अध्याय . (5.1) मात्र 3 लाइन का यह प्रस्तावित पारदर्शी शिकायत प्रणाली गरीबी को 4 महीने में ही कैसे कम कर सकता है ? . (5.2) नागरिकों और सेना के लिए खनिज रॉयल्टी क़ानून-ड्राफ्ट – संक्षेप में : . (5.3) नागरिकों और सेना के लिए खनिज रॉयल्टी (एम आर सी एम) के क़ानून-ड्राफ्ट की ज्यादा जानकारी . (5.4) नागरिको को खनिज रॉयल्टी भेजना . (5.5) राज्य स्तर पर नागरिकों और सेना के लिए खनिज रॉयल्टी के क़ानून-ड्राफ्ट का प्रारूप . (5.6) सार्वजनिक भूमि का किराया कितना है ? . (5.7) खनिज रॉयल्टी कितनी है ? . (5.8) जमीन का किराया वसूलने करने के प्रभाव . (5.9) जमीन का किराया न वसूलने का कु-प्रभाव . (5.10) राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी (एन एल आर ओ) को वापिस बुलाने/नौकरी से निकालने का तरीका . (5.11) खनिज रॉयल्टी सीधे नागरिको के खाते में भेजे जाने के लिए प्रस्तावित कानून (DDMRCM) का ड्राफ्ट . (5.12) कृपया नागरिको और सेना के लिए खनिज रॉयल्टी प्रस्ताव के कानूनी ड्राफ्ट की अंतिम दो धाराओं पर ध्यान दें . (5.13) 110 करोड़ नागरिकों को भुगतान भेजने में आनेवाली लागत . (5.14) क्या इससे सरकारी आय कम नहीं होगी ? नहीं। . (5.15) पश्चिम में कोई ऐसा कानून नहीं है तो हमें इसकी जरूरत क्यों है . (5.16) नागरिक और सेना के लिए रोयल्टी (एम.आर.सी.एम) क़ानून-ड्राफ्ट और मानवाधिकार . (5.17) अभ्यास . ——————————————————————————- .

Right to Recall  (13)

(5.1) मात्र 3 लाइन का यह प्रस्तावित पारदर्शी शिकायत प्रणाली गरीबी को 4 महीने में ही कैसे कम कर सकता है ? . मान लीजिए आप के पास एक किराये का मकान है जिसे आप ने किराये पर दिया है, तो इसका किराया किसको जाना चाहिए, आपको या सरकार को ? आप कहेंगे कि आप को जाना चाहिए। ऐसे ही आप को यदि पूछा जाए कि यदि एक मकान जिसके दस बराबर के मालिक है, किराये पर दिया गया है, तो किराया किसे जाना चाहिए ? तब आप कहेंगे कि दस मालिकों को बराबर-बराबर किराया जाना चाहिए। इसी तरह यदि कोई बहुत बड़ा प्लाट हो , जिसके 120 करोड़ मालिक है, और वो किराये पर दिया जाता है ,तो उसका किराया सभी 120 करोड़ लोगों में बराबर-बराबर बटना चाहिए। क्या ऐसे प्लाट है जिसके 120 करोड़ मालिक है ? जी हाँ, आईआईएम ए प्लॉट, जेएनयू प्लॉट, सभी यूजीसी प्लॉट, अहमदाबाद एयरपोर्ट प्लॉट, सभी एयरपोर्टों के प्लॉट और हजारों ऐसे भारत सरकार के प्लॉटों से मिलने वाला जमीन का किराया और भारत के सभी खनिजों जैसे कोयला और कच्चे तेल से मिलने वाली सारी रॉयल्टी हम भारत के नागरिकों और हमारी सेनाओं को जानी चाहिए किसी और को नहीं। क्योंकि भारत की संपत्ति के मालिक इसके 120 करोड़ नागरिक है। और यह रॉयल्टी व किराया सीधे ही मिलना चाहिए किसी योजना या स्कीम के जरिए नहीं। इस राशि का एक तिहाई हिस्सा सेना को जाना चाहिए देश की रक्षा के लिए, और बाकी दो तिहाई सभी नागरिकों में बराबर-बराबर बंटना चाहिए। एक अनुमान से, यदि ऐसा जाता है तो हर नागरिक को लगभग 400-500 रुपये महीना मिलेगा, जिससे देश की गरीबी कम हो जायेगी। . जिस दिन नागरिक प्रधानमंत्री को पारदर्शी शिकायत प्रणाली पर हस्ताक्षर करने को बाध्य करने में सफल हो जाते हैं, उसी दिन मैं पारदर्शी शिकायत प्रणाली क़ानून-ड्राफ्ट की धारा 1 का प्रयोग करके नागरिको को खनिज रॉयल्टी मिलने के शपथपत्र को प्रधानमन्त्री की वेबसाईट पर जमा करवा दूँगा, ताकि नागरिक इस प्रस्ताव पर हाँ या ना दर्ज कर सके। नागरिकों और सेना के लिए खनिज रॉयल्टी (एम आर सी एम) प्रस्ताव क्या है ? इस क़ानून-ड्राफ्ट में एक प्रशासनिक प्रक्रिया को बताया गया है, जिससे राष्ट्रीय स्तर के अधिकारी हर नागरिक को लगभग 500 रूपए (कम या अधिक हो सकता है) प्रति महीने भेज सकेंगे। अब बताएं कि कितने करोड़ नागरिक पूरी तरह से नैतिक इस 500 रूपए प्रति महीने की राशि को नहीं लेना चाहेंगे ? मैं मानता हूँ कि 40 करोड़ से ज्यादा नागरिक अपने हक़ का यह नैतिक रूपया लेना चाहेंगे। और इसलिए पारदर्शी शिकायत प्रणाली यह सुनिश्चित करेगा कि प्रधानमंत्री नागरिकों और सेना के लिए खनिज रॉयल्टी (एम आर सी एम) क़ानून-ड्राफ्ट पर हस्ताक्षर करने को बाध्य होंगे। और जब एक बार नागरिकों और सेना के लिए खनिज रॉयल्टी क़ानून-ड्राफ्ट पर हस्ताक्षर हो जाते है तो हम आम नागरिकों में से हर एक नागरिक को हर महीने 500 रूपए (कम या ज्यादा हो सकता है) के लगभग मिलेगा। और इस प्रकार गरीबी कम होगी। .

