पड़ रहे हैं। यह ऐसा सब्जेक्ट है, जिसमें कम समय में बेहतर तैयारी से अच्छे अंक आ सकते हैं।
अंगरेजी में बढ़ाएं रीडिंग स्पीड : अंगरेजी की औसत समझवाले विद्यार्थी 25 से 30 प्रश्न आसानी से हल कर सकते हैं। पर अच्छे अंक लाने के लिए आपको केवल 20 कठिन प्रश्नों की तैयारी पर फोकस करना होगा। संबंधित वोकेबलरी पर विशेष ध्यान दें।
लीगल एप्टीट्यूड को बनाएं बोनस मार्क्‍स : इसमें पढ़ाई से अधिक एनालिटिकल थिंकिंग महत्वपूर्ण है। एक अच्छा वकील सबसे पहले किसी केस को एनालाइज करता है और सॉल्यूशन ढूंढ़ता है। यहां आपसे विभिन्न कमीशंस, भारतीय संविधान, न्यायिक व्यवस्था आदि से संबंधित प्रश्न पूछे जा सकते हैं। इस सेक्शन में पकड़ बनाने के लिए किस मामले में कौन सी धारा लगी है, केस को ध्यान में रखते हुए याद करें, तो बेहतर होगा।
मैथ्स में करें अभ्यास : इस सेक्शन में जिसका बेसिक्स अच्छा है, उसे अधिक परेशानी नहीं होती है। पुराने प्रश्नपत्रों को आधार बना कर यह तय कर लें कि आप किस सेक्शन में कमजोर हैं और उससे कितने प्रश्न पूछे गये हैं। साथ ही समय सीमा का विशेष ध्यान रखें।
लॉजिकल रीजनिंग : अगर आप लॉजिकल सोचते हैं, तो इसमें प्रैक्टिस से कम समय में अच्छे मार्क्‍स ला सकते हैं। इसमें समय महत्वपूर्ण होता है। आप जितने अलग प्रकार के प्रश्नों को हल करेंगे, सोचने की क्षमता उतनी ही बढ़ेगी। अलग-अलग पैटर्न पर आधारित प्रॉब्लम को एनालिटिकल तरीके से हल करने की कोशिश करें।
इन विश्वविद्यालय में देखें अपना भविष्य

  1. बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू)
    बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) हर स्तर की शिक्षा के लिए देश ही नहीं, विदेशों में भी पहचाना जाता है। 12वीं पास करनेवाले कई विद्यार्थी बीएचयू का हिस्सा बनने का सपना देखते हैं और अगर आपने भी देश के चुनिंदा विश्वविद्यालयों में प्रवेश लेने का लक्ष्य रखा है। वो इसमें प्रवेश परीक्षा की सूचनाओं को स्वयं को अद्यतन करते रहें।
    बीएचयू के कोर्सो को दो तरह से बांटा जाता है। एक है जनरल कोर्स और दूसरा है प्रोफेशनल कोर्स। इसके अलावा, कुछ कोर्सेस बीएचयू से संबद्ध महिला महाविद्यालय, राजीव गांधी साउथ कैंपस, आर्या महिला पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज, वसंत कन्या महाविद्यालय, वसंत कॉलेज फॉर वुमेन, डीएवी पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज में चलाये जाते हैं। इनमें भी आपके लिए बेहतरीन मौका हो सकता है।

बीएचयू से संबंधित संस्थान
बीएचयू से कई संस्थान भी संबंधित हैं, जो इस प्रकार हैं –
इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चर साइंसेस।
इंस्टीट्यूट ऑफ एन्वायरन्मेंट एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट।
इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस।
फैकल्टी ऑफ साइंस, फैकल्टी ऑफ कॉमर्स, फैकल्टी ऑफ सोशल साइंसेस (नयी और पुरानी)।
फैकल्टी ऑफ परफॉर्मिग आर्ट्स।
फैकल्टी ऑफ संस्कृत विद्या ड्रामा।

परीक्षाएं हैं अहम
बीएचयू के अंडरग्रेजुएट स्तर के कोर्सो में दाखिले के लिए ‘यूइटी’ आयोजित किया जाता है। वहीं पोस्ट ग्रजुएट कोर्सो के लिए ‘पीइटी’ का आयोजन किया जाता है

उपलब्ध कोर्स
अंडरग्रेजुएट स्तर पर होनेवाले यूइटी परीक्षा के माध्यम से जनरल कोर्सो की श्रेणी बीए (ऑनर्स) आर्ट्स, बीए (ऑनर्स) सोशल साइंसेस, बीकॉम (ऑनर्स), बीकॉम (ऑनर्स) मार्केट मैनेजमेंट, बीएससी (ऑनर्स) मैथ्स ग्रुप, बीएससी (ऑनर्स) बायोलॉजी ग्रुप, संस्कृत (ऑनर्स) में प्रवेश मिलता है। वहीं प्रोफेशनल कोर्सो की श्रेणी में बैचलर ऑफ म्यूजिक, बीएफए में दाखिला मिलता है।

