आज घोड़े पर चढ़कर कोई तलवार आपकी गर्दन पर लगा कर हिन्दुओं का धर्मांतरण नहीं करवा रहा, लोकतंत्र और धर्म-निरपेक्षता की आड़ में सैकड़ों प्रकार के प्रपंच आज धर्मांतरण हेतु प्रयोग किये किये जा रहे हैं, जिन्हें हिन्दुओं का अधिकाँश वर्ग समझ नहीं पा रहा l

और जो समझ भी पा रहे हैं उनमें भी अधिकाँश वर्ग ऐसा है जो समझता सब कुछ है परन्तु कर कुछ नहीं प् रहा l

वर्तमान में स्थिति ऐसी हो चुकी है कि अधिकाँश हिन्दुओं को टेलीविजन, रेडिओ, फिल्मो के माध्यम से उल्टी सीधी बातें, किस्से, डायलाग आदि  सुना सुना कर उन्हें हिन्दू धर्म के विरुद्ध करने का प्रयास किया जाता है और वो दुनिया का सबसे Soft Target बनता है, क्यूंकि उसके पास न तो अपनी धार्मिक मान्यताओं का उपहास उड़ाने वालों के लिए कोई उत्तर है न ही तोड़…

ऐसे हिन्दू अपने धर्म, संस्कृति, सभ्यता, परम्पराओं का उपहास उड़ते हुए देखते हैं… परन्तु कर कुछ नहीं पाते, ये उपहास उड़ाने वालों को उचित Reply ही नहीं दे पाते, Counter करना तो बहुत दूर की बात है … Because… The War has been Intellectual

मेरी इस पोस्ट से कोई यह निष्कर्ष न निकाल बैठे कि मैं भक्ति उपासकों या भक्ति सम्प्रदायों का निंदक या आलोचक हो गया हूँ, ऐसा नहीं है, यह स्पष्टीकरण इसलिए आवश्यक है कि FaceBook पर कई लोग ऐसे भी होते हैं जिनका मूल स्वभाव आज भी Orkut के चिरकुट वाला ही रहता है, बिना सोचे समझे Comment करना उनका स्वभाव बन चुका है, ऐसे लोग कृपया इस Post से दूर रहें, यदि कुछ समझ में आये तो अपने सुझाव दें, अन्यथा उचित दूरी बनाए रखें आपकी अति कृपा होगी l

भक्ति काल ने सनातन धर्म को इस्लामिक आक्रमणों के कारण हो रही हानियों से बचाने हेतु एक प्रकार से संजीवनी का कार्य किया, जो कि सराहनीय था, है और रहेगा l
वर्तमान शिक्षा पद्धति में धर्म, अध्यात्म आदि की शिक्षा किसी विद्यालय में तो मिलती नहीं, अपितु थोड़ी बहुत शिक्षा जो घर पर या मन्दिर में मिलती है वो भक्ति की और ही प्रेरित कर देती है, परन्तु यदि अब क्या सारा जीवन भक्ति भक्ति भक्ति … और केवल भक्ति ?

ये तो कुछ ऐसा हुआ मानो… आपने 10वीं कक्षा पास कर ली है, परन्तु फिर भी हर साल 10वीं की ही पुस्तकें पढ़ रहे हो, और 10वीं की ही परीक्षा की तैयारी हो रही हो … यह कब तक चलेगा l
वैसे तो आजकल के पढ़े लिखे SICKULAR लोग धर्म को एक फालतू की चीज समझते हैं, और जो लोग धर्म को अपने जीवन में महत्व देते भी हैं वे मन्दिर जाकर आरती और कीर्तन करने को ही धर्म समझ लेने की गलती करते रहते हैं, परमात्मा को प्रेम करना कोई बुरी बात नहीं होती, पर केवल भजन कीर्तन को ही धर्म समझ लेना गीता का अपमान स्वरूप है,