क्या नागरिकों और सेना के लिए खनिज रॉयल्टी क़ानूनड्राफ्ट पारित करवाने के लिए जनता की आवाजपारदर्शी शिकायत प्रणाली क़ानूनड्राफ्ट का होना जरूरी है ? .

यदि नागरिकों और सेना के लिए खनिज रॉयल्टी (एम आर सी एम) समर्थक वर्ग संसद में बहुमत मिलने तक इंतजार करने और तब नागरिकों और सेना के लिए खनिज रॉयल्टी लागू करने पर अड़ जाता है तो ऐसी संभावना है कि नागरिकों और सेना के लिए खनिज रॉयल्टी समर्थको को हमेशा के लिए इंतजार ही करते रहना पड़ेगा, क्योंकि अव्वल तो उन्हें संसद में बहुमत नहीं मिलेगा, और इससे भी बुरा होगा कि यदि उन्हें बहुमत मिल भी जाता है तो इस बात की संभावना है कि उनके अपने ही सांसद बिक जाएंगे और नागरिकों और सेना के लिए खनिज रॉयल्टी (एम आर सी एम) क़ानूनड्राफ्ट पारित करने से मना कर देंगे। . उदाहरण के लिए वर्ष 1977 में जनता पार्टी के सांसदों ने चुनाव से पहले वायदा किया था कि वे रॉइट टू रिकॉल कानून लागू करेंगे लेकिन चुन लिए जाने के बाद उन्होंने राइट टू रिकॉल कानून पास करने से मना कर दिया। इसलिए मेरे विचार से, नागरिकों और सेना के लिए खनिज रॉयल्टी के समर्थक कार्यकर्ताओं को पारदर्शी शिकायत प्रणाली क़ानून-ड्राफ्ट पर जन-आन्दोलन खड़ा करने पर ध्यान देना चाहिए, और पारदर्शी शिकायत प्रणाली क़ानून-ड्राफ्ट पारित करवाना चाहिए, न कि चुनाव में जीत कर बहुमत हासिल करने तक इंतजार करना चाहिए। . ============= .

(5.2) नागरिकों और सेना के लिए खनिज रॉयल्टी क़ानूनड्राफ्टसंक्षेप में : .