योग्यता
इन सभी कोर्सो में प्रवेश के लिए 12वीं पास होना अनिवार्य है। 12वीं में कितने अंक जरूरी हैं, यह हर कोर्स पर निर्भर करता है।

कैसे होगा आवेदन
विश्वविद्यालय में आवेदन करने के लिए रजिस्ट्रेशन ऑनलाइन ही करवाना होता। संस्कृत ऑनर्स के अलावा सभी कोर्सो के लिए सामान्य वर्ग और अन्य पिछड़ा वर्ग के आवेदकों को 500 रुपये परीक्षा शुल्क देना होता। वहीं अनुसूचित जाति और जनजाति के आवेदकों को 250 रुपये परीक्षा शुल्क देना होते(शुल्क में परिवर्तन हो सकता है।)। संस्कृत ऑनर्स के लिए सामान्य और अन्य पिछड़ा वर्ग के आवेदकों को 200 और अनुसूचित जाति व जनजाति के आवेदकों को 100 रुपये परीक्षा शुल्क देना होता है।

परीक्षा पैटर्न
यूइटी के माध्यम से बीकॉम के सभी कोर्सो और बीएससी (एग्रीकल्चर) के लिए कॉमन एंट्रेंस टेस्ट होगा। वहीं बीए (ऑनर्स) आर्ट्स, बीए (ऑनर्स) सोशल साइंसेस के लिए परीक्षा पैटर्न अलग होता है। परीक्षा पैटर्न के बारे में विस्तार से जानने के लिए वेबसाइट देख सकते हैं।
वेबसाइट : http://www.bhu.ac.in
आवेदन के लिए वेबसाइट :www.bhuonline.in या http://www.bhu.ac.inपर जाएँ।

  1. अलीगढ़ मुसलिम विश्वविद्यालय (एएमयू)
    अलीगढ़ मुसलिम विश्वविद्यालय (एएमयू) की गिनती देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में होती है। इस विश्वविद्यालय में हर स्तर के कोर्स उपलब्ध हैं। इसके सभी कोर्सो के लिए आवेदन सिर्फ ऑनलाइन माध्यम से होते हैं। खास बात यह है कि विश्वविद्यालय ने शैक्षणिक सत्र 2014-15 के लगभग सभी कोर्सो के लिए दाखिला प्रारंभ कर दिया है। यदि आप एडमिशन चाहते हैं, तो अभी से तैयारी शुरू कर दें।
    विस्तार से जानने के लिए देखें : http://www.amu.ac.in
    साभार: प्रभात खबर

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घर बैठकर भी बना सकते हैं ये कैरियर

पढ़ाई के बाद वैसे तो नौकरी करना अधिकांश विद्यार्थियों का लक्ष्य होता है, पर कई बार विभिन्न कारणों से नौकरी करना संभव नहीं होता। इसके अलावा कई बार खुद भी नौकरी की बजाय अपना काम करने की इच्छा होती है। ऐसी सभी परिस्थितियों में फ्रीलांसिंग युवाओं के पास कैरियर को दिशा देने का एक बेहतर ऑप्शन है।

टीचिंग
बच्चों को पढ़ाना एक ऐसा काम है, जिसे आप घर बैठे ही कर सकते हैं। जैसी शैक्षणिक योग्यता आपकी हो, उसी के अनुरूप आप विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान कर सकते हैं। आज के प्रतियोगी माहौल में टीचिंग में फ्रीलांसिंग करके अच्छी कमाई की जा सकती है। साइंस, कॉमर्स, मैथ्स, अंग्रेजी आदि के शिक्षकों की काफी मांग होती है। फ्रीलांसिंग करते-करते आप खुद का कोचिंग इंस्टीट्यूट भी खोल सकते हैं।

फोटोग्राफी
फ्रीलांसिंग के दृष्टिकोण से फोटोग्राफी में कई तरह के अवसर उपलब्ध हैं। आप पत्र-पत्रिकाओं की जरूरत के अनुसार फोटोग्राफ मुहैया करा सकते हैं। इसके अलावा विभिन्न आयोजनों, जैसे विवाह, सालाना उत्सव, फैशन शो, प्रोडक्ट लॉन्च आदि के लिए भी आप फोटोग्राफी कर सकते हैं। आजकल पोर्टफोलियो बनाने से भी अच्छी आमदनी होने लगी है। स्टिल फोटोग्राफी के अलावा वीडियो फोटोग्राफी से भी आपकी फ्रीलांसिंग को काफी मदद मिल सकती है।

राइटिंग
यदि आप लिखने की इच्छा रखते हैं और इसकी स्वाभाविक प्रवृत्ति आपमें हैं, तो आप घर बैठे ही विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं और वेबसाइट्स के लिए लेखन संबंधी कार्य कर सकते हैं। थोड़ा अनुभव हो जाने पर आप किताबें या उपन्यास भी लिख सकते हैं। इतना ही नहीं, आपको टीवी, एडवरटाइजमेंट एजेंसी और यहां तक कि फिल्मों के लिए स्क्रिप्ट लिखने का काम मिल सकता है।

