केजरीवाल मेरी पुस्‍तक ‘केजरीवाल: सच्‍चाई या साजिश’ में मौजूद सच्‍चाई को काट दें और मेरे 20 सवालों के जवाब दे दें मैं अपने परिवार के 5 वोट पक्‍के तौर पर उनके ही उम्‍मीदवार को दूंगा… संदीप देव

मैंने दिल्‍लीवासी होने के नाते अरविंद केजरीवाल से पूछे हैं 20 सवाल, जिससे वो भागते रहे हैं। इन सवालों की सच्‍चाई सबूत सहित मैंने अपनी पुस्‍तक ” केजरीवाल: सच्‍चाई या साजिश” में प्रस्‍तुत की है। आज इस पुस्‍तक के आधार पर जी न्‍यूज, इंडिया टीवी आदि ने भी केजरीवाल से यह सवाल पूछा है, लेकिन वो और उनकी टीम भागती नजर आ रही है। किसी पर झूठे आरोप लगाने वाले केजरीवाल का तर्क ही मैं उन्‍हें दे रहा हूं कि यदि मेरे ये सवाल और उसके पक्ष में पेश किए गए सबूत झूठे हैं तो केजरीवाल मुझ पर मुकदमा करें या फिर दिल्‍ली की जनता को गुमराह करना बंद करें.

1.अन्ना के पहले चरण के आंदोलन 5 अप्रैल 2011 से एक दिन पहले 4 अप्रैल 2011 को सोनिया गांधी की किचन कैबिनेट ‘एनसी’ की बैठक में केजरीवाल हिस्सा लेने किस लिए गए थे ?

2.एनएसी की वेबसाइट इस बात का खुलासा करती है कि अन्ना आंदोलन से पूर्व और उसके बाद आयोजित तीन बैठकों में अरविंद केजरीवाल ने इसमें हिस्सा लिया, जबकि इस बारे में आज तक जनता से सबकुछ छुपाया गया?

  1. क्या यह सही नहीं है कि 16 अगस्त 2011 को अन्ना की गिरफ्तारी से अरविंद केजरीवाल बेहद खुश थे? उनके ही साथी आशुतोष ने ‘अन्ना क्रांति‘ पुस्तक के पेज-98 पर इसका खुलासा किया है कि अन्ना की गिरफ़तारी से अरविंद की इच्छा पूरी हो रही थी।
  2. अनशन के नौवें दिन डा त्रेहन ने अन्ना की बिगड़ती सेहत के बाद उन्हें ड्रिप लगा दिया और अन्ना ने इसे लगवा भी लिया था, लेकिन कुछ ही देर में मीडिया में खबर लीक कर दी गई, जिससे आहत अन्ना ने ड्रिप हटवा दिया। आशुतोष की ‘अन्ना क्रांति‘ पुस्तक के पेज संख्या-156 पर अन्ना के ड्रिप लगवाने और मीडिया में खबर फैलाते ही उसे हटाने की चर्चा है! पेज संख्या- 92 पर आशुतोष ने स्पष्ट लिखा है कि ‘‘ अरविंद नजरें बचाकर मैसेज (न्यूज चैनल) भेज रहे थे ! पेज नंबर-88 पर आशुतोष ने लिखा है कि अरविंद-मनीष ने अन्ना के राजघाट पर जाने की सूचना बहुत चतुराई से मीडिया को लीक की थी! तो क्या अन्ना को ग्लूकोज चढ़ाने की सूचना भी मीडिया में उसी चतुराई से केजरीवाल -सिसोदिया ने मीडिया में लीक की थी? ताकि उनका लगा हुआ ड्रिप हटवाया जा सके, जिससे उनकी मौत हो जाए, ताकि देश में क्रांति भड़क सके जिसका आगे चलकर वह राजनीति फायदा उठा सके जैसा कि अन्ना के आंदोलन को राजनीतिक पार्टी में तब्दील कर उन्होंने उठाया?
  3. क्या यह सही नहीं है कि 29 अक्टूबर 2011 को गाजियाबाद के कौशांबी में अरविंद ने एक सामूहिक बैठक कर अन्ना को ब्लैकमेल करने के लिए कुमार विश्वास के मार्फत कोर कमेटी भंग करने का प्रस्ताव मीडिया में भिजवाया, लेकिन जब अन्ना की ओर से कोर कमेटी भंग करने का इशारा मिला तो इसे कुमार विश्वास की निजी राय बता दी गई, जबकि उस बैठक में अन्ना के टीम के लगभग सभी सदस्य थे? क्या यह यह दोहरा चरित्र नहीं है?
  4. क्या सही नहीं है कि 9 जनवरी 2012 को गाजियाबाद में चली 8 घंटे की बैठक में ‘आम आदमी पार्टी‘ के निर्माण की योजना बनी थी, लेकिन जनता को धोखा देने के लिए इसे जुलाई-अगस्त 2012 के अरविंद के अनशन का परिणाम प्रदर्शित किया गया जबकि पार्टी बनाने की योजना अरविंद के अनशन से छह महीने पहले ही बन गई थी?