आईआईएम ए प्लॉट, जेएनयू प्लॉट, सभी यूजीसी प्लॉट, अहमदाबाद एयरपोर्ट प्लॉट, सभी एयरपोर्टों के प्लॉट और हजारों ऐसे भारत सरकार के प्लॉटों से मिलने वाला जमीन का किराया और भारत के सभी खनिजों, कोयला और कच्चे तेल से मिलने वाली सारी रॉयल्टी हम भारत के नागरिकों और हमारी सेनाओं को जानी चाहिए किसी और को नहीं। और यह रॉयल्टी व किराया सीधे ही मिलना चाहिए किसी योजना या स्कीम के जरिए नहीं। उदाहरण के लिए, मान लीजिए भारत सरकार के प्लॉटों से मिलने वाला किराया और खनिज रॉयल्टी दिसम्बर, 2008 में 45 हजार करोड़ रूपया थी। तब हमारे द्वारा प्रस्तावित कानून के मुताबिक 15 हजार करोड़ रूपया सेना को जाएगा और लगभग 500 रूपया प्रत्येक भारतीय नागरिक के पोस्ट-आफिस या बैंक खाते में सीधे ही जमा होगा। यदि हरेक नागरिक महीने में एक या दो बार खाते से पैसा निकालता है तो भी इसके लिए भारत भर में 1,50,000 से ज्यादा क्लर्कों की जरूरत नहीं पड़ेगी। वर्तमान राष्ट्रीयकृत बैकों के पास 6,00,000 से ज्यादा क्लर्क हैं। इसलिए पैसे का वितरण कर पाना संभव है। . नागरिकों और सेना के लिए खनिज रॉयल्टी (एम आर सी एम) क़ानून-ड्राफ्ट से होने वाले सीधे धन वितरण से हर साल प्रति व्यक्ति को 6000 रूपए से ज्यादा की आय हो सकती है अथवा जमीन या घर की कीमत कम हो सकती है। वह भी प्रति व्यक्ति, न कि प्रति परिवार। और इस तरह नागरिकों और सेना के लिए खनिज रॉयल्टी क़ानून-ड्राफ्ट गरीबी कम कर देगा, आय बढ़ाएगा और वस्तुओ की मांग बढेगी | वस्तुओ की मांग बढ़ने से उधोग-धंधे और रोजगार बढ़ेगा। स्थानीय उद्योग बढ़ने से इंजिनियरिंग कौशल बढ़ेगा तथा हथियार बनाने के काम में भी सुधार होगा। इस कानून के पारित होने के एक वर्ष के भीतर यदि किसी दंपत्ति को तीसरा बच्चा पैदा होता है तो उसके माता-पिता को 33 प्रतिशत कम किराया मिलेगा। जिनका पहले से ही तीसरा बच्चा है उन पर इस क़ानून का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। इस तरह यह कानून जनसंख्या पर भी नियंत्रण करेगा।

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(5.3) नागरिकों और सेना के लिए खनिज रॉयल्टी (एम आर सी एम) के क़ानूनड्राफ्ट की ज्यादा जानकारी . 1. मुख्य अधिकारी पर नागरिकों का नियंत्रण : .

(1.1) कोई भी नागरिक संसद सदस्य के चुनाव में जमा कराये जाने वाली राशि के बराबर पैसे का भुगतान करके अपने आप को राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी (एन एल आर ओ) उम्मीदवार के रूप में रजिस्टर्ड करवा सकता है। .

(1.2) भारत का कोई भी नागरिक तलाटी के कार्यालय जाकर तीन रूपए का शुल्क जमा करा सकता है और अधिक से अधिक पांच लोगों को राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी (एन एल आर ओ) पद के लिए अनुमोदित कर सकता है। तलाटी उसे पावती जारी करेगा, जिसमें उसके मतदाता पहचान–पत्र तथा उन व्यक्तियों, जिनको उसने अनुमोदित किया गया है, आदि का उल्लेख होगा। .

(1.3) तलाटी नागरिकों की पसन्द/प्राथमिकता को उसके वोटर आई कार्ड के साथ सरकारी वेबसाईट पर डाल देगा। .

(1.4) कोई नागरिक अपना अनुमोदन/स्वीकृति किसी भी दिन, किसी भी समय रद्द/ कैंसिल कर सकता है। .

(1.5) प्रधानमंत्री का सचिव हरेक उम्मीदवार के अनुमोदन की गिनती को प्रकाशित करेगा। .

(1.6) यदि किसी उम्मीदवार को सभी दर्ज मतदाताओं के 50 प्रतिशत से ज्यादा मतदाताओं (केवल वे मतदाता ही नहीं जिन्होंने अपना अनुमोदन फाइल किया है बल्किा सभी दर्ज मतदाता) का अनुमोदन मिल जाता है तो प्रधानमंत्री मौजूदा राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी (एन एल आर ओ) को हटा देंगे और उस उम्मीदवार को राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी (एन एल आर ओ) के रूप में नियुक्त कर देंगे। .

(1.7) यदि किसी उम्मीदवार को 50 प्रतिशत से ज्यादा का अनुमोदन मिला है और इसे वर्तमान राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी से 2 प्रतिशत ज्यादा अनुमोदन मिल गये है तो प्रधानमंत्री सबसे अधिक अनुमोदन वाले इस व्यक्ति को उस पद के लिए नियुक्त कर देंगे। . इस तरह राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी (एन एल आर ) पर राइट टू रिकॉल यह सुनिश्चित कर देगा कि राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी काफी कम भ्रष्ट होंगे और किराये का पैसा नागरिकों को विधिवत रूप से मिलेगा। राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी (एन एल आर ओ) उन प्लॉटो का आवंटन करेंगे जिन्हें भारत के नागरिकों की संपत्ति घोषित किया गया है। वे ऐसा एक कानून बनाकर या राष्ट्रीय जूरी के निर्णय के माध्यम से करेंगे, जो राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी (एन एल आर ओ) को जमीन का आवंटन करने देने के लिए विशेष तौर से प्राधिकृत करेगा। .

