फेंफड़े हमारे शरीर का महत्वपूर्ण अंग हैं, जिन्हें अंग्रेजी में (Lung) कहते हैं। इसके खराब होने से अस्थमा, टीबी, दमा या फेंफड़े से संबंधित अन्य कोई भी गंभीर रोग हो सकता है।img1121004041_1_1

फेंफड़ों के स्वस्थ्य रहने से जहां संपूर्ण शरीर स्वस्थ्य रहता है वहीं यह दिमाग को भी सेहतमंद बनाए रखता है। एक शोध से पता चला है कि फेंफड़ों का स्वास्थ्य का असर दिमाग पर पड़ता है। फेंफड़ों में भरपूर शुद्ध हवा से दिमाग में ऑक्सिजन की पूर्ति होती रहती है।

कैसे होता है फेंफड़ा खराब : फेंफड़े मुख्यत: धूम्रपान, तम्बाकू और वायु प्रदूषण के अलावा फंगस, ठंडी हवा, भोजन में कुछ पदार्थ, ठंडे पेय, धुएँ, मानसिक तनाव, इत्र और रजोनिवृत्ति जैसे अनेक कारणों से फेंफड़ा रोग ग्रस्त हो सकता है। व्यक्ति की नाक, गला, त्वचा आदि पर इसका परिणाम एलर्जी कहलाता है।

कैसे बनाएं फेंफड़े को स्वस्थ : फेंफड़ों को स्वस्थ्य और मजबूत बनाए रखने के लिए अनुलोम-विलोम का अभ्यास करने के ‍बाद कपालभाति, भस्त्रिका और कुम्भक प्राणायाम करने चाहिए। इसके बाद त्रिबंधासन का अभ्यास करें। त्रिबंधासन में तीनों बंध (उड्डीयान, जालंधर और मूलबंध) को एक साथ लगाकर अभ्यास किया जाता है। बस इतना पर्याप्त है।

एक्ट्रा एफर्ट : इसके बाद यदि आप करना चाहें तो ब्रह्ममुद्रा 10 बार, कन्धसंचालन 10 बार (सीधे-उल्टे), मार्जगसन 10 बार, शशकासन 2 बार (10 श्वास-प्रश्वास के लिए), वक्रासन 10 श्वास के लिए, भुजंगासन 3 बार (10 श्वास के लिए), धनुरासन 2 बार (10 श्वास-प्रश्वास के लिए), पाश्चात्य प्राणायाम (10 बार गहरी श्वास के साथ), उत्तानपादासन 2 बार, 10 सामान्य श्वास के लिए, शवासन 5 मिनट, नाड़ीसांधन प्राणायाम 10-10 बार एक स्वर से, कपालभाति 50 बार, भस्त्रिका कुम्भक 10 बार, जल्दी-जल्दी श्वास-प्रश्वास के बाद कुम्भक यथाशक्ति 3 बार दोहराना था।

सावधानी- सभी प्राणायाम, बंध या आसन का अभ्यास स्वच्छ व हवायुक्त स्थान पर करना चाहिए। पेट, फेंफड़े, गुदा और गले में किसी भी प्रकार का गंभीर रोग हो तो चिकित्सक की सलाह लें।

इसके लाभ- फेंफड़े के अलावा इससे गले, गुदा, पेशाब और पेट संबंधी रोग भी दूर होते हैं। इसके अभ्यास से दमा, अति अमल्ता, अर्जीण, कब्ज, अपच आदि रोग दूर होते हैं। इससे चेहरे की चमक बढ़ती है। अल्सर कोलाईटिस रोग ठीक होता है और फेफड़े की दूषित वायु निकलने से हृदय की कार्यक्षमता भी बढ़ती है।

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