गोमूत्र : गोमूत्र में कीटों को भगाने एवं पौध बढवार (टॉनिक) के रूप में कार्य करने की शक्ति है

एक स्प्रे पंप में 250 मिली लीटर गोमूत्र प्रति 16 लीटर पानी में डालें | (कददू वर्गीय फसलों में 150 मिली लीटर गोमूत्र प्रति 16 लीटर पानी में डालें |

मटका खाद : एक मटका खाद को 300 लीटर पानी में अच्छे से घोलकर इस विलयन को पौधे के पास जमीन पर देने से अच्छे परिणाम मिलते है (1 से 2 मटका प्रति एकड़) यदि इसी विलयन को सूती कपडे से छानकर फसलों पर छिड़कते है तो अधिक फूल व् फल लगते है |

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गोबर गैस स्लरी : इसके संयंत्र से निकली ताजी खाद में 1.5 से 2 प्रतिशत नत्रजन होता है | इस खाद को 20 किलो/200 लीटर पानी में अच्छे से घोलकर इस विलयन को पौधे के पास जमीन पर देने से अच्छे परिणाम मिलते है यदि इसी विलयन को सूती कपड़े से छानकर फसलों पर छिड़कते है तो अधिक फूल व् फल लगते है |

वर्मी वाश : केंचुए के शरीर को धोकर उससे निकले द्रव को वर्मी वाश कहते है | इसकी 250–500 मिली लीटर को एक पंप में (16 लीटर) पानी में मिलाकर हर 20-25 दिन पर छिडकाव करें |

ताजी छांछ : 250-500 मिली लीटर को एक पंप पानी (16 लीटर) में मिलाकर छिड़कने से पौधें की वृद्धि तथा विकास अच्छा होता है |

गाय का दूध : 250-500 मिली लीटर को 16 लीटर पानी में मिलायें | इसके छिडकाव से पौधों का वृद्धि विकास अच्छा होता है |

सोयाबीन टॉनिक : सोयाबीन के बीजों में पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में होते है जैसे नाइट्रोजन, कैल्शियम, सल्फर इत्यादि | इसी का उपयोग पौध वृद्धिकारक (टॉनिक) निर्माण में किया जाता है | 1 किलोग्राम सोयाबीन बीजों को 24 घंटे पानी में भिगो लेते है | 24 घंटे बाद अब इस फुले हुए सोयाबीन बीजों को खलबत्ते से कूट लेते है या मिक्सर की मदद से पीस लेते है | अब इस पीसे हुए सोयाबीन में 4 लीटर पानी तथा 250 ग्राम गुड मिलाकर इस मिश्रण को मटके में 3-4 दिनों के लिए रख देते है | इसके पश्चात् इसे सूती कपड़े से छान लेते है | छने हुए द्रव को टॉनिक (पौध वृद्धिकारक) के रूप में प्रति पंप 16 लीटर पानी में आधा लीटर मिलाकर उपयोग करने से बहुत ही अच्छे परिणाम मिलते है | इसे सिंचाई जल के साथ 25-30 लीटर प्रति एकड़ भूमि पर देने से फसल का वृद्धि विकास अच्छा होता है |

साभार: अभिनव कृषि चिंतन

 

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