2. किराए की उगाही/किराया जमा करना. नागरिकों और सेना के लिए खनिज रॉयल्टी (एम आर सी एम) – सरकारी अधिसूचना की एक धारा में उल्लेख है कि ‘भारत के नागरिक यह निर्णय करते है और यह घोषणा करते है कि आईआईएम ए का प्लॉट, गुजरात विद्यापीठ, अहमदाबाद का प्लॉट, सभी आईआईएम के प्लॉट, और जेएनयू के प्लॉट भारत के सभी नागरिकों की संयुक्त और समान मालिकाना संपत्ति होगी। ये प्लॉट राज्य अथवा भारत राज्य अथवा भारत संघ अथवा किसी भी निजी/सरकारी निकाय/व्यक्ति की संपत्ति नहीं होगी, बल्कि ये प्लॉट सिर्फ भारत के नागरिकों की संपत्ति होगी। साथ ही, किसी भी निजी कम्पनी अथवा ट्रस्ट के मालिकाना हक के अधीन न आने वाले सभी यूजीसी द्वारा वित्त पोषित विश्व विद्यालयों और महा विद्यालयों के सभी प्लॉट भारत के नागरिकों की संपत्ति घोषित की जाती है। केन्द्रीय सरकार और सरकारी निकायों के सभी प्लॉट भी एतद्द्वारा भारत के नागरिकों की संपत्ति घोषित किए जाते है। .

3. एक अन्य खंड में लिखा है कि निम्नलिखित मंत्रालयों/विभागों के सभी प्लॉट भी राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी (एन एल आर ओ) के तहत आएंगे — .

• पर्यटन मंत्रालय • एयर इंडिया और इंडियन एयरलाइन्स के मालिकाना हक वाले हवाई अड्डे और सभी भवन

• सभी आईआईएम, यूजीसी के पैसे से चलने वाले सभी कॉलेज और विश्व विद्यालय (विज्ञान और इंजिनियरिंग को छोड़कर)

• उपभोक्ता मामले और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय

• सूचना और प्रसारण मंत्रालय

• सूचना व प्रौद्योगिकी मंत्रालय

• ग्रामीण विकास मंत्रालय

• लघु उद्योग और कृषि व ग्रामीण उद्योग मंत्रालय

• सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय

• कपड़ा/वस्त्र मंत्रालय

• पर्यटन और संस्कृ्ति मंत्रालय

• शहरी विकास और गरीबी उन्मूृलन मंत्रालय

• युवा मामले और खेल मंत्रालय

• योजना आयोग .

4. आईआईटी, आईआईएससी आदि के बारे में एक अलग सरकारी आदेश, जिसकी मांग हम करते है, उसमें उल्लेख होगा कि सभी आईआईटी, एनआईटी और आईआईएससी, रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डी आर डी ओ) के अन्तर्गत आएंगे और रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डी आर डी ओ) के निदेशक इन कॉलेजों के मुख्य अधिकारी होंगे तथा वे इन कॉलेजों मे दैनिक कार्य कलाप सुचारू रूप से चलाने के लिए उप प्रमुखों की नियुक्ति करेंगे। विज्ञान और इंजिनियरिंग पढ़ाने वाले कॉलेज विज्ञान मंत्रालय के अधीन होंगे और ये राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी (एन एल आर ओ) के अधीन नहीं होंगे। हालांकि इन कॉलेजों के पास जो अतिरिक्त जमीनें है वो राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी (एन एल आर ओ) के तहत आएँगी। .

5. उपयोग में न आ रही जमीन के बारे में — राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी (एन एल आर ओ) जमीन को उपयुक्त प्लॉटो के आकार में इस तरह बांटेगा जिस तरह वह इसे किराया प्राप्ति के लिए सबसे ज्यादा लाभप्रद समझता है। राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी (एन एल आर ओ) हरेक प्लॉट के लिए बोली लगवाएगा। नीलामी के लिए शर्तें इस प्रकार होंगी : .

• लीज/पट्टा, राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी (एन एल आर ओ) द्वारा किए गए निर्णय के अनुसार 5, 10, 15, 20 या 25 वर्षों के लिए होगा। यह लीज कभी भी 25 वर्ष से अधिक के लिए नहीं होगी।

• बोली लगाने वाले महीने के किराये के लिए बोली लगाएंगे और बोली लगाने की अवधि का काल अधिकतम लीज अवधि से कम होगा। इसलिए यह बोली मासिक किराए के रूप में होगी। एक व्यक्ति कई बोली लगा सकेगा। लीज की न्यूनतम समय अवधि 12 महीने होगी।

• बोली का वजन मासिक किराए के अनुसार होगा। अर्थात किराया जितना ज्यादा होगा बोली का वजन या प्रभाव भी उतना ही ज्यादा होगा और लीज जितना लम्बा होगा वजन/प्रभाव उतना कम होगा।

• बोली/निविदा खुली होगी।

• राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी (एन एल आर ओ) बोली के वजन के अनुसार प्लॉट देगा। • राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी (एन एल आर ओ) तीन महीने का किराया अग्रिम जमा के रूप में लेगा। .