वेदों में तथा गीता में मुक्ति के तीन मार्ग बतलाये गए हैं…
१. ज्ञान मार्ग … २. कर्म मार्ग … ३. उपासना मार्ग …

क्यों हमारे धार्मिक लोग केवल कीर्तन की ढोलकी बजाने को ही धर्म समझ लेते हैं, क्या उनको जाकिर नाईक जैसे लोग दिखाई नही देते, जाकिर नाईक ने अपने Pisslam के पैशाचिक ग्रन्थ पढ़े हैं और साथ ही उसने वैदिक ग्रन्थों का भी अध्ययन किया है पर यह और बात है कि जिसकी सनातन धर्म में आस्था ही न हो वो वेदों का अध्ययन कर भी लेगा तो उनकी व्याख्या तो मैक्स-मुलेर के रूप में ही करेगा… नास्तिक व्यक्ति या फिर वेदों में आस्था न रखने वाले व्यक्ति यदि वेदों का अध्ययन कर भी लेंगे तो वे अर्थ का अनर्थ ही करेंगे …
और जाकिर नाईक अकेला नहीं है, मैक्स मुलर ने भी वेदों का अध्ययन किया और सत्यानाश किया, अर्थ का अनर्थ किया, आप सब लोग ठंडे दिमाग से सोचिये, क्या जाकिर नाईक और मैक्स मुलर जैसे लोगों को उत्तर देने के लायक बना जा सकता है …. कीर्तन आदि करके या ढोलकी आदि बजा कर के …???

आखिर क्यों धार्मिक लोग शास्त्र-अध्ययन नहीं करते, धार्मिक लोग ही नही करेंगे तो फिर कौन करेगा …??

यही समस्या है… और इस समस्या को जाकिर नाईक तथा फादर डोमिनिक जैसे लोग भली भांति पहचानते हैं … कि हिन्दू या तो सो रहा है…. और जो जाग रहा है वो बस ढोलकी बजा रहा है, या कीर्तन आदि कर रहा है ….
उनके ग्रन्थों का सत्यानाश करने का अच्छा अवसर है …?

फिर तैरा कर दिखाओ पानी में लकड़ी का क्रास … और सूरत के प्लेग के रोगियों को पिलाओ दवाई वाला पानी .. Holy-Water कह कर… और करो धर्मांतरण … क्योंकि उनके कुतर्कों का उत्तर देने हेतु तो कोई आपको प्रशिक्षित करने वाला है नहीं … न ही आपको कोई सिखाने वाला है कि उचित मार्ग क्या है …. ??

भक्ति काल एक प्रकार का आपातकाल था जो कि अब गुजर चुका है, अब पुन: वापिस अपने ज्ञान मार्ग और कर्म मार्ग की और लौटने की है … परन्तु पूरे विश्व को केवल भक्ति भक्ति की और ही प्रेरित करते रहना क्या यह मुर्खता की पराकाष्ठा जैसी प्रतीत नही होती l

एक वो समय था जब आक्रमणकारी घोड़ों पर बैठ कर आते थे और सनातन धर्म को भांति भांति प्रकार से हानियाँ पहुंचाने के प्रयास करते रहते थे, उस समय ज्ञान, पराक्रम, भक्ति, सहनशीलता, कूटनीति के तहत जितना जितना जिसका सामर्थ्य हुआ …उसने वो बचा लिया l

आज के समय में युद्ध बोद्धिक हो चुका है, अवैदिक मत और वेद-विरोधी मत दोनों वैदिक धर्म की ईंट से ईंट बजाने हेतु आये दिन कोई न कोई नये प्रकार का प्रपंच चलाये रहते हैं, जिनमे रूपये के लालच में बिके हुए अहिंदुओं का भी उल्लेख आवश्यक है, जैसे सतलोक आश्रम का कबीर-पंथी गुरु रामलाल जो पिछले दिनों जाकिर नाईक से पैसा खाकर हिन्दू विश्वास को चोट पहुंचाने के लक्ष्य में असफल हो हुआ, जिसमे कि एक बहुत बड़ा हाथ है पंडित महेंद्र पाल आर्य जी का l

