दोस्तों अगर पुरे विश्व के लोग मॉस खाना बंद कर दे तो पूरी दुनिया में इतना अनाज पैदा होता है कि पुरे विश्व के एक एक व्यक्ति का तो पेट भरा जा सकता है इसके आलावा अगर इतनी ही एक दूसरी दुनिया पैदा हो जाये उसका भी पेट भरा जा सकेगा अब आपको एक आंकड़े से समझाते है

इस समय पूरी दुनिया में 650 करोड़ लोग रहते है भारत में 115 करोड़ लोग है, चीन में 140 करोड़ लोग है ये दो देश है जिनकी जनसंख्या सबसे ज्यादा है इसके आलावा तीसरा सबसे बड़ा देश है अमेरिका जहा पर लगभग 27 करोड़ लोग है इसके बाद यूरोप के 15 देश है फ़्रांस है जर्मनी है स्पेन है हॉलैंड है पुर्तगाल है इन 15 देशो की कुल जनसँख्या 30 करोड़ है फिर अफ्रीका है फिर लैटिन अमेरिका है सारी दुनिया में कुल 650 करोड़ लोग है

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राजीव भाई कहना ये चाहते है कि अगर पूरी दुनिया की जनसँख्या दो गुनी हो जाये यानी 1300 करोड हो जाये और मास उद्योग पर ताला लगा दिया जाये तो जितना भोजन आज यानी गेहू, चना, दाल, चावल, सब्जी, फल आदि पूरी दुनिया में पैदा होता है जितना अनाज आज पैदा हो रहा है वो इन 1300 करोड़ लोगो का पेट भरने को प्रयाप्त है आप कहेगे वो कैसे ये बात आपको समझ नहीं आई होगी तो आपको समझाते है

दुनिया में जो मास का उत्पादन होता है उसकी प्रक्रिया क्या है वो आपको जानना होगा दुनिया में मास का उत्पादन होता है जानवरों का कतल करके| और जानवरों में सबसे ज्यादा कतल होने वाला जो प्राणी है उसका नाम है गाय, गाय के वंश का बैल, गाय के वंश के बछड़े और बछिया, सबसे ज्यादा ये कतल होते है पूरी दुनिया में| उसके बाद दुसरे न. पर जो सबसे ज्यादा कतल होने वाला प्राणी है पूरी दुनिया में वो है सुवर| उसके बाद तीसरे न. पर जो सबसे ज्यादा कतल होने वाला प्राणी है पूरी दुनिया में वो है भैस और चौथे न. पर जो सबसे ज्यादा कतल होने वाला जो प्राणी है वो है बकरे, बकरियां और भेड और पांचवे न. पर जो सबसे ज्यादा कतल होने वाला जो प्राणी है वो है मुर्गे और मुर्गियां और उसके बाद आते है छोटे पक्षी जिनकी कोई गिनती है | इन जानवरों को कतल करने से पहले इनके शरीर में मांस ज्यादा हो तो कतल करने वाले उद्योगों को फायदा ज्यादा होता है तो जानवरों के शरीर में मांस बढाने के लिये उनको अनाज खिलाया जाता है गेहू खिलाते है, गेहू के आलावा चावल और चना आदि खिलाते है और मक्की और बाजरी खिलाते है तो इन सब जानवरों को भोजन खिलाया जाता है| और ये सभी जानवर प्रकृति से घास खाने वाले है गाय घास खाने वाली है भैस घास खाने वाली है, इसी तरह सुवर मनुष्य का मल और दूसरी चीजे खाने वाला है इसी तरह बकरे और बकरियां पूरी तरह से शाहकारी जीव है और ये मुर्गे मुर्गियां ज्यादातर ऐसी ही चीजे खाते है तो ये जानवर जो है ये घास खाने वाले और चारा चरने वाले जीव है लेकिन मांस उत्पादन करने वाली कंपनियां इनको जबरदस्ती अनाज, दाल मटर और बाजारी और मक्की ऐसी चीजे खिलाते है इनको खिलने ये इनको ये फायदा होता है कि अगर गेहू, सोयाबीन या कोई और अनाज खिलाया जाये तो वो बहुत जल्दी मोटे होने लगते है| बहुत जल्दी उनके शरीर में चर्बी बढने लगती है बहुत जल्दी उनका शरीर भरी होने लगता है और जानवरों को काटकर बेचने वाले जो लोग है उनके लिये तो सबसे अच्छा यही है कि जो जानवर जितना ज्यादा भारी होगा जितना ज्यादा मोटा होगा, मास उतना ज्यादा होगा और जितना ज्यादा मांस होगा मुनाफा उतना ही ज्यादा होगा| इसीलिये मास उत्पादन करने वाली कंपनियां जानवरों को वो भोजन करवाते है जो भोजन मनुष्य के लिये है अब वो मनुष्य का भोजन जानवरों को करवा दिया जाता है तो मनुष्य के हीस्से में भोजन कम पड़ना शुरू हो जाता है और वही भोजन की कमी हजारो – लाखो लोगो को भूख से मार देती है