6. लीज/पट्टे की अवधि के दौरान, राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी (एन एल आर ओ) किराये में प्रत्येक तीन महीने में बदलाव करेगा। ऐसा प्लॉट के चारो ओर के एक वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र के जमीन के मूल्य में आने वाले प्रतिशत बदलाव के आधार पर और प्लॉट देने के दिन से और किराया दर में संशोधन किए जाने वाले दिन के अनुसार ब्याज दरो में आने वाले प्रतिशत बदलाव के आधार पर किया जाएगा। .

7. लीज का समय बीत जाने के बाद राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी (एन एल आर ओ) एक नई बोली लगवाएगा जिसमें पहले से ही लीज ले चुके लीज-धारकों को वरीयता मिलगी। .

8. यदि मौजूदा लीज धारक बोली हार जाता है तो वह उस जमीन के सामान को बेच या हटा सकता है। लकिन उसे जमीन खाली करनी ही होगी। .

9. यदि प्लॉट किसी ने लिया हुआ है और उसका उपयोग कर रहा है (उदाहरण – आईआईएम ए प्लॉट) तो राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी (एन एल आर ओ) उस प्लॉट के चारो ओर एक वर्ग किलोमीटर के प्लॉट का पिछले तीन वर्षों के मध्य विचलन मान मूल्य ( बाजार मूल्य * मुख्य ब्याज दर / 3) का हिसाब लगाकर प्लॉट की कीमत तय करेगा और अगले 10 वर्षों के लिए वार्षिक किराया तय करेगा। किराए में हर तीन साल में संशोधन किया जाएगा। दस वर्षों के बाद खंड 6 में दिए अनुसार नीलामी की जाएगी। . नागरिकों को किराया भेजना .

10. राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी (एन एल आर ओ) प्राप्त किराए का 34 प्रतिशत हिस्सा रक्षा मंत्रालय को देगा जो सेना को मजबूत बनाने, हथियार उपलब्ध कराने और सभी नागरिकों को हथियार चलाने की शिक्षा देने के काम के लिए होगा। .

11. राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी (एन एल आर ओ) पिछले वर्ष राष्ट्रीय प्रति व्यक्ति दिए गए किराए के दूगने की अधिकतम सीमा की शर्त के साथ पिछले 15 वर्षों से उस राज्य में रह रहे अथवा उस राज्य में जन्में नागरिकों को प्रत्येक महीने जमा किए गए/वसूले गए किराए का 33 प्रतिशत वितरित करेगा। .

12. राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी (एन एल आर ओ) भारत के नागरिकों को प्रति माह जमा हुए किराए का 33 प्रतिशत हिस्सा वितरित करेगा। .

13. 7 वर्ष से कम उम्र वालों के लिए हिस्सा शून्य , 14 वर्ष से कम उम्र वालों के लिए चौथाई ,18 वर्ष से कम उम्र वालों के लिए आधा होगा और इससे अधिक उम्र वालों को पूरा हिस्सा मिलेगा। .

14. इस कानून के पारित हो जाने के एक साल के बाद हर व्यक्ति को किराया इस प्रकार मिलेगा –

• यह किराया 33 प्रतिशत बढ़ जाएगा यदि उसका कोई बच्चा न हो।

• यह किराया 33 प्रतिशत बढ़ जाएगा यदि उसके एक लड़की हो।

• यह बराबर रहेगा यदि उसके एक बेटा अथवा (एक बेटी, एक बेटा) अथवा दो बेटी हो।

• यह किराया 33 प्रतिशत कम हो जाएगा यदि उसे (दो बेटी, एक बेटा) अथवा (एक बेटी, एक बेटा) अथवा (दो बेटा) अथवा (तीन बेटी) से अधिक हो और इसमें से सबसे छोटा बच्चा कानून पास होने/लागू होने के एक वर्ष के बाद पैदा हुआ हो।

• किराया 66 प्रतिशत घट जाएगा यदि उसे ( तीन बेटी एक बेटा) अथवा (दो बेटी, दो बेटा) अथवा(एक बेटी, दो बेटा) अथवा (तीन बेटा) अथवा (चार बेटी) से अधिक हो और इसमें से सबसे छोटा बच्चा कानून पास होने/लागू होने के एक वर्ष के बाद पैदा हुआ हो। .