इलस्ट्रेशन
विभिन्न कॉमिक्स और बच्चों की किताबों के प्रकाशकों को इलस्ट्रेटरों की जरूरत पड़ती रहती है, जो विभिन्न कहानियों, कविताओं अथवा चुटकुलों के लिए पेंटिंग्स और इलस्ट्रेशंस बनाते हैं। प्रतिभाशाली अभ्यर्थियों को इस फील्ड में मौके मिलते ही रहते हैं।

काउंसलिंग
वर्तमान प्रतियोगी माहौल के मद्देनजर काउंसलरों की काफी डिमांड है। यह डिमांड न सिर्फ कैरियर काउंसलिंग के क्षेत्र में है, बल्कि मार्केटिंग, मेडिसिन, इंजीनियरिंग, प्रोडक्शन, एचआर आदि विभिन्न क्षेत्रों में है। अपनी-अपनी जरूरत के अनुसार व्यक्ति या कंपनियां संबंधित सलाहकारों से संपर्क स्थापित करती हैं। इसके बदले फ्रीलांस काउंसलर को अच्छी खासी फीस मिल जाती है। काउसंलिंग से न सिर्फ बेहतर कमाई होती है, बल्कि आपकी पर्सनैलिटी में भी निखार आता है। आपका अनुभव जिस फील्ड में हो, उसमें आप काउंसलिंग शुरू कर सकते हैं।

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रामसेतु तोड़ने का कारण

दोस्तो 1998 मे जब भारत ने परमाणु बोम्ब ब्लास्ट किया था तो अमेरिका को हमसे बहुत आग लगी !

और अमेरिका ने भारत को परमाणु बंब बनाने के लिए यूरेनियम देना बंद कर दिया था,

इसके इलवा अमेरिका ने भारत की कंपनियों को अमेरिका मे घुसने पर रोक लगाई !

फिर अचानक अमेरिका के दिल में इतनी दया कैसे आई ???
कि वो भारत को यूरेनियम देने के लिए तैयार हो गया !

इसकी शुरुआत तब होती है, जब पूर्व अमरीकी राष्ट्रपति जोर्ज बुश भारत आये थे और एक सिविल न्यूक्लीयर डील पर हस्ताक्षर किये गए जिसके अनुसार अमरीका भारत को युरेनियम-235 देने की बात कही l उस समय पूरी मीडिया ने मनमोहन सिंह की तारीफों के पुल बांधे और इस डील को भारत के लिए बड़ी उपलब्धि बताया, पर पीछे की कहानी छुपा ली गयी l

असल बात कुछ और है और वो बात बहुत गहरी है | भारत के वैज्ञानिक पिछले कई वर्षो से ये खोजने में लगे हुए है के यूरेनियम के अतिरिक्त और कोन सा हमारे पास रेडियो एक्टिव इंधन है जिससे हम बोम्ब बना सके या बिजली भी बना सके |

Atomic Energy Commission के 6000 वैज्ञानिक पिछले 40 सालो से इसी काम में लगे हुए है | उनको पता चला के भारत के तमिलनाडु , केरल का जो समुद्री एरिया है उहाँ पर बहुत बड़ी मात्रा में ऐसा रेडियो एक्टिव इंधन है जिससे अगले 150 साल तक बिजली बनायीं जा सकती है और दुसरे देशो से भीख मांगने की भी जरुरत नही होगी |

डॉ कालाम का कहना था के 3 लाख Mega-watt बिजली हर घंटे अगले 240 साल तक बना सकते है | और ये बात अब्दुल कलाम जी ने रीटायर होने के बाद अपने पहले interview मे कही थी !

अब अमेरिका की नज़र हमारे उस इंधन पे है और वो चाहता है भारत उस इंधन को अमेरिका को दे और बदले में अमेरिका थोडा बहुत यूरेनियम हमको दे |

इस खेल को पूरा करने के लिए अमेरिका श्री राम सेतु को तोड़ना चाहता है ! और इस काम को पूरा करने के लिए अमेरिकी एजेंट मनमोहन सिंह जो पिछले 20 साल से भारत सरकार मे बैठा है !!

सुप्रीम कोर्ट मे भी case चल रहा है ! अभी date पर date पर रही है ! वहाँ केंद्र सरकार कॉंग्रेस और मनमोहन सिंह तर्क देते है !! कि ये सेतु श्री राम नहीं बनाया ! श्री राम तो एक कल्पना है ! श्री राम तो कभी हुए ही नहीं !!

जबकि कुछ साल अमरीकी अन्तरिक्ष एजेंसी NASA ने ही रामसेतु की पुष्टि अपनी रिपोर्ट में की है l ! आज भी आपको वहाँ ऐसे पत्थर मिल जाएँगे ! जिस पर राम लिखा है और वो पानी मे तैरते है !!

