खुद से भी मिल न सको, इतने पास मत होना
इश्क़ तो करना, मगर देवदास मत होना

देखना, चाहना, फिर माँगना, या खो देना
ये सारे खेल हैं, इनमें उदास मत होना

जो भी तुम चाहो, फ़क़त चाहने से मिल जाए
ख़ास तो होना, पर इतने भी ख़ास मत होना

किसी से मिल के नमक आदतों में घुल जाए
वस्ल को दौड़ती दरिया की प्यास मत होना

मेरा वजूद फिर एक बार बिखर जाएगा
ज़रा सुकून से हूँ, आस-पास मत होना

“मोहब्बत तेरी सूरत से नही, तेरे ‘किरदार’ से है,
शौक-ए-हूस्न होता तो बाजार चले जाते”

मुझसे नफ़रत ही करना हैं, तो ईरादे मज़बुत रखना..
जरा सी भी चुक हुई,.. तो मोहब्बत हो जायगी..!!

दफन हैं मुझमें, मेरी कितनी रौनके मत पुँछौ..
उजड़ उजड़ कर बस्ता रहाँ, मैं वो शहर हूँ..!!

प्यास भी गज़ब थी और पानी में भी ज़हर था..
पीते तो मर जाते और ना पीते तो किधर जाते.!!

एक वफा के खातिर, ज़लिल किया तेरे शहर ने..
गर तेरी फ़िक्र ना होती, तो जला कर खाक कर देते.!!

मौसम की मिसाल दूँ , या तुम्हारी..
कौई पुछ बैठा है, बदलना किसे कहते हैं.??

मुद्दत का सफर भी था और बरसों का हमसफर भी..
रुकते तो बिखर जाते और चलते तो बिछड़ जाते..!!

अजीब था उस शक्स का अलविदा कहना..
सुना भी कुछ नहीँ और कहा भी कुछ नही.!!

जो हँस रहा है, उसे दर्द ने पाला होगा..
जो जल रहा है, उसी दिये से उजाला होगा.!!

Advertisements