15. 60 वर्ष से ऊपर के पुरूषों और 55 वर्ष से ऊपर की महिलाओं को 33 प्रतिशत ज्यादा किराया मिलेगा और यह 75 साल से ऊपर के पुरूष एवं 70 साल से ऊपर की महिलाओं के लिए 66 प्रतिशत ज्यादा मिलेगा।

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(5.4) नागरिको को खनिज रॉयल्टी भेजना . अभी के अनुसार, खनिज प्लॉ्ट उन्हें दिए जाते है जो अधिकतम रॉयल्टी देता है। यही तरीका आगे भी लागू रहेगा लेकिन बाद में बोली में सुधार के लिए बढ़ी हुई बोली प्राप्त करने के लिए उसे संशोधित किया जा सकेगा। लेकिन एक बदलाव जिसका वायदा नागरिकों और सेना के लिए खनिज रॉयल्टी (एम आर सी एम) समूह करता है वह यह है कि खनिजो से प्राप्त रॉयल्टी आम लोगों और सेना का सीधे दी जाएगी।

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(5.5) राज्य स्तर पर नागरिकों और सेना के लिए खनिज रॉयल्टी के क़ानूनड्राफ्ट का प्रारूप : . पुलिस, न्यायलय, सेना, सरकारी स्कूल, सरकारी अस्पताल, राज्य ट्रान्सपोर्ट के बस-अड्डों द्वारा प्रयोग में न लाए जाने वाले राज्य सरकार के प्लॉट और वे प्लॉट जिन्हें खास तौर से कानून से छूट प्राप्त न हो, उनसे किराया वसूला जाएगा। राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी (एन एल आर ओ) किराया वसूल/जमा करेगा और उसमें से 34 प्रतिशत सेना को 66 प्रतिशत नागरिकों को देगा। जमीन चाहे राज्य या केन्द्र के अधीन हो, किराया एक ही तरह से बांटा जाएगा।

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(5.6) सार्वजनिक भूमि का किराया कितना है ? . भारत सरकार, केन्द्र और राज्यों के पास काफी उंचे बाजार-मूल्य वाली हजारों प्लॉेटे है। यहॉ एक छोटा सा उदाहरण प्रस्तु्त है : . प्लॉट का नाम – क्षेत्रफल – कीमत, प्रति वर्ग मीटर – प्लॉट का बाजार मूल्य क्रमश:

• आईआईएम, अहमदाबाद – 100 एकड़, 40,000 रूपया, 1400 करोड़ रूपया

• आईआईएम, लखनऊ – 200 एकड़, 20,000 रूपया, 1600 करोड़ रूपया

• आईआईएम, लखनऊ(नोएडा) – 10 एकड़, 50,000 रूपया, 200 करोड़ रूपया

• आईआईएम, कोलकाता – 135 एकड़, 20,000 रूपया, 1000 करोड़ रूपया

• आईआईएम, इंदौर – 190 एकड़, 15,000 रूपया, 500 करोड़ रूपया

• जेएनयू – 1000 एकड़, 40,000 रूपया, 16000 करोड़ रूपया

• गुजरात विद्यापीठ – 25 एकड़, 40,000 रूपया, 400 करोड़ रूपया

• गुजरात विश्व विद्यालय – 250 एकड़, 35,000 रूपया, 3500 करोड़ रूपया . कुल – 27,000 करोड़ रूपया . इनका किराया कितना होगा यदि ये प्लॉट बिल्डरों को दिए जाते हैं ? प्लॉट के बाजार मूल्य के 3 प्रतिशत पर इन 9 प्लॉटों का किराया = 27 हजार करोड * 3/100 = 810 करोड़ रूपए प्रति वर्ष = सात रूपए प्रति नागरिक/वर्ष बनता है। अब यह प्लॉट मुंबई एयरपोर्ट, अहमदाबाद हवाई अड्डा, बंगलौर हवाई अड्डा आदि जैसे प्रमुख प्लॉटों के मूल्यों की तुलना में कहीं नहीं ठहरता। कुछ उदाहरण इस प्रकार हैं : . प्लॉट का नाम – क्षेत्रफल – कीमत, प्रति वर्ग मीटर – अनुमानित बाजार मूल्य .

• अहमदाबाद एयरपोर्ट – 1850 एकड़, 40,000 रूपया, 29,600 करोड़ रूपया

• मुंबई एयरपोर्ट – 1100 एकड़ ,100,000 रूपया, 44,600 करोड़ रूपया

• दिल्ली एयरपोर्ट – 5000 एकड़, 100,000 रूपया, 200,000 करोड़ रूपया

• बंगलौर एयरपोर्ट (नया) – 4050 एकड़, 10,000 रूपया, 32,400 करोड़ रूपया

• बंगलौर एयरपोर्ट (पुराना) – 1000 एकड़, 100,000 रूपया, 40,000 करोड़ रूपया

• कोलकाता एयरपोर्ट – 1500 एकड़, 30,000 रूपया, 18,000 करोड़ रूपया

• चेन्नई एयरपोर्ट – 4800 एकड़, 40,000 रूपया, 76,800 करोड़ रूपया . कुल — 440,800 करोड़ रूपया .

