बात उन दिनों की है जब दिल के धड़कने की गति दुगनी से ज्यादा होती है। वो मौसम सावन के शुरुवात का था, पेड़ो पर नए पत्ते आ रहे थे जो सावन का स्वागत करते हुए प्रतीत हो रहे थे।

ठीक उसी समय किसी घर में तन्हाईयो के साये में लेते हुए रोहन को फेसबुक पर एक लड़की दिखी…..ना जाने क्या आया उसके मन में कि उसने उसको मित्रता अनुरोध भेज दिया और फिर तन्हाईयों से विदा लेकर अपने मित्रों के साथ सुहाने मौसम का लुत्फ़ लेने निकल गया….लेकिन मन में कहीं न कहीं उस लड़की का ख्याल उसे रोमांचित करने के साथ जैसे एक परेशानी का सबब दे रहा था।

शाम को लौटकर वो घर आता है और जल्दी जल्दी खाना खाकर अपना लैपटॉप ऑन करता है और फेसबुक देखता है…उसका मित्रता अनुरोध स्वीकार हो गया था और वो ऑनलाइन भी थी……जितने शीघ्र हो सकता था उसने उसे एक सन्देश डाला…”hii…”…..कुछ देर बाद उसका जवाब आया hiii……बस ऐसे ही बातों का सिलसिला शुरू हुआ और पता चला कि उसका नाम अंशिका है वो बिहार से है और लड़का up से था….बातों का सिलसिला लगभग 2 घंटे चला……आज रोहन इतना खुश था मानो जैसे उसे जहां की सारी खुशियां मिल गयी हो…..2 4 दिन बातें करते हुए गुजरे….और एक दुसरे का मोबाइल नंबर भी ले लिया गया…..बात दोस्ती से होते हुए आगे का सफ़र कर रही थी पर शायद दोनों ही जानते हुए अनजान से बन रहे थे……खैर..रोहन तय कर चूका था कि उसे अंशिका से मुहब्बत हो चुकी है और वो इस बात का इजहार भी करेगा ……लेकिन एक अजीब सी कसमकस जैसे हुए हर घडी घेरे हुए थी कि क्या ऐसा करना उचित रहेगा???? अगर उसने मना कर दिया तो???……बुरा मान कर बात ही करना बंद कर दिया तो????ऐसे ही तमाम सबालों की उधेड़बुन में उसने सही समय आने का इंतज़ार किआ और कुछ दिन दिल को सम्हलने की नसीहत दी….

रोहन को काम के सिलसिले में अपने गाँव जाना पड़ा 3 दिन के लिए और वहां पर इंटरनेट की सुबिधा नही थी…..वो बहुत उदास था और किसी काम में मन भी नही लग रहा था पर बेमन से ही सही पर उसे जाना तो था ही….उसने अंशिका को इक सन्देश छोड़ दिया कि 3 4 दिन के लिए उसे गाँव जाना है और बात नही हो पायेगी…..उसने भी उदास दिल से कह दिया कि ठीक है हो आओ……..अभी तक नंबर होने के बाद भी इक दुसरे से दोनों ने फोन पर बात नही की थी…….अब इन्ही 4 दिन के बीच में रोहन का जन्मदिन भी था ……..गाँव जाने के तीसरे दिन जब वो रात में सो रहा था कि अचानक उसका फोन बजता है…..वो चौंककर उठा कि इतनी रात में कौन फोन कर सकता है……पर ये क्या….स्क्रीन देखकर उसकी आँखों में एक अजीब की चमक आगयी…..दिल जैसे एक पल के लिए ठहर सा गया हो…….हाँ ये अंशिका ही थी….फिर देर न करते हुए उसने फोन उठाया और उस तरफ से एक बड़ी ही प्यारी सी आवाज़ आई…”हैप्पी बर्थडे रोहन”…..रोहन ने उसे धन्यवाद कहा……और फिर काफी देर बात हुई……रोहन को ये पता तो नही था कि शरीर में बांछे कहाँ होती है पर अंशिका से बात करके उसकी बांछे खिल जरूर गयी थी…..अपनी जिंदगी के 20 साल के सफ़र में उसे अपने जन्मदिन पर किसी के द्वारा दी गयी बधाई से इतनी प्रसन्नता नही हुई थी जितनी आज हुई थी…..दिल बहुत खुश था और रोहन इस वक़्त जैसे सातवे आसमान की सफ़र कर रहा था….नींद भी अब कहाँ आने वाली थी…..वो तो ख़ुशी में जैसे कहीं गायब सी हो गयी थी….और रोहन बस ख्यालों में खो गया और यही कह रहा था उसका दिल कि