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अब थोड़े आंकड़ो की बात करते है सारी दुनिया के जानवरों को जो अनाज खिलाया जाता है वो कुल उत्पादन का लगभग 40% है है भारत जैसे देशो में और 70% है अमेरिका जैसे देशो में|

भारत और अमेरिका की राजीव भाई ने अलग अलग श्रेणिया बनाई है भारत का मतलब है दुनिया के सभी गरीब देश| जैसे भारत एक देश है, इंडोनेशिया है, मलेशिया है, पाकिस्तान है, बांग्लादेश है तो भारत जैसे दुनिए में 186 देश है जिनको गरीब देश कहा जाता है आजकल इन देशो के लिये एक अंग्रेजी का शब्द की विकशित हु है जो है Developing Country (विकासशील देश) | तो भारत जैसे 186 देश है इन सभी देशो में मांस उत्पादन के लिये कुल कृषि उत्पन का 40% जानवरों को खिलाया जाता है अब दूसरी तरफ अमेरिका है, जर्मनी है, फ्रांस है, ब्रिटेन है का कनाडा है और यूरोप के कई सारे देश है| इन देशो में कुल कृषि उत्पादन का 70% जानवरों को खिलाया जाता है आप सोचेये अमेरिका में जितना गेहू पैदा होता है उस पैदा हुए गेहू का 70% जानवरों को खिलाया जाता है अमेरिका के जानवर गेहू , सोयाबीन और अन्य कृषि उत्पन खाकर जल्दी से मोटे हो जाये, जल्दी से उनके शरीर में मांस बढ़ जाये, ज्यादा मोटे हो जाये और फिर उनको काटकर उनका मांस दुनिया में बेचकर कंपनिया ज्यादा मुनाफा कमाए|

आप सोचेये जो आमिर देश है उनके कृषि उत्पादन का 70% जानवर खा जाते है जो गरीब देश है वहा मांस उत्पादन के लिये कुल उत्पादन का 40% अनाज जानवर खा जाते है अगर इनका ओसत निकाला जाये 70+40=110/2 =55% यानि दुनिया में आधा अनाज जानवरों को खिलाकर, उनको मोटा बनाकर फिर उनका मांस कुछ लोग खाते है| अगर इस तर्क को सीधा सा समझने की कोशिस करे कि आधे से ज्यादा अनाज पहले हम जानवरों को खिलाकर उनको मोटा बनाए, फिर उनका मांस हम खाए इससे अच्छा सीधा सीधा ये है कि वो आधा अनाज सीधे ही हम खा जाये तो जितनी जनसँख्या की आज पूर्ति हो रही है उससे दुगनी जनसँख्या की पूर्ति ऐसे ही हो जाएगी |

तो आप कहेगे की जानवरों के लिये कहा से आयेगा तो प्रकृति ने ऐसी सुन्दर व्यवस्था की है कि जहा से आपके लिये भोजन आता है वही से जानवरों के लिये भी पैदा हो जाता है उसके लिये अतिरिक्त प्रयास नहीं करना पड़त| जब आप खेती करते है हम गेहू पैदा करते है गेहू का ऊपर वाला हीस्सा हमारे काम आ जाता है उससे निचे का पूरा हीस्सा गाय बेल या भैस के काम आ जाता है खाने के लिये| तो अतिरिक्त कुछ पैदा नहीं करना पड़ता जानवर के लिये| इसका सीधा सा मतलब है मनुष्य के लिये जो पैदा हो रहा है उसी में से जानवरों की पूर्ति होती है| हम मक्के के उत्पादन करते है, बाजरे के उत्पादन करते है तो मक्की और बाजरे का जो ऊपर का हीस्सा होता है जो लगभग 1 फूट का होता है वो तो हमारे काम आ जायेगा और बचा हुआ नीचे का हीस्सा का 6-7 फुट का जो हीस्सा है वो तो किसी जानवर के ही काम आने वाला है|

प्रकृति और परमात्मा ने तो व्यवस्था ऐसी की है कि मनुष्य के लिये कुल उत्पादन जितना चाहीए उससे 6-7 गुणा ज्यादा उत्पादन चारे और घास के रूप में जानवरों के लिये भी हो ही जाता है उसके लिये कोई अतिरिक्त प्रयास नहीं करना पड़ता | इसलिये हमें जानवरों की यह चिंता छोड़ देनी चाहीए कि उनको अनाज नहीं खिलायेगे तो उनका पेट कहा से भरेगा| उनका पेट भरने के लिये तो प्रकृति और परमात्मा ने व्यवस्था की हुई है| आप तो बस ये चिंता करिये कि इनको काट काट कर अपने मुह में ठूसना बंद कर दीजिये उनकी व्यवस्था तो बहुत सुन्दर और अछे से है

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