(कृपया ध्यान दें कि उपर्युक्त जमीन की कीमतें 2010 के वास्तविक बाजारमूल्य की तुलना में बहुत ही कम हैं जब यह दूसरा संस्करण/एडिशन लिखा जा रहा था।) . इनका किराया कितना होगा यदि ये प्लॉट बिल्डरों को दिए जाते हैं ? इन एयरपोर्ट प्लाटों का किराया प्लॉट के बाजार-मूल्यो का 3 प्रतिशत की दर से = 440,800 करोड़ * 3/100 = 13,224 करोड़ प्रति वर्ष = 120 रूपया प्रति नागरिक प्रति वर्ष !! .

सरकार के पास एक अनुमान के अनुसार 50,000 प्लॉट हैं। यदि किराया प्रत्येक प्लॉट से औसतन प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष 20 पैसे जितना कम भी हो तो किराया 12000 रूपए प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष से ज्यादा हो जाता है। या तो हम आम लोगों को यह किराया मिलेगा अथवा जमीन की कीमतों में बहुत कमी आएगी । (वास्तव में जमीन की कीमत ही घटेगी) जिससे हम आम लोगों को अपनी कम आय पर घर खरीदना और अपना व्यवसाय शुरू करना आसान हो जाएगा।

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(5.7) खनिज रॉयल्टी कितनी है ? .

खनिज रॉयल्टी का अंदाज लगाना संभव है। लेकिन यह विक्रय मूल्य के उतार चढ़ाव के साथ-साथ बढ़ता-घटता रहता है। जून, 2008 के मूल्यों पर आधारित अनुमान प्रस्तुत है। अनुमान लगाने के लिए निम्न लिखित तरीका प्रयोग में लाया जाएगा जो उस कानून से निकला है जिसका मै प्रस्ताव कर रहा हूँ। मेरे द्वारा प्रस्तावित किए जा रहे इस कानून के अनुसार खनिज और तेल कुएं प्रतियोगी बोली के तरीके का उपयोग करके लीज पर दिए जाएंगे। इसलिए खदान- मालिक जो कीमत लगाएंगे वह न्यूनतम स्तर के होंगे और यह भारत में चल रहे श्रमिक मजदूरी तथा उपकरण की लागत पर निर्भर करेगा। अब इन कानूनों में मैं प्रस्ताव कर रहा हूँ कि सरकार खरीददारों से अन्तर राष्ट्रीय बाजार मूल्य के बराबर कीमत लेगी। दोनो का अंतर ही रॉयल्टी होगा, जिसका 67 प्रतिशत नागरिकों को सीधे ही जाएगा और 33 प्रतिशत सेना को जाएगा। जून, 2008 के मूल्य के आधार पर कच्चे तेल की कीमत की रॉयल्टी के संबंध में मेरा अनुमान निम्नलिखित है : .

कच्चा तेल . तेल का अंतर राष्ट्रीय मूल्य = 140 यू एस डॉलर प्रति बैरल भारत में निष्कर्षण (Extraction) मूल्य, सभी प्रकार की लागतों सहित = 25 डॉलर प्रति बैरल . जून, 2008 में तेल कम्पनियों द्वारा ली जा रही कीमत 55 डॉलर प्रति बैरल थी और वे काफी लाभ कमा रही थीं जो अन्तर राष्ट्रीय बाजार से 150 डॉलर प्रति बैरल की दर से खरीदे जाने के कारण घाटे का सौदा बन गयी। भारतीय तेल कम्पनियां भारतीय तेल शोधक कारखानों (रिफायनरियों) से वर्ष 2000 के शुरूआती दिनों में 25 डॉलर प्रति बैरल कीमत ले रही थीं। इस तथ्य में यह भी बात जुड़ जाती है कि भारतीय तेल कम्पनियों में स्टॉफ की संख्यां बहुत अधिक है और ये अपने कर्मचारियों को काफी ज्यादा वेतन देती हैं। उदाहरण के लिए, तेल और प्राकृतिक गैस (ओ एन जी सी) कम्पनी का क्लर्क लगभग 20,000 रूपए प्रतिमाह वेतन पाता है, जिसमें सभी भत्ते और व्यय शामिल है। जबकि निजी कंपनी का क्लर्क लगभग 8000 रूपए प्रतिमाह पाता है। इन खर्चों को कम किया जा सकता है। . भारत में उत्पादन = 6,60,000 बैरल प्रति दिन = 6,60,000 * 365 बैरल प्रति वर्ष = 24,09,00,000 बैरल प्रति वर्ष = 24 करोड़ बैरल प्रति वर्ष जनसंख्या = 110 करोड़ भारत में प्रति व्यक्ति उत्पादन = 0.22 बैरल प्रति भारतीय प्रति वर्ष प्रति बैरल लाभ = 115 यू एस डॉलर कुल मुनाफा डॉलर में = 0.22 * 115 डॉलर प्रति भारतीय = 25 डॉलर प्रति भारतीय डॉलर का मूल्य = 45 रुपया प्रति डॉलर . कुल मुनाफा रुपये में = 25*45=1125 रुपये प्रति वर्ष प्रति नागरिक . *यदि कच्चे तेल की कीमत गिरकर 70 अमेरिकी डॉलर हो जाती है तो लाभ कम होकर 495 रुपया प्रति वर्ष प्रति नागरिक हो जाएगी। .