सिखो के धार्मिक ग्रंथ (श्री गुरु ग्रंथ साहिब )मे 55000 से ज्यादा बार श्री राम का नाम आता है ! और ये अमरेकी agent मनमोहन सिंह ऐसे गंदी हरकत कर अपने धर्म पर भी कलंक है !!

दोस्तो क्या आप जानते है श्री राजीव दीक्षित जी ने 1997 मे ही इस मनमोहन singh को अमरीका का agent घोषित कर दिया था ! और ऐसा कहा था ! 101% ये मनमोहन सिंह america का agent है जो भारत सरकार मे बैठा है !!

आप यहाँ click कर सिर्फ पहले 40 min ध्यान से सुने और समझे राजीव दीक्षित जी का 1997 का lecture !!!

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66 के युद्ध में चीन से हार का कारण थे नेहरू व मेनन

..1966.. के पाकिस्तान के भारत पर होने वाले हमले से पूर्व चीन ने भारत पर हमला किया था 1962 ने !
और ये बहुत दुर्भाग्यपूर्ण हमला था ! इसको इसलिए दुर्भाग्यपूर्ण माना जाता है कि उस समय vk krishna menon जैसा नेता भारत का रक्षा मंत्री था !!

दुर्भाग्यपूर्ण वाली बात ये है कि VK krishan menon थे तो भारत के रक्षा मंत्री लेकिन हमेशा विदेश घूमते रहते थे ! उनको हिदुस्तान रहना अच्छा ही नहीं लगता था आमेरिका अच्छा लगता था !फ्रांस अच्छा लगता था !ब्रिटेन अच्छा लगता था ! नुयोर्क उनको हमेशा अच्छा लगता था ! उनकी तो मजबूरी थी कि भारत मे पैदा हो गए थे ! लेकिन हमेशा उनको विदेश रहना और वहाँ घूमना ही अच्छा लगता था ! और जो काम उनको रक्षा मंत्री का सौंपा गया था उसको छोड़ वो बाकी सब काम करते थे ! विदेश मे घूमते रहना !कभी किसी देश कभी किसी देश मे जाकर कूट नीति ब्यान दे देना ! !

और ये किस तरह के अजीब किसम के आदमी थे !आप इस बात से अंदाजा लगा सकते है ! 1960 -61 मे एक बार संसद मे बहस हो रही थी तो वीके कृशन ने खड़े होकर अपनी तरफ से एक प्रस्ताव रखा !

प्रस्ताव क्या रखा ??

उन्होने कहा देखो जी पाकिस्तान ने तो 1948 मे हमसे समझोता कर लिया कि वह आगे से कभी हम पर हमला नहीं करेगा ! और दुनिया के आजू-बाजू मे और कोई हमारा दुश्मन है नहीं ! तो हमे बार्डर पर सेना रखने कि क्या जरूरत है सेना हटा देनी चाहिए ! ऐसे उल्टी बुद्धि के आदमी थे vk krishan menon ! और ये बात वो कहीं साधारण सी बैठक मे नहीं लोकसभा मे खड़े होकर बोल रहे थे ! कि ये सेना हमको हटा देनी चाहिए ! इसकी जरूरत नहीं है !!

तो कुछ सांसदो मे सवाल किया कि अगर भविष्य मे किसी देश ने हमला कर दिया तो कया करेंगे ???? अभी तो आप बोल रहे है कि सेना हटा लो ! पर अमरजनसी जरूरत पड़ गई तो कया करेंगे ???
तो उन्होने ने कहा इसके लिए पुलिस काफी है ! उसी से काम चला लेगे ! ऐसा जवाब vk krishann manon ने दिया !!

ऐसी ही एक बार कैबनेट कि मीटिंग थी प्रधान मंत्री और बाकी कुछ मंत्री माजूद थे ! vk kirshan ने एक प्रस्ताव फिर लाया और कहा ! देखो जी हमने सीमा से सेना तो हटा ली है ! अगर सेना नहीं रखनी तो पैसे खर्च करने कि क्या जरूरत है ! तो बजट मे से सेना का खर्च भी कम कर दिया !

और तो और एक और मूर्खता वाला काम किया ! उन्होने कहा अगर सेना ही नहीं है तो ये बंब,बंदुके
बनाने की क्या जरूरत है ! तो गोला बारूद बनाने वाले कारखानो मे उत्पादन पर रोक लगा दी और वहाँ काफी बनाने के प्याले चाय बनाने के प्याले आदि का काम शुरू करवा दिया !!

और उनको जो इस तरह के बयान आते थे तो चीन को लगा कि ये तो बहुत मूर्ख आदमी है ! कहता है सेना को हटा लो ! सेना का खर्चा कम कर दो ! गोला बारूद बनाना बंद कर दो ! और खुद दुनिया भर मे घूमता रहता है ! कभी सेना के लोगो के पास न जाना ! सेना के साथ को meeting न करना ! इस तरह के काम करते रहते थे !

