बिहार राज्य के अधिकांश क्षेत्रों की मिट्टी एवं जलवायु जैविक खेती के अनुकूल है | यहाँ के कृषकों द्वारा जैविक खेती भी किया जा रहा है परन्तु राज्य में उत्पादित जैविक उत्पादों के प्रमाणीकरण की कोई सरकारी अथवा गैर सरकारी एजेंसी नहीं होने के कारण प्रमाणीकरण का कार्य पूर्णतया बाहरी एजेंसियों पर निर्भर है | इस कारण कृषकों द्वारा काफी पैसे खर्च करने के बावजूद समय पर प्रमाणीकरण का कार्य नहीं हो पता है |

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राज्य के किसानों के जैविक उत्पादों को बढ़ावा देने, उन्हें प्रोत्साहित करने तथा प्रमाणन की सुविधा राज्य में उपलब्ध कराने के लिए कृषि विभाग बिहार, जैविक प्रमाणन एजेंसी का गठन करने जा रही है | जब तक बिहार राज्य जैविक प्रमाणन एजेंसी पटना को कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकार से मान्यता प्राप्त नहीं होती है, तब तक बिहार में जैविक उत्पादों के प्रमाणीकरण का कार्य उत्तराखंड राज्य जैविक प्रमाणीकरण एजेंसी, देहरादून के माध्यम से किया जायेगा |

इसके संपादन के लिए उत्तराखंड राज्य जैविक प्रमाणीकरण एजेंसी, देहरादून जैविक प्रमाणन निरीक्षक, मूल्यांकक एवं गुणवक्ता प्रबंधक पदाधिकारियों को पटना में रखेगी तथा कृषि विभाग बिहार उसे कार्यालय मुहैया कराएगी | उत्तराखंड राज्य जैविक प्रमाणीकरण एजेंसी, देहरादून बिहार राज्य के कर्मियों में प्रमाणीकरण सम्बन्धी निपुणता भी विकसित करेगी | उत्तराखंड राज्य जैविक प्रमाणीकरण एजेंसी, देहरादून द्वारा निर्धारिक शुल्क पर निरिक्षण एवं प्रमाणीकरण का कार्य किया जायेगा जिसका भुगतान सम्बंधित किसानों को वहन करना होगा |

 

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