आमिर खान साहब के सत्य मेव जयते कार्यक्रम में समस्याओं के अजीब समाधान सुझाए जाते है, जिसका सार रूप यह होता है कि व्यवस्था की सडांध के लिए आम आदमी जिम्मेदार है, और बदलाव के लिए करोड़ो नागरिको को खुद में बदलाव लाना होगा ।लाखों धर्माचार्य, दार्शनिक, प्रेरक और समाज सुधारक ये सिद्धांत सदियों से दुहरा रहे है, और उन्हें ये कार्य करने दिया जाना चाहिए, लेकिन हमें स्थायी और आमूलचूल बदलाव के लिए उन कानूनों में सुधार लाने के लिए शक्ति लगानी चाहिए जो इस प्रकार की समस्याओं की जननी है ।नैतिक और आध्यात्मिक समाधान जादुई और अव्यवहारिक हो जाते है, यदि कानूनी सुधारों को दरकिनार कर दिया जाए ।

Right to Recall  (3)

12 अक्टूबर के अंक में यातायात नियमों के पालन नही करने के कारण होने वाली दुर्घटनाओं और नुकसान का आकलन किया गया है जिसका सार यह रहा कि :

 

  1. अप्रशिक्षित व्यक्तियों को घूस लेकर लाइसेंस दिए जाते है ।
  2. जर्ज़र गाडियों को घूस लेकर फिटनेस सर्टिफिकेट दिए जाते है ।
  3. ट्रको में क्षमता से अधिक माल ढुलाई करने वालो और शराब पीकर गाड़ी चलाने वालो के पकडे जाने पर घूस लेकर छोड़ दिया जाता है ।

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आमिर साहब द्वारा सुझाए गए समाधान :खुद को बदलने से दुनिया बदली जा सकती है अत: हमें गाड़ी अच्छे से चलानी चाहिए, सीट बेल्ट और हेलमेट लगाना चाहिए, तय सीमा में ही माल की ढुलाई करनी चाहिए, सिग्नल नहीं तोड़ने चाहिए आदि आदि । (क्या पहले आपको ये सब पता था ?)

2.सरकार से मजबूत कानूनों को पास करने की मांग करनी चाहिए ।

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आमिर अन्य छद्म सुधारवादियो की तरह जनता का टाइम वेस्ट करने के लिए उन्हें समाधान की जगह सिर्फ सलाहे दे रहे है, जो कि असीमित हो सकती है।शायद आमिर अगला एपिसोड टेक्स चोरी और हत्याओं पर बनायेंगे, जिसमे वे हमें सुझाव देंगे कि हत्या और टेक्स चोरी अच्छी बात नही है, ऐसा करने से पाप लगता है, अत: नागरिको को खुद में बदलाव लाते हुए हत्या और टेक्स चोरी करना छोड़ देना चाहिए ।एक एपिसोड आतंकवाद और घुसपेठ पर बनाकर पाकिस्तान भी भिजवाया जा सकता है, जिसमे सुझाव हो कि, पाकिस्तान को बार बार गोलाबारी और घुसपेठ नही करनी चाहिए ।.आमिर साहब का यह भी कहना है कि जनता को सरकार से ‘मजबूत’ क़ानून की मांग करनी चाहिए । किन्तु डेढ़ घंटे की अल्पावधि में आमिर को यह बताने का वक़्त नही मिला कि, मजबूत क़ानून किसे कहेंगे ?जाहिर है, नितिन गडकरी ट्रांसपोर्ट में ‘मजबूत’ क़ानून लाने वाले है ।

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¶ कार्यक्रम के पूर्वार्ध में संवेदनशील तरीके से सड़क दुर्घटनाओं का मार्मिक चित्रण कर के भावनाओं को उभाड़ा गया ।

¶ मध्य में खुद को सुधारने की नसीहत देने के बाद उत्तरार्ध आते आते ऐसा इम्प्रेशन ‘बनने लगा’ कि सुधार के लिए मजबूत क़ानून की आवश्यकता है ।