तो चीन को मौका मिल गया ! और चीन एक मौका ये भी मिल गया !चीन को लगा की vk kirashan तो प्रधानमंत्री (नेहरू ) के आदमी है !! तो शायद नेहरू की भी यही मान्यता होगी ! क्यूंकि vk krishan नेहरू का खास दोस्त था तो नेहरू ने उसको रक्षा मंत्री बना दिया था ! वरना vk krishan कोई बड़ा नेता नहीं था देशा का ! जनता मे कोई उनका प्रभाव नहीं था ! बस नेहरू की दोस्ती ने उनको रक्षा मंत्री बना दिया !!

और वो हमेशा जो भाषण देते थे !लंबा भाषण देते थे 3 घंटे 4 घंटे ! लेकिन आप उनके भाषण का सिर पैर नहीं निकाल सकते थे कि उन्होने बोला क्या ! ऐसे मूर्ख व्यक्ति थे vk krishan menon !

तो ये सब मूर्खता देख कर चीन ने भारत पर हमला किया और भारत का एक इलाका था aksai chin !
वहाँ चीन ने पूरी ताकत से हमला किया ! और हालात क्या थे आप जानते है ! सेना को वापिस बुला लिया था पहले ही !! सेना का बजट कम था ! गोला बारूद के कारखाने बंद थे !! तो चीनी सैनिको ने बहुत मनमानी कि उस askai chin के क्षेत्र मे !!

और जो सबसे बुरा काम किया ! चीनी सैनिको ने सैंकड़ों महिलाओ के साथ जमकर बलत्कार किए !! वहाँ हजारो युवको कि ह्त्या करी ! askai chin का जो इलाका है वहाँ सुविधाए कुछ ऐसे है कि लोग वैसे ही अपना जीवन मुश्किल से जी पाते है ! रोज का जीवन चलाना ही उनको लिए किसी युद्ध से कम नहीं होता ऊपर से चीन का हमला !!

तो वहाँ के लोगो ने उस समय बहुत बहुत दुख झेला ! और वहाँ हमारी सेना नहीं थी ! तो वहाँ लोगो के मन हमारी सरकार के विरुद्ध एक विद्रोह की भावना उतपन हुई ! और वो आज भी झलकती है ! आज भी आप वहाँ जाये तो वहाँ लोग ये सवाल करते है कि जब चीन ने हमला किया था तो आपकी सेना कहाँ थी ! और सच है हम लोगो के पास इसका कोई जवाब नहीं ! तो उनमे एक अलगाव कि भावना उतपन हुई जो अलग क्षेत्र की मांग करने लगे !!!

तो हमले मे चीन ने हमारी 72 हजार वर्ग मील जमीन पर कब्जा कर लिया ! और हमारा तीर्थ स्थान कैलाश मानसरोवर भी चीन के कब्जे मे चला गया ! और बहुत शर्म कि बात है आज हमे अपने तीर्थ स्थान पर जाने के लिए चीन से आज्ञा लेनी पड़ती है ! और इसके जिम्मेदार सिर्फ और सिर्फ नेहरू और vk krishan menon जैसे घटिया और मूर्ख किसम के नेता थे !!!



तो युद्ध के बाद एक बार संसद मे भारत-चीन युद्ध पर चर्चा हुई ! सभी सांसदो के मुह से जो एक स्वर सुनाई दे रहा था ! वो यही था !कि किसी भी तरह चीन के पास गई 72 हजार वर्ग मील जमीन और हमारा तीर्थ स्थान कैलाश मानसरोवर वापिस आना चाहिए !

महावीर त्यागी जी जो उस समय के बहुत महान नेता थे !उन्होने ने सीधा नेहरू को कहा कि आप ही थे जिनहोने सेना हटाई ! सेना का बजट कम किया ! गोला बारूद बनाने के कारखाने बंद करवाये! आप ही के लोग विदेशो मे घूमा करते थे ! और आपकी इन गलितयो ने चीन को मौका मिला और उसमे हमला किया और हमारी 72 हजार वर्ग मील जमीन पर कब्जा कर लिया !!

अब आप ही बताए कि आप ये 72 हजार वर्ग मील जमीन को कब वापिस ला रहे है ?????!

तो इस हरामखोर नेहरू का जवाब सुनिए ! नेहरू ने कहा फिर क्या हुआ अगर वो जमीन चली गई ! चली गई तो चली गई ! वैसे भी बंजर जमीन थी घास का टुकड़ा नहीं उगता था ! ऐसी जमीन के लिए क्या चिंता करना !!

तो त्यागी जी ने बहुत ही बढ़िया जवाब दिया ! त्यागी जी ने कहा नेहरू जी उगता तो आपके सिर पर भी कुछ नहीं ! तो इसको भी काट कर चीन को देदो ! और इत्फ़ाक से नेहरू उस समय पूरी तरह गंजा हो चुका था !!