7.क्या यह सही नहीं है कि बिना एफसीआरए पंजीकरण के केजरीवाल- सिसोदिया ने विदेशी फंड हासिल किया? केजरीवाल-सिसोदिया के एनजीओ ‘कबीर‘ को फोर्ड फाउंडेशन से 2005 में 1 लाख 72 हजार डाॅलर व 2008 में 1 लाख 97 हजार डालर मिला था, जिसकी पुष्टि 31 अगस्त 2011 को ‘बिजनस स्टैंडर्ड‘ में फोर्ड के अधिकारी स्टीवन साॅलनिक के साक्षात्कार से होती है! क्या यह सही नहीं है कि यूपीए सरकार की गृहमंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, ‘कबीर‘ का एफसीआरए का पंजीकरण 2007 में हुआ था जबकि बिना एफसीआरए पंजीकरण के विदेशी फंड मिल ही नहीं सकती है। क्या अपनी इस ईमानदारी के बारे में केजरीवाल कुछ बताएंगे?

8.क्या यह सही नहीं है कि फोर्ड फाउंडेशन की एशिया प्रमुख कविता रामदास के पिता लक्ष्मी रामदास, मां, ललिता रामदास, बहन सागरी रामदास ‘आआपा‘ के नीति निर्धारक समितियों में शामिल हैं?

9.क्या यह सही नहीं है कि केजरीवाल कांग्रेसी नेताओं के साथ गुप्त बैठक के लिए जर्मनी गए थे और उनकी यात्रा की पूरी फंडिंग एक कांग्रेसी नेता आशीष तलवार ने की थी, जिसे बाद में अपनी पार्टी में भी केजरीवाल ने पदाधिकारी बनाया?

10.क्या यह सही नहीं है कि केजरीवाल के मुख्यमंत्री बनने से केवल 7 दिन पहले 21 दिसंबर 2013 को दिल्ली के सबसे बड़े जमीन घोटाले में फंसी जीएमआर कंपनी ने उन्हें ‘पर्सन आॅफ द इयर‘ का अवार्ड दिलवाया था जबकि सीएजी की 17 अगस्त 2012 को संसद में पेश रिपोर्ट के मुताबिक जीएमआर का एयरपोर्ट जमीन घोटाला अब तक देश का सबसे बड़ा जमीन घोटाला है, जिसमें सरकारी खजाने को 1 लाख 63 हजार करोड़ रुपए का चूना लगा है!

11.क्या केजरीवाल ने इसी पुरस्कार के कारण अपने मुख्यमंत्रित्व काल में दिल्ली के जमीन घोटाले की जांच का आदेश नहीं दिया, जबकि उन्होंने दिल्ली के अधिकार क्षेत्र से बाहर आंध्रप्रदेश के केजी बेसिन के गैस घोटाले की जांच का आदेश दे दिया! क्या यह जनता की आंख में धूल झोंकने और दिल्ली के एक भ्रष्टाचारी कंपनी के साथ भ्रष्ट गठजोड़ का मामला नहीं है?

12.क्या यह सही नहीं है कि गाजियाबाद निवासी केजरीवाल ने दिल्ली में अपना फर्जी मतदाता पहचान पत्र बार-बार बनवाया है? 9 जनवरी 2015 को दिल्ली चुनाव आयोग ने विट्ठल भाई पटेल के पता पर पहचान पत्र बनाने की उनकी अर्जी को क्या खारिज नहीं किया है? क्या यह सच नहीं है कि इसके बाद उन्होंने दत्त काॅलोनी के नाम पर फर्जी पहचान पत्र बनवाया है?