¶ आश्चर्य का विषय यह रहा कि इतनी रिसर्च के बावजूद आमिर इस जानकारी से वंचित रहे कि सरकार ट्रांसपोर्ट एक्ट पर संशोधन तैयार कर रही है ।यह जानकारी जब कार्यक्रम के दौरान पेड पत्रकार दिवांग ने दी तो आमिर ‘चौंक’ गए ।

¶ कार्यक्रम के दौरान दर्शको ने 10-12 करोड़ लाइक शेयर किये, 5-10 करोड़ ट्विट किये और 5-10 करोड़ मिस कॉल की । ( ऐसा कार्यक्रम के दौरान बताया गया )

¶ इस प्रकार आमिर ने जनता को सड़क दुर्घटनाओ के बारे जागरूक किया, और उस क़ानून में संशोधन की मांग की, जिसमे संशोधन की प्रक्रिया पहले से ही चल रही है ।

¶ 2-4 एपिसोड के बाद आप देखेंगे कि अ’सत्य मेव जयते के किसी एपिसोड में नितिन गडकरी विडिओ कोंफ्रेंस के जरिये आकर कहेंगे कि, उन्होंने जनता की आवाज को सुनकर यह संशोधन किये है ।

 

आमिर कहेंगे आपका बहुत बहुत धन्यवाद ।

हर कोई खुश !!!

 

: सरकार खुश है कि उनके द्वारा किये जा रहे नाकाफी प्रयासों का प्रचार किया जा रहा है ।

: आमिर खुश है कि शायद सरकार सत्य मेव जयते के नाम से कोई अवार्ड शुरू कर दे ।: TRP वाले और स्पोंसर करोड़ो की दर्शक संख्या से खुश है ।

: और जनता तो हर हाल में खुश रहती है, बस आलू प्याज और टमाटर के भाव उनकी पहुँच में रहे ।.आमिर खान साहब कार्यक्रम के दौरान भारत और अमेरिका की यातायात व्यवस्थाओं तुलना करते रहे, किन्तु दर्शको को यह जानकारी देना ‘भूल’ गये कि:

^ अमेरिका में यातायात एवं पुलिस कमिश्नर को नौकरी से निकालने का अधिकार जनता के पास है, भ्रष्ट मंत्रियो के पास नही ।ऐसा होने से यदि पुलिस घूस लेकर अपराधो को बढ़ावा देती है, तो अमुक जिले के मतदाता मतदान करके उन्हें नौकरी से निकाल देते है ।

^ अमेरिका में यदि यातायात क़ानून तोड़े जाते है, तो मुकदमा दर्ज होने के महीने भर में फैसला आ जाता है, क्योंकि वहाँ पर मुकदमो की सुनवाई नागरिको की ज्यूरी करती है, न कि भ्रष्ट जज ।

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असल में आमिर खान साहब दबंग खान को नाराज़ नही करना चाहते थे ।सलमान खान हिट एंड रन के मामलो में फसें पड़े है, और पिछले कई वर्षो से तारीखो के भरोसे सुकून भरा जीवन जी रहे है ।

यदि आमिर कार्यक्रम के दौरान ज्यूरी सिस्टम की जानकारी जनता को दे देते, तो दबंग खान एक आध महीने में ही हवालात में नजर आ सकते थे ।

क्या ये आश्चर्य का विषय नही कि, आमिर ने इस प्रकरण को नही छुआ कि जब अमीर जादे शराब के नशे में अपनी बेकाबू स्पोर्ट्स कारो से नागरिको को कुचल देते है, तो फैसला आने में कई दशक क्यों लग जाते है ।

यह कॉमन सेन्स है कि, जब तक हम न्याय प्रक्रिया में तेजी नही लाते तब तक कोई भी क़ानून सिर्फ मुकदमा दर्ज करने की औपचारिकता पूरी करता है, जो कि अपराध को रोकने में नाकाफी है ।