तो दोस्तो इस नेहरू ने धरती माँ को एक जमीन का टुकड़ा मान लिया ! और अपनी गलती मानने के बजाय ! उल्टा ब्यान दे रहा है जमीन चली गई तो चली गई !

इससे ज्यादा घटिया बात कुछ और नहीं हो सकती ! !

और लानत है भारत की जनता पर आज चीन युद्ध के 50 साल बाद भी नेहरू परिवार के वंशज देश चला रहे हैं !! हमे दिन रात लूट रहे हैं !हमे मूर्ख बना रेह हैं !


आपने पूरी post पढ़ी बहुत बहुत धन्यवाद !
अमर शहीद राजीव दीक्षित जी की जय !!

1962 का युद्ध सारी घटना यहाँ देखे !!

Via_ http://bit.ly/ThaluaClub

क्या आप शाकाहारी है ? तो ये सच आपको चौंका सकता है

भारत मे कुल 3600 बड़े कत्लखाने है जिनके पास पशुओ को काटने का लाईसेंस है !! जो सरकार ने दे रखा है ! इसके इलावा 35000 से अधिक छोटे मोटे कत्लखाने है जो गैर कानूनी ढंग से चल रहे है ! कोई कुछ पूछने वाला नहीं ! हर साल 4 करोड़ पशुओ का कत्ल किया जाता है ! जिसने गाय ,भैंस ,सूअर,बकरा ,बकरी ,ऊंट,आदि शामिल है ! मुर्गीया कितनी काटी जाती है इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है !

गाय का कतल होने के बाद मांस उत्पन्न होता है और मांसाहारी लोग उसे भरपूर खाते है | भारत के 20% लोग मांसाहारी है जो रोज मांस खाते है और सब तरह का मांस खाते है | मांस के इलावा दूसरी जो चीज प्राप्त की जाती है वो है तेल ! उसे tellow कहते है जैसे गाय के मांस से जो तेल निकलता है उसे beef tellow और सूअर की मांस से जो तेल निकलता है उसे pork tellow कहते है |

इस तेल का सबसे ज़्यादातर उपयोग चेहरे में लगाने वाली क्रीम बनाने में होता है जैसे Fair & Lovely , Ponds , Emami इत्यादि | ये तेल क्रीम बनाने वाली कंपनियो द्वारा खरीदा जाता है ! और जैसा कि आप जानते है मद्रास high court मे श्री राजीव दीक्षित जी ने विदेशी कंपनी fair and lovely के खिलाफ case जीता था जिसमे कंपनी ने खुद माना था कि हम इस fair and lovely मे सूअर की चर्बी का तेल मिलाते हैं !
आप यहाँ click कर देख सकते है !

तो क्त्ल्खानों मे मांस और तेल के बाद जानवरो का खून निकाला जाता है ! कसाई गाय और दूसरे पशुओ को पहले उल्टा रस्सी से टांग देते हैं फिर तेज धार वाले चाकू से उनकी गर्दन पर वार किया जाता है और एक दम से खून बहने लगता है नीचे उन्होने एक ड्रम रखा होता है जिसने खून इकठा
किया जाता है यहाँ click कर देख सकते हैं !

तो खून का सबसे ज्यादा प्रयोग किया जाता है अँग्रेजी दवा (एलोपेथि दवा) बनाने मे ! गाय के शरीर से निकला हुआ खून ,मछ्ली के शरीर से निकला हुआ खून बैल ,बछड़ा बछड़ी के शरीर से निकला हुआ खून से जो एक दवा बनाई जाती है उसका नाम है dexorange ! बहुत ही popular दवा है और डाक्टर इसको खून की कमी के लिए महिलाओ को लिखते है खासकर जब वो गर्भावस्था मे होती है क्यूंकि तब महिलाओ मे खून की कमी आ जाती है और डाक्टर उनको जानवरो के खून से बनी दवा लिखते है क्यूंकि उनको दवा कंपनियो से बहुत भारी कमीशन मिलता है !

इसके इलावा रक्त का प्रयोग बहुत बड़े पैमाने पर lipstick बनाने मे होता है ! इसके बाद रक्त एक और प्रयोग चाय बनाने मे बहुत सी कंपनिया करती है ! अब चाय तो पोधे से प्राप्त होती है ! और चाय के पोधे का size उतना ही होता है जितना गेहूं के पोधे का होता है ! उसमे पत्तिया होती है उनको तोड़ा जाता है और फिर उसे सुखाते हैं ! तो पत्तियों को सूखाकर पैकेट मे बंद कर बेचा जाता हैं !

