का शिकार रहे लोगों का कहना है कि डॉक्टरों की सलाह के बजाय इस बीमारी में अधिक कारगर सिद्ध होता है तथा इससे जीवनशैली में अधिक सुधार होता है और शरीर भी स्वस्थ रहता है। img1111101071_1_1

एक अमेरिकी जर्नल में प्रकाशित शोध रिपोर्ट में यूनिवर्सिटी ऑफ यार्क के शोधकर्ताओं ने तीन सौ से अधिक लोगों पर अध्ययन किया। इस अध्ययन को ब्रिटेन में अब तक का सर्वाधिक व्यापक सर्वे बताया गया है।

शोधकर्ताओं ने कमर दर्द के शिकार लोगों के एक समूह के नमूने एकत्र किए। ये वे लोग थे जो इस बीमारी के लिए डॉक्टर की सलाह ले रहे थे। इनमें से 156 लोगों को योग कक्षाओं में भेजा गया तथा 157 को उनके डॉक्टरों के रहमोकरम पर छोड़ दिया गया।

तीन महीने बाद योग कक्षा में जाने वाले समूह ने पाया कि वे लोग दूसरे समूह के मुकाबले अपनी जीवनशैली से जुड़ी 30 फीसदी गतिविधियां अधिक सक्रियता से कर पा रहे हैं।

कल प्रकाशित इस शोध रिपोर्ट में बताया गया है कि योग अपनाने वाले लोग तीन महीने बाद अधिक तेजी से चल पा रहे थे और बिना किसी दूसरे की मदद के अपने आप कपड़े पहन सकते थे और अधिक समय तक खड़े रह सकते थे। इस अध्ययन से उन पूर्व अध्ययनों को समझने में मदद मिलती है कि किस प्रकार योग स्वास्थ्य में सुधार करता है।

इस वर्ष के शुरुआत में किए गए कुछ अन्य शोधों में पाया गया था कि स्तन कैंसर की शिकार महिलाओं में योग से तनाव को कम करने और जीवनशैली में सुधार में मदद मिली। इतना ही नहीं हृद्य रोगियों में भी दिल की धड़कन की अनियमित रफ्तार को भी काफी हद तक नियमित करने में मदद मिली।

शोध दल के प्रमुख डेविड टोरगर्सन ने बताया कि कमर का दर्द बेहद सामान्य बात है और साथ ही यह महंगी बीमारी भी है। इसमें कसरत उपचार का सुझाव दिया जाता है, लेकिन इससे बेहद मामूली मदद मिलती है लेकिन हमारे नतीजे दिखाते हैं कि योग इस बीमारी में अल्पकालिक और दीर्घकालिक दोनों प्रकार का फायदा पहुंचा सकता है।

Advertisements