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बात सिर्फ दबंग खान की ही नही है, सभी ‘बड़े आदमियों’ के मामले में कमोबेश ऐसा ही है । जितना ही कठोर क़ानून बनाया जाता है, उसकी मार आम नागरिको पर उतनी ही गहरी पड़ती है । रसूखदार लोग जज और पुलिस को गाठं कर बच निकलते है, और धनाभाव के कारण आम आदमी चंगुल में फंस जाता है ।

‘कठोर कानूनों’ के नाम पर नागरिको के अधिकारों में कटौती कर अधिकारियों को शक्ति दे दी जाती है, जिस से शोषण को बढावा मिलता है ।

यदि हमें अपराध पर रोक लगानी है, तो ऐसे कानूनों की मांग करनी चाहिए, जिन से कानूनों के निष्पादन की शक्ति जिस भार साधक अधिकारी के पास हो, वह सीधे सीधे जनता के प्रति जवाबदेह रहे तथा भ्रष्ट अधिकारियों को दंड देने की शक्ति भी प्रजा के अधीन हो ।

ऐसा सिर्फ राईट टू रिकॉल कानूनों के माध्यम से ही किया जा सकता है

 

समाधान :

  1. यातायात तथा पुलिस प्रमुख को प्रजा अधीन करने का क़ानून पास किया जाए ।इन्हें चुनने तथा नौकरी से निकालने का अधिकार सीधे क्षेत्र की जनता के पास हो ।
  2. जिला परिवहन अधिकारी तथा परिवहन मंत्री को प्रजा अधीन किया जाए ।
  3. पुलिस स्टाफ तथा परिवहन स्टाफ की शिकायतों का निपटारा नागरिको की ज्यूरी द्वारा किया जाए ।
  4. जूरी की अनुमाती से मुलजिम तथा नागरिकों के बहुमत की अनुमति और उनके द्वारा नियुक्त जनसेवक द्वारा नार्को टेस्ट हो (ड्राफ्ट देखें –tinyurl.com/NarcoJury)
  5. जज सिस्टम को बर्खास्त करके ज्यूरी सिस्टम लागू किया जाए ।

 

यदि आप मौजूदा क़ानून व्यवस्था से संतुष्ट है, तो अ’सत्य मेव जयते के फोन नम्बर पर मिस कॉल करे, वे आजकल आपकी आवाज़ सरकार तक पहुंचाने की ही खा रहे है ।किन्तु यदि आप लोकतंत्र में विश्वास करते है, तो बेहतर है कि आप अपनी मांग दलालों* के माध्यम से रखने की जगह सीधे अपने सांसद के समक्ष रखे ।

क़ानून संसद में बनाए जाते है, टीवी स्टूडियो में नही, अत: अपनी आवाज संसद में रखने के लिए, अपने क्षेत्र के सांसद को SMS द्वारा ऑर्डर भेजे कि अमुक क़ानून गेजेट में छापे जाए ।

 

इन कानूनों के ड्राफ्ट्स देखने के लिए कृपया निम्नाकित वेबसाईट देखे :www.rahulmehta.com/301.h.htm(chapter 2,6,22,21)

 

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* आमिर को दलाल संबोधित कर के उनकी प्रतिष्ठा गिराना हमारा हेतु नही है, मगर बेहतर होता यदि वे समाधान के कानूनी ड्राफ्ट्स का लिंक स्क्रीन पर दिखाते, और नागरिको से अपील करते कि इस कानूनी ड्राफ्ट्स का लिंक SMS द्वारा अपने क्षेत्र के सांसदों को भेजे ।ऐसा करने से अ’सत्य मेव जयते के एपिसोड समाप्त होने के बावजूद नागरिको द्वारा SMS द्वारा वांछित कानूनों की मांग सीधे सांसदों से करने की स्वस्थ लोकतांत्रिक परम्परा को बल मिलता ।

प्रजा अधीन राजा

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