और पतितयो को नीचे का जो टूट कर गिरता है जिसे डेंटरल कहते हैं आखिरी हिस्सा !लेकिन ये चाय नहीं है ! चाय तो वो ऊपर की पत्ती है ! तो फिर क्या करते है इसको चाय जैसा बनाया जाता है ! अगर हम उस नीचले हिस्से को सूखा कर पानी मे डाले तो चाय जैसा रंग नहीं आता ! तो ये विदेशी कपनिया brookbond,ipton,आदि क्या करती है जानवरो के शरीर से निकला हुआ खून को इसमे मिलकर सूखा कर डिब्बे मे बंद कर बेचती है ! तकनीकी भाषा मे इसे tea dust कहते है !तो tea dust को जी चाय बनाकर बेचने के लिए काफी कंपनिया जानवरो के खून का प्रयोग करती हैं !इसके इलवा कुछ कंपनिया nail polish बनाने ने प्रयोग करती है !!

मांस,तेल ,खून ,के बाद क्त्ल्खानों मे पशुओ कि हड्डीया निकलती है ! और इसका प्रयोग toothpaste बनाने वाली कंपनिया करती है colgate,close up,pepsodent cibaca,आदि आदि ! सबसे पहले जानवरो कि हड्डियों को इकठा किया जाता है ! उसे सुखाया जाता है फिर एक मशीन आती है bone crasher ! इसमे इसको डालकर इसका पाउडर बनाया जाता है और कंपनियो को बेचा जाता है !shiving cream बनाने वाली काफी कंपनिया भी इसका प्रयोग करती हैं !

और आजकल इन हड्डियों का प्रयोग जो होने लगा है टेल्कम powder बनाने मे ! नहाने के बाद लोग लागाते हैं उसमे इसका प्रयोग होता है ! क्यूंकि ये थोड़ा सस्ता पड़ता है ! वैसे टेल्कम powder पथर से बनता है! और 60 से 70 रुपए किलो मिलता है और गाय की हड्डियों का powder 25 से 30 रुपए मिल जाता है !! इस लिए कंपनिया हड्डियों का प्रयोग करती हैं !

इसके बाद गाय ऊपर की जो चमड़ी है उसका सबसे ज्यादा प्रयोग किया जाता है cricket के ball बनाने मे ! लाल रंग की ball होती है आज कल सफ़ेद रंग मे भी आती है ! जो गाय की चमड़ी से बनाई जाती है !गाय के बछड़े की चमड़ी का प्रयोग ज्यादा होता है ball बनाने मे ! दूसरी एक ball होती है foot ball ! cricket ball तो छोटी होती है ! पर foot ball बड़ी होती है इसमे और ज्यादा प्रयोग होता है गाय के चमड़े का !!

आजकल और एक उद्योग मे इस चमड़े का बहुत प्रयोग हो रहा है !जूते चप्पल बनाने मे ! अगर आप बाजार से कोई ऐसा जूता चप्पल खरीदते है ! जो चमड़े का है और बहुत ही soft है तो वो 100 % गाय के बछड़े के चमड़े का बना है ! और अगर hard है तो ऊंट और घोड़े के चमड़े का ! इसके इलवा चमड़े के प्रयोग पर्स ,बेल्ट जो बांधते है ! इसके इलवा आजकल सजावट के समान ने इन का प्रयोग किया जाता है !!


तो गाय और गाय जैसे जानवरो आदि का कत्ल होता है ! तो 5 वस्तुए निकलती है !!

1) मांस निकला ——जो मांसाहारी लोग खाते है !

2)चर्बी का तेल —-जो cosmatic बनाने मे प्रयोग हुआ !

3) खून निकाला —— जो अँग्रेजी एलोपेथी दवाइया ,चाय बनाने मे ! nailpolish lipstick मे !

4)हडडिया निकली —— इसका प्रयोग toothpaste, tooth powder,shiving cream मे !aur टेलकम powder

5) चमड़ा निकला !—— इसका प्रयोग cricket ball,foot ball जूते, चप्पल, बैग ,belt आदि !

जैसा ऊपर बताया 35000 क्तलखाने है और 4 करोड़ गाय ,भैंस ,बछड़ा ,बकरी ,ऊंट आदि काटे जाते है !
तो इनसे जितना मांस उतपन होता है वो बिकता है ! चर्बी का तेल बिकता है !खून बिकता है हडडिया और चमड़ा बिकता है !!
तो निकलने वाली इन पाँच वस्तुओ का भरपूर प्रयोग है और एक बहुत बड़ा बाजार है इस देश मे!!


इसके इलवा गाय के शरीर के अंदर के कुछ भाग है ! उनका भी बहुत प्रयोग होता है !जैसे गाय मे बड़ी आंत होती है !! जैसे हमारे शरीर मे होती है ! ऐसे गाय के शरीर मे होती है ! तो जब गाय के काटा जाता है ! तो बड़ी आंत अलग से निकली जाती है ! और इसको पीस कर gelatin बनाई जाती है !जिसका बहुत जादा प्रयोग आइसक्रीम, चोकोलेट,आदि
इसके इलवा Maggi . Pizza , Burger , Hotdog , Chawmin के base matirial बनाने मे भरपूर होता है | और एक jelly आती red orange color की उसमे gelatin का बहुत प्रयोग होता है ! chewgum तो gelatin की बिना बन ही नहीं सकती !!gelatin बनाने के google पर आप काफी link देख सकते है !!maggi ,i चाकलेट वाली कंपनिया सबसे ज्यादा धोखा दे रही हैं !
आजकल जिलेटिन का उपियोग साबूदाना में होने लगा है | जो हम उपवास मे खाते है !