“खुदा या ये लम्हा बस यूँ ही थम जाये,
जहाँ की सारी ख़ुशी मुझे नसीब हो गयी।।”

अब रोहन गाँव से वापस आ चूका था…..लेकिन अभी भी वो हिम्मत नही जुटा पा रहा था अपनी मोहब्बत का इजहार करने के लिए……..बातों का सिलसिला अब फेसबुक से होते हुए फोन पर आगया था….दोनों घंटों फोन पर चिपके रहते थे……

वो होली का दिन था…..रोहन पूरा मन बना चूका था आज उसे अपने दिल की बात बताने के लिए….आखिर पूरा 1 महीना हो गया था दोनों को बात करते हुए…..उसने सुबह उसे फोन किआ होली की शुभकामनाए देने के किए…..और थोड़ी देर की बात के बाद उसने कहा कि अंशिका में तुमसे कुछ कहना चाहता हु……उसने कहा कि कहो क्या बात है……पर वो कमबख्त फिर जैसे हिम्मत खो चूका था जो फोन करने के पहले बड़ी मसक्कत के बाद जुटा पाया था…..और फिर खामोश हो गया……अंशिका के बार बार पूंछने पर भी वो बता न पाया…..पर ख़ामोशी ने जैसे अंशिका से सब कुछ कह दिया था…..और बस देर थी तो रोहन की ख़ामोशी को अल्फ़ाज़ मिलने की…….लेकिन वो मुकम्मल न हो रहे थे…..पर जब अंशिका ने उसे अपनी कसम दी तो रोहन ने कहा कि बात कुछ ऐसी है कि मैं बताने में थोडा डर रहा हु……अंशिका ने पूंछा डर कैसा?????
रोहन ने बताया कि उसे डर है कि कही मेरी बात सुनकर तुम बुरा न मान जाओ और मै तुम्हे खो न दूँ….और मैं इस स्तिथि मै बिलकुल भी नही हूँ कि तुम्हे खो सकु…क्योकि मुझे तेरी आदत हो चुकी है……..जब अंशिका ने कहा कि जो दिल की बात है उसे दिल में नही रखना चाहिए……उसे बोल देना ही ठीक रहता है……अब रोहन को जब हौसला मिला तो उसने बताया कि ,”अंशिका मै तुमसे प्यार करने लगा हूँ…….और चाहता हूँ कि तुम सदा के लिए मेरी हो जाओ”………अंशिका को तो जैसे इन अल्फ़ाज़ों को सुनने का एक ज़माने से इंतज़ार था…..उसने भी पलट कर बस इतना ही कहा,” पागल….इतनी देर क्यों कर दी बोलने में????….आई लव यू टू…”……

रोहन ये शब्द सुनकर तो ऐसे खुश हुआ जैसे उसके हाथ कोई खजाना लग गया हो…..ये होली उसके जीवन की सबसे यादगार और बेहतरीन होली बनकर आई थी……इजहार-ए-मोहब्बत हुआ और बातों का सिलसिला दिनों दिन बढ़ता गया….दोनो रात रात भर फोन पर ही लगे रहते थे….

इस सबके बाद भी समस्या एक ही थी जो दोनो को परेशान किये थी……दोनों के मिलने का समय मुक़म्मल नही हो पा रहा था…..अंशिका बिहार से थी और रोहन यूपी से था……दोनों मिलने के लिए ऐसे बेताब थे जैसे पपीहा सावन की एक बूँद के लिए होता है,……2 महीने इजहार किये हो गए थे….सब बढ़िया था ……और एक दिन अंशिका ने बताया कि उसे कुछ काम के सिलसिले में दिल्ली जाना है और वो वहां लगभग 1 हफ्ते रहेगी…..अब रोहन को मिलने की एक उम्मीद जगी…..दिल्ली उसके यहाँ से ज्यादा दूर नही था……उसने बोला कि वो कुछ जुगाड़ करता है और देखता है …….उसने घर पर बोला कि मम्मी मुझे दिल्ली जाना है कुछ दिन के लिए अपने दोस्त के पास और वैसे भी छुट्टियां चल रही है…..कुछ दिन रूककर आता हूँ…..और जब ज़्यादा जिद की तो उसे मम्मी से इजाजत मिल गयी……ये रोहन के लिए सिर्फ इजाजत नही जैसे एक लकी ड्रा था……उसने सबसे पहले अंशिका को फोन करके बताया कि उसे इजाजत मिल चुकी है और वो आरहा है…….जाने के लिए 2 दिन बचे थे…..और रोहन के लिए ये 2 दिन मानो 2 सदियो जैसे कट रहे थे……आखिर जैसे तैसे 2 दिन हुए और वो अपना सामान पैक करके दिल की तड़प शांत करने दिल वालो की नगरी दिल्ली के लिए रवाना हो गया…….सारे रास्ते वो हसीं ख्वाब बुनता रहा…..मिलने पर क्या कहूँगा???….कहाँ ले जाऊंगा….ब्लाह ब्लाह…….