13.क्या यह सही नहीं है कि 5 मार्च 2014 को वह गुजरात में नरेंद्र मोदी के विकास मॉडल का परीक्षण कर रहे थे और ठीक उसी वक्त दिल्ली विधानसभा-40 के एईआरओ के सामने फार्म 8ए भी जमा करा रहे थे? क्या केजरीवाल सुपरमैन हैं कि एक ही समय गुजरात में भी मौजूद रहते हैं और उसी वक्त दिल्ली के चुनाव आयोग में उपस्थित होकर हस्ताक्षर भी कर रहे होते हैं?

14.क्या यह सही नहीं है कि जिस रॉबर्ट वाड्रा के घोटाले पर प्रेस वार्ता को अरविंद ने अपनी ‘आआपा‘ का लांचिंग पैड बनाया था, उसी घोटाले को उजागर करने वाले आईएएस अशोक खेमका की रिपोर्ट को डस्टबीन में डालने वाले युद्धवीर सिंह ख्यालिया को उन्होंने हिसार से लोकसभा का टिकट दिया था?

15.क्या यह सही नहीं है कि केजरीवाल ने उत्तराखंड के खंडूरी सरकार की तरह मजबूत लोकपाल बिल दिल्ली विधानसभा में पेश करने की जगह लोकपाल के नाम पर झूठ बोला और फिर भाग खड़े हुए?

16.क्या यह सही नहीं है कि केजरीवाल ने हर रोज 667 लीटर मुफ्त पानी देने की जो घोषणा की थी, उसमें दिल्ली की केवल 3.5 लाख घर ही कवर होते हैं। क्योंकि इसके लिए पानी के मीटर चालू हालत में होने की शर्त जोड़ी गई थी जो केवल 3.5 लाख घरों में ही लगे हैं।

17.क्या यह सही नहीं है कि केजरीवाल ने जिस अंबानी की कंपनी को गाली दिया, उसी की बिजली कंपनी को 323 करोड़ का सब्सिडी भी दिया?

18.क्या यह सही नहीं है कि केजरीवाल ने सब्सिडी देकर केवल बिजली कंपनी को लाभ पहुंचाया, क्योंकि उनके मुख्यमंत्री पद से हटते ही मार्च से फिर से बिजली का पुराना दाम लागू हो गया, क्योंकि केजरीवाल ने बिजली वितरण के लिए बजट की व्यवस्था करने की जगह कंपनी को सब्सिडी के जरिए फायदा पहुंचाया और गददी छोड़ कर भाग खड़े हुए?

19.क्या यह सही नहीं है कि केजरीवाल ने मुख्यमंत्री बनने से पूर्व सुरक्षा नहीं लेने की बात कही थी और मुख्यमंत्री बनने के बाद न केवल दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर दिनेश कुमार को उनका बॉडिगार्ड नियुक्त किया गया था, बल्कि तत्कालीन गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे के अनुसार, केजरीवाल को उनके घर पर यूपी सरकार ने जेड श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की थी जबकि उन्हें 24 घंटे 3 सब इंस्पेक्टर, 7 हवलदार, 10 सिपाही की सुरक्षा प्रदान की गई थी?

  1. क्या यह सही नहीं है कि केजरीवाल की पार्टी दिल्ली में एक खास समुदाय के कटटपंथी मतदाताओं को लुभाने के लिए फिर से अलगाववादी ‘खालिस्तान‘ आंदोलन को जिंदा करने की कोशिश में हैं। हाल ही में ‘आआपा‘ के पश्चिमी दिल्ली लोकसभा से उम्मीदवार रह चुके व पूर्व में केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम पर जूता उछालने वाले पत्रकार जरनैल सिंह आखिर लंदन में खालिस्तान आंदोलन की बैठक में क्या करने गए थे?

प्‍लीज दिल्‍लीवासी मतदान करने से पूर्व आप भी केजरीवाल, उनके उम्‍मीदवार व आआपा के समर्थकों से यह सवाल पूछें और यदि वो इसका सही उत्‍तर दें तभी उन्‍हें वोट दें, अन्‍यथा यह मान कर चलें कि यह व्‍यक्ति फर्जी तरीके से और लगातार झूठ बोलकर केवल आपका मत हासिल करना चाहता है। आपको मैं कल से अपनी पुस्‍तक में लगाए गए सबूत भी सोशल मीडिया के जरिए पहुंचाऊंगा ताकि यदि आप स्‍वयं निर्णय कर सकें कि आखिर इस व्‍यक्ति के राजनीति में आने का उददेश्‍य क्‍या है…

लेखक – संदीप देव

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