तो ये सब वस्तुओ जो जानवरो के कत्ल के बाद बनाई जाती है ! और हम जाने अनजाने मे इन का प्रयोग अपने जीवन मे कर रहे है ! और कुछ लोग अपने आप को 100 टका हिन्दू कहते है ! शाकाहारी कहते है !और कहीं न कहीं इस मांस का प्रयोग कर रहे है ! और अपना धर्म भ्रष्ट कर रहे है !

तो आप इन सबसे बचे ! और अपना धर्म भ्रष्ट होने से बचाये !एक बात हमेशा yaad रखे टीवी पर देखाये जाने वाले विज्ञापन (ads) को देख अपने घर मे कोई वस्तु न लाये ! इनमे ही सबसे बड़ा धोखा है !
जैसे चाकलेट का विगयापन आता है केडबरी nestle आदि !! coke pepsi का आता है ! fair and lovely आदि क्रीमे ! colgate closeup pepsodent आदि आदि toothpaste !!

तो आप अपने दिमाग से काम ले इन सब चीजों से बचे !! क्यूंकि विज्ञापन उनी वस्तुओ का दिखाया जाता है जिनमे कोई क्वाल्टी नहीं होती !! देशी गाय का घी बिना विज्ञापन के बिकता है नीम का दातुन बिना विज्ञापन के बिकता है गन्ने का रस बिना विज्ञापन के बिकता है !!

विज्ञापन का सिद्धांत है गंजे आदमी को भी कघा बेच दो !! एक ही बात को बार-बार,बार-बार दिखाकर आपका brain wash करना !! ताकि आप सुन सुन कर एक दिन उसे अपने घर मे उठा लाये !!

आपने पूरी post पढ़ी आपका बहुत बहुत धन्यवाद !!


और हमे अब इस देश मे ऐसी सरकार लानी है जो पहला काम यही करे कि अंग्रेज़ो के समय से चल रहे ये सारे क्त्लखानों को बंद करने का बिल संसद मे लाये और इसे पास करे !!

आपके मन मे जानवरो के प्रति थोड़ा भी दया का भाव तो इस link पर click कर देखे !!

Via_ http://bit.ly/ThaluaClub

Fair and lovely के खिलाफ़ मद्रास हाईकोर्ट में केस

राजीव दीक्षित जी का दोस्त जो होस्टल में उनके साथ पड़्ता था । 12 साल से fair and lovely लगा रहा था । फ़िर भी चिक्कट काला । और बोला होस्टल में आने से पहले भी 8 साल से लगा रहा है ।

राजीव भाई ने कहा कभी तो तु सुधरेगा । तो उसने कहा कल से fair and lovely बंद ।

राजीव भाई ने पूछा तेरे पास fair and lovely ख़रीदने का बिल है । उनसे
कुछ बिल निकाल कर दिये । जिसके आधार पर उन्होने मद्रास हाईकोर्ट में केस दर्ज कर दिया । पहले तो जज ने कहा मेरे घर में भी यही समस्या है ! लेकिन उसने बहुत सुंदर जजमेंट दिया !
कंपनी के अधिकारियो को वहां जाना पड़ा । जज ने पूछा । कि आपने इसमे क्या मिलाया है ।
जो काले को गोरा बना देती है । उन्होने बोला जी कुछ नहीं मिलाया । तो जज ने पुछा ये बनती कैसे है । तो उन्होने कहा( सूअर की चर्बी के तेल से )।

देश के पढ़े लिखे गवार विज्ञापन देख आपने मुँह पर सुअर की चर्बी का तेल थोप रहे है । और अपने आप को बहुत होशियार समझ रहे है !!
और यह कितनी महंगी है !!

25 ग्राम 40 रुपए की
मतलब 50 ग्राम 80 रूपये की
और 100 ग्राम 160 रूपये की !
मतलब 1600 रूपये की 1 किलो !!

देश के पढे लिखे ग्वार लोग 1600 रूपये किलो का सूअर की चर्बी का तेल मुह पर थोप रहे हैं लेकिन 400 -500 रूपये किलो बादाम या काजू नहीं खा रहे !!!!

मित्रो सुंदरता fair and lovely मे नहीं है सुंदरता करीम पाउडर या लिपस्टिक में नहीं है !!
सुंदरता गुण कर्म और सुभाव में होती है !!

आपके गुण अच्छे है कर्म अच्छे है सुभाव अच्छा है तो आप बहुत सुंदर है !!

वन्देमातरम !!

यहाँ जरूर click कर देखें !! court मे case की कहानी !

Via_ http://bit.ly/ThaluaClub

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