दिल्ली अब ज्यादा दूर नही थी……खैर वो पहुँच गया और उसका दोस्त उसे लेने स्टेशन आ चूका था……अंशिका अगले दिन आने वाली थी….उन दोनो के मिलन में ये बैरन रात जैसे रोहन को नस्तर सी लग रही थी…..पर जहाँ इतना इन्तजार किआ वहां एक रात और सही……वो रात को अंशिका से बात करता रहा और अगले दिन मिलने की प्लानिंग करने लगा…….और इसी प्लानिंग को मुक़म्मल बनाने की कसमकस में उसे कब नींद आगयी पता ही नही चला…..सुबह जब उसकी आँख खुली तो 8 बज रहे थे …..ये क्या अंशिका ने उसे 10 बजे मिलने का समय दिया था….. फोन उठाया…..देखा अंशिका के 20 मिस्ड कॉल थे…….फोन किआ तो अंशिका गुस्सा हो रही थी….रोहन ने माफ़ी मांगी और जल्दी आने का कहकर तैयार होने चला गया।

अंशिका ने उसे अक्षरधाम मंदिर में बुलाया था…..रोहन तैयार होकर जल्दी जल्दी निकला और मेट्रो पकड़ी….9:45 पर रोहन अक्षरधाम मेट्रो स्टेशन पर था और अंशिका का इंतज़ार करने लगा….10 min में जब अंशिका आई तो रोहन उसको बस दूर से एक टक देखता ही रहा…और जैसे कहीं खो गया था वो…..वो तो जब अंशिका उसके पास आकर उसे हिलाती है तब जाकर जैसे उसकी नींद टूटती है…..और वो अंशिका को गले लगा लेता है….दोनों स्टेशन से निकलकर मंदिर की ओर टहलते हुए ही चल दिए…..रोहन चाहकर भी अंशिका से पता नही कुछ बोल क्यों नही पा रहा था…..उसे कुछ समझ ही नही आरहा था कि क्या बोलूं……खैर दोनों मंदिर में पहुंचकर एक जगह सुकून से बैठ जाते है । काफी देर बैठकर बातों का सिलसिला चला और फिर वहां से निकलकर एक रेस्टोरेंट में दोनों खाना खाने गए…..अंशिका अभी 4 5 दिन और थी दिल्ली में तो मिलना तो तय ही था…..और मिले भी……ये 5 6 दिन जो रोहन ने अंशिका के साथ गुजारे थे रोहन की जिंदगी से सबसे बेहतरीन दिन थे….रोहन इन दिनों को संजोंकर रखना चाहता था……अब अंशिका को भी चूँकि घर वापिस जाना था तो रोहन भी जाने की तयारी करने लगा….और एक आखरी बार उसके जाने से पहले वो अंशिका से मिलने के लिए गया…..अंशिका से मिलकर दोनों ने काफी सारी बातें की और काफी देर तक साथ रहे…..पर वक़्त थमता नही है वो अपनी गति से चल रहा था तो दोनों को समय हो जाने के कारण जाना तो था पर दोनों का ही दिल जाने को मान नही रहा था…..रोहन से जब अंशिका ने जाने का कहा तो रोहन की आँखों में एक नमी सी आगयी और उसी नमी को छुपाते हुए उसने उसे जाने के लिए कह दिया…….अंशिका से वो अपनी आँखों की नमी छुपा न सका…..और अंशिका ने जब पूंछा कि क्या हुआ तो रोहन कुछ बताने की जगह बस उससे लिपटकर रोने लगा और वैसे भी ये आंसू अल्फाजों से बहुत कुछ ज्यादा वयां कर गए थे…..आग दोनों तरफ बराबर लगी थी तो अंशिका भी खुद को रोक न सकी और उसकी भी आँखें लगभग नम हो गयी …….थोड़ी देर बाद जब माहौल शांत हुआ तो दोनों एक दूसरे से विदा लेकर फिर मिलने के वादे के साथ दिल्ली को अलविदा कह अपने अपने घर को चल दिए।

