भागती दौड़ती जिंदगी में हमें अपना खयाल कम ही रह पाता है। बीमारी या रोग जकड़ता है तभी हमें अपने शरीर का भान हो पाता है। हमें अपने शरीर की हर हरकत पर नजर रखनी चाहिए। उसकी उचित देखभाल कर लिए यह जरूरी है कि उसका पूर्ण ज्ञान होimg1110524056_1_1

शरीर के भीतर और बाहर की स्थिति का ज्ञान होना आवश्यक है। इससे शरीर को दीर्घकाल तक स्वस्थ और जवान बनाए रखने में मदद मिलती है। शरीर के भीतरी अंगों की प्रत्येक हलचल और उसकी स्थिति का ज्ञान होना ही समुदाय ज्ञान शक्ति कहलाता है।

*कैसे होगा यह ज्ञान : नाभिचक्र पर संयम करने से व्यक्ति को शरीर स्थित समुदायों (अंगों) का ज्ञान हो जाता है अर्थात कौन-सी कुंडली और चक्र कहां है तथा शरीर के अन्य अवयव या अंग की स्थिति कैसी हैऔर वे किस हालात में है।

*इसका लाभ : समुदाय ज्ञान ‍शक्ति से व्यक्ति का अपने शरीर पर पूर्ण कंट्रोल रहता है। रोग या बीमारी पूर्व ही वह सजग होकर उसकी रोकथाम की उचित चिकित्सा कर लेता है। लगातार नाभिचक्त पर ध्यान देने तथा उस पर संयम कायम करने से व्यक्ति को हर दम फ्रेसनेस महसूस होती रहती है। वह किसी भी प्रकार के मौसम को बर्दाश्त करने की क्षमता प्राप्त कर लेता है।

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