greater noida fast-food

हमारे आयुर्वेद ग्रंथों ने ऐसे शुद्ध, ताजे और सात्त्विक आहार का चुनाव किया है,जिसको खाने से मन पवित्र और बुद्धि सात्त्विक रहे। परंतु दुर्भाग्यवश पश्चिमी ʹकल्चरʹ का अंधानुकरण कर रहे भारतीय समाज का मध्यम तथा उच्चवर्गीय भाग फास्टफूड खाने की अंधी दौड़ में अपने तन मन को विकृत कर रहा है। विद्यार्थी भी इसकी चपेट में आकर अपने स्वास्थ्य के दुश्मन फास्टफूड को मित्र समझ बैठे हैं।

फास्टफूड को आकर्षक, स्वादिष्ट व ज्यादा दिन तक तरोताजा रखने के लिए उनमें तरह तरह के रसायन (केमिकल) मिलाये जाते हैं। उनमें बेन्जोइक एसिड अत्यधिक हानिकारक है, जिसकी 2 ग्राम मात्रा भी एक बंदर या कुत्ते को मार सकती है। मेग्नेशियम क्लोराइड और कैल्शियम साइट्रेट से आँतों में घाव होते हैं, मसूड़ों में घाव हो सकते हैं एवं किडनी क्षतिग्रस्त होती है। सल्फर डायोक्साइड से उदर-विकार होते हैं तथा एरिथ्रोसीन से अन्ननली और पाचनतंत्र को हानि होती है।

फास्टफूड से ई-कोलाई, सल्मोनेल्ला, क्लोब्सिएल्ला आदि जीवाणुओं का संक्रमण होने से न्यूमोनिया, बेहोशी, तेज बुखार, मस्तिष्क ज्वर, दृष्टिदोष, मांसपेशियों के रोग, हृदयाघात आदि बीमारियाँ होती हैं। अतः आँतों की बीमारियाँ व आँतों को कमजोर करने वाली डबल रोटी, बिस्कुट में कृत्रिम फास्टफूडस से बचो। सात्त्विक नाश्ता व आहार करो। हमारे शास्त्रों ने भी कहा हैः ʹजैसा अन्न वैसा मन।ʹ

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