एग्फा बेबी कैमरे से सन १९६६ में खींची गयी पीली हो चुकी तस्वीर में चौदह साल का दुबला पतला घने बालों वाला एक लड़का स्काउट की कमीज़ पहने, बनते हुए एक मकान के चौक में खड़ा था. उसके एन बगल में थी एक तख्ती, जिस पर लिखा था- ‘प्रेम-घर’. वह मैं था, और तख्ती के अक्षर भी मेरे! भाई साब ने अपने मकान का नाम जिन के नाम पर रखा था- वह तो कब की चलीं गयीं- उनकी माँ- प्रेम मंजरी! वह भी उसी पुराने एल्बम में कहीं हैं. “ ये मैं हूँ…” खुश होते हुए मैंने बच्चों से कहा. उन्होंने पहले फोटो को ध्यान से देखा फिर मुझे, फिर वे मुझे और फोटो में खड़े लड़के को देख कर हँसने लगे!

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