आज यदि कुल मिलाकर देखा जाए तो पंडित महेंद्र पाल आर्य जैसे लोग ही बहुत कम मिलेंगे आपको जो सनातन धर्म के शत्रुओं को उनके कुतर्कों का वैदिक धर्म के वैज्ञानिक तर्कों के आधार पर उन्हें हरा सकें l
क्या सारा जीवन कीर्तन करने वाला प्राणी कभी जाकिर नाईक के कुचक्रों का उत्तर दे सकता है ?
वर्तमान में जाकिर नाईक जैसे लोगों के पास अपना TV Channel भी है, और अरब देशों से जो वित्तीय सहायता प्राप्त होती है वो भी किसी से छुपी हुई नही है l

अब जाकिर नाईक के रिसर्च सेंटर में हजारों मुस्लमानों की भर्ती की जा रही है, जो कि जाकिर नाईक के कुचक्रों को लोगों के बीच फैलाने का कार्य सड़क पर उतर कर करने वाले हैं, मन्दिर में कीर्तन, हवन आदि करने वालों को वे दिग-भ्रमित करने उतरने वाले हैं l
ये सब होगा आने वाले कानून “अंध-श्रद्धा निर्मूलन कानून” के अंतर्गत …

अब अखिल भारत हिन्दू युवक सभा द्वारा ऐसे “वैदिक – ज्ञानोदय” कार्यक्रम के माध्यम से युवकों को चुन चुन कर तैयार किया जायेगा…
जिसमे वैदिक ज्ञान, वैदिक मत, वैदिक सिद्धांत, वैदिक साहित्यों, दर्शनों, समस्त श्रुतियों-स्मृतियों आदि का ज्ञान दिया जायेगा, उसके उपरान्त समस्त अवैदिक और वेद-विरोधी पुस्तकों का भी तुलनात्मक अध्ययन करवाया जायेगा l

अंत में मुख्य रूप से इसमें सभी युवकों को गैर-हिन्दुओं के शुद्धि-करण की विधि भी सिखाई जाएगी, जिसके माध्यम से किसी भी पैशाचिक सम्प्रदाय के अंतर्गत पैशाचिक जीवन जीने वाले किसी भी अहिंदू को आप कभी भी – कहीं भी शुद्धिकरण करके एक विशुद्ध मनुष्य जीवन जीने का अवसर प्रदान कर सकते हैं l

अज्ञानता के चलते हम यह निष्कर्ष नहीं निकाल पाते ना ही आकलन कर पाते हैं कि क्या सही है और क्या गलत …
सही अर्थों में कहा जाए तो जिस व्यक्ति को धर्म-सत्य-नीति का वास्तविक ज्ञान ही न हो, वो अधर्म असत्य अनीति का विरोध किस प्रकार कर पायेगा ?

इस पवित्र कार्य में सहयोगी बनने वाले समस्त सनातनी भाइयों का हार्दिक स्वागत है, साप्ताहिक, पाक्षिक, मासिक कार्यक्रमों में सक्रीय रूप से भाग लेकर जाकिर नाईक जैसे लोगों के कुचक्रों से सनातन धर्मियों को बचाने हेतु आगे आयें l

हिन्दू महासभा प्रचंड हो, भारत देश अखंड हो

ॐ सर्वोपरि सर्वगुण संपन्न सनातन धर्मं

|| सनातनधर्मः महत्मो विश्व्धर्मः ||

…”विश्व महाशक्ति बनना हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है, और हम इस पद को लेकर रहेंगे ।”

जय श्री राम कृष्ण परशुराम ॐ

साभार-लवी भरद्वाज सावरकर

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