व्यक्ति प्राकृतिक लेना भूल गया है। प्रदूषण और तनाव के कारण उसकी श्वास उखड़ी-उखड़ी और मंद हो चली है। यहां प्रस्तुत है श्वास को शुद्ध करने के योगा टिप्स

img1120515086_1_11.जहां भी प्रदूषण भरा माहौल हो वहां केवली प्राणायाम करने लगें और उस प्रदूषण भरे माहौल से बच निकलने का प्रयास करें। यदि रूमाल साथ रखते हैं तो केवली की आवश्यकता नहीं।

2.बदबू से बचें, यह उसी तरह है जिस तरह की हम खराब भोजन करने से बचते हैं। बेहतर इत्र या स्प्रे का इस्तेमाल करें। श्वासों की बदबू के लिए आयुर्वेदिक इलाज का सहारा ले सकते हैं।

3.क्रोध, राग, द्वैष या अन्य नकारात्मक भाव के दौरान नाक के दोनों छिद्रों से श्वास को पूरी ताकत से बाहर निकाल कर धीरे-धीरे पेट तक गहरी श्वास लें। ऐसा पांच बार करें।

4.अपनी श्वासों पर विशेष ध्यान दें कि कहीं वह उखड़ी-उखड़ी, असंतुलित या अनियंत्रित तो नहीं है। उसे सामान्य बनाने के लिए अनुलोम-विलोम कर लें।

5.पांच सेकंट तक गहरी श्वास अंदर लेकर उसे फेंफड़ों में भर लें और उसे 10 सेकंट तक रोककर रखें। 10 सेकंट के बाद उसे तब तक बाहर छोड़ते रहें जब तक की पेट पीठ की तरफ ना खिंचाने लगे।

6.नाक के छिद्रों का हमेशा साफ-सुधरा रखें। चाहें तो जलनेती या सूतनेती का सहारा ले सकते हैं।

7.सुगंध भी प्राकृतिक भोजन है। समय-समय पर सभी तरह की सुगंध का इस्तेमाल करते रहने से मन और शरीर में भरपूर उर्जा का संचार किया जा सकता है।

उचित, साफ, स्वच्छ और भरपूर हवा का सेवन सभी तरह के रोग और मानसिक तनाव को दूर कर उम्र को बढ़ाता है।

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