कच्चा लोहा . उत्पादन = 123 मिलियन टन = 12.3 करोड टन = 0.11 टन प्रति भारतीय नागरिक मूल्य = 150 डॉलर प्रति टन = 7600 रुपया प्रति टन खुदाई का खर्चा = 300 रुपया प्रति टन मुनाफा प्रति टन = 7200 रूपया मुनाफा प्रति नागरिक = 0.11 * 7200 रूपया = 730 रूपया प्रति वर्ष .

दूसरे शब्दों में, यदि कच्चा तेल, तेल शोधक कारखानों (रिफाइनरी) को अंतरराष्ट्रीरय मूल्य पर दिया जाता है और इसका लाभ प्रत्येक भारतीय को भेजा जाए तो प्रत्येक भारतीय हर वर्ष 1125 रूपया पाएगा। जब तेल की कीमत कम होगी तो इसमें भी कमी आएगी और तेल की कीमत बढ़ने पर यह पैसा ज्यादा मिलेगा। यह तो केवल कच्चे तेल की बात थी। कोयला, प्राकृतिक गैस, ग्रेनाइट, संगमरमर, पत्थर, तांबा, एल्युमुनियम, लौह अयस्क और पानी से मिलने वाली रॉयल्टी मिलाकर यह एक बहुत बड़ी राशि होगी। जब नागरिकों को यह पता चलेगा कि उन्हें खदानो से रायल्टी मिल रही है तो वे खदान माफियाओं पर अंकुश लगाएंगे और इससे ईमानदार लोगों को खदान के व्यावसाय में आने का मौका मिलेगा, फलस्वरूप रॉयल्टी कई गुना बढ़ जाएगी। मेरे आकलन और अनुमान के अनुसार खनिज रॉयल्टी प्रति वर्ष प्रति व्यक्ति 4000- 6000 रूपए से ज्यादा तक बढ़ जाएगी। .

इसलिए खनिज रॉयल्टी और जमीन का किराया मिला कर प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष लगभग 18 हजार रूपए हो जाएगा। इसमें से 33 प्रतिशत सेना को जाएगा। इस तरह नागरिकों को प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष लगभग 12000 रूपए मिलेगा। यह पैसा किसी टैक्स का नहीं होगा। यह पैसा उन प्लॉटों और खनिजो से आ रहा है जिसके मालिक हम नागरिक हैं। चूंकि यह पैसा किसी टैक्स से नही आ रहा है इसलिए यह कोई “अमीरों पर कर लगाओ और गरीबों को खिलाओ” जैसा प्रस्ताव नहीं है। यह सीधा-सीधा उन खनिजों और प्लॉटों का पैसा है जिसके मालिक हम नागरिक है। . नागरिकों और सेना के लिए खनिज रॉयल्टी (एम आर सी एम) क़ानून-ड्राफ्ट सभी सुखद परिवर्तनों की जननी है। हम केवल इसी परिवर्तन को लाने के लिए अन्य परिवर्तनों का प्रस्ताव कर रहे हैं। और यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहे हैं कि यह परिवर्तन आने के बाद स्थाई हो जाए। आज के हिसाब से जमीन का किराया और नए एम 3 का सृजन, ये दो प्रमुख कारण है जिसके कारण गरीबी बनी हुयी है। ये क़ानून हम आम लोगों की गरीबी कम करेगा।

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(5.8) जमीन का किराया वसूलने करने के प्रभाव . एक बार यदि भूमि किराया अधिनियम लागू हो जाता है तो इन दो बातों में से एक बात होगी – 1. या तो हम आम लोगों को लगभग 500 या 1000 रूपया प्रति व्यक्ति हर महीने जमीन का किराया मिलेगा। अथवा 2. जमीन की कीमत घटेगी, क्योंकि सार्वजनिक भूमि का किराया देना होगा और इसीलिए भूमि-संग्रह करना बहुत महंगा पडेगा । . दूसरी घटना के होने की संभावना ज्यादा है। अब यदि जमीन की कीमत गिरती है तो घरों की कीमत भी कम होगी जिससे हम आम लोगों का जीवन सुधरेगा। हम आम लोगों मे से कई लोग, जो झुग्गियों में रहते हैं, वे शायद एक शयनकक्ष-हॉल-रसोई (वन-बीएचके) फ्लैटों में जा सकेंगे। और यदि जमीन की कीमत घटती है तो व्यवसायों की संख्या बढ़ेगी (क्योंकि जब रियल एस्टेट की लागत गिरती है तो कारीगरों के लिए व्यावसाय करना आसान हो जाता है) और हम आम लोगों को ज्यादा रोजगार और वेतन मिलेगा। अधिक औद्योगिकीकरण