रोहन अब घर आ चूका था …..मन उसका लग ही नही रहा था…..इतने दिन अंशिका के साथ जो रहा था पर धीरे धीरे सब सामान्य हो गया….और वैसे भी अंशिका साथ तो थी ही….शारीरिक रूप से न सही पर आत्मिक रूप से तो थी ही।
दोनों का प्यार एक अच्छे तरीके से परवान चढ़ रहा था और सब सही जा रहा था…….अचानक एक दिन ज़िन्दगी ने कुछ अजीब सा मोड़ लिया जिसके बाद रोहन की जिंदगी बदल ही गयी……वो रात का पहर था जब अंशिका का फोन आया रोहन ने बात की और बताया कि वो मूवी देख रहा है लैपटॉप पर क्या थोड़ी देर में बात करे????…..अंशिका ने कहा “ओके देख लो।”

रोहन ने फोन काट दिया….मूवी ख़त्म होने के बाद रोहन ने अंशिका को फोन किया पर उस तरफ से कोई जवाब नही आरहा था……रोहन लगातार फोन किये जा रहा था और अंशिका उठा ही नही रही थी…..रोहन जब तकरीवन 40 50 बार फोन कर चूका तो अंशिका ने फोन रिसीव किया…..रोहन की जान में जान आई….उसने डांटते हुए कहा कि फोन क्यों नही उठा रही थी इतनी देर से लगा रहा हु???

उधर से अंशिका ने गुस्से और व्यंग दोनों के समावेशित लहजे में कहा कि तुम मूवी देख लो बाद में बात करते है………रोहन की दिमाग की बत्ती गुल हो गयी कि साला इसने ही तो मूवी देखने के लिए कहा था कि देख लो और अब उसपर इतना बबाल??

रोहन ने समझाया उसे कि यार तूने ही तो कहा था कि देख लो….अगर तुम कह देती कि  नही बात ही करो तो मै न देखता……पर अंशिका के दिमाग में पता नही क्या चल रहा था और रोहन उसे समझ भी नही पा रहा था……और अंशिका ने उसे सुबह फोन करने का कहकर फोन काट दिया…..पर रोहन की आँखों में नींद कहाँ थी???…..वो तो अंशिका को समझ ही नही पा रहा था कि ये हो क्या रहा है…..और पूरी रात इसी कसमकस में निकल गयी कि आखिर हुआ क्या है जो वो समझ नही पा रहा।

सुबह रोहन फिर उसे फोन करता है…..पर बातों में उसे एक अजीब सा एहसास महसूस हो रहा था जैसा उसे पहले कभी नही हुआ था……वो ये न तो सहन कर पा रहा था और न ही समझ पा रहा था…..पर अंशिका तो उससे दूर जाने का जैसे पूरा मन बना चुकी थी…..और 2 3 दिन ऐसे ही औपचारिक बातों का सिलसिला चला और अंशिका ने रोहन को कह दिया ,”i don’t think its working anymore”….अंशिका ने तो ये बड़े ही आराम से कह दिया पर रोहन पर इसका क्या असर पड़ेगा वो शायद इससे अनभिज्ञ थी…..और वहां रोहन ये सब सुनकर जैसे पत्थर हो गया था…..वो अपने रिश्तों की टूटती दीवार बस गिरते देख रहा था….पर ये दीवार आखिर गिर क्यों रही है ये रोहन को समझ नही आरहा था…..रोहन तो बस जैसे  “पागल” सा हो गया था…..उसका किसी काम में मन ही नही लगता था…..उसे ऐसे किसी “हादसे” की कोई उम्मीद ही नही थी…..दिल नही मानता तो अंशिका को फोन करता पर उसने रोहन का नंबर ब्लैक लिस्टेड किया हुआ था……

बस रोहन को इतना ही तो पूंछना था अंशिका से कि आखिर ऐसी क्या वजह है कि जिसके साथ हमसफ़र बन जीवन का हसीं सफर करने की बातें की उसे पल में अजनबी कर दिया?????

ऐसी क्या खता हुई कि उसकी मोहब्बतें…..एक हसीं मंजिल आने के पहले ही दम तोड़कर “अधूरी मोहब्बतें” बनकर ही रह गयी????……

वो बस उदास सा होकर शायराना अंदाज़ में अंदर ही अंदर खुद से बस इतना ही कहता-

” मुड़ती रही राह इस कदर फिर भी इतना समझ न पाये,
कि वापस वही आ पहुचेंगे जहा से आगाज कर बैठे थे।।”

Story written by- Sonu Sharma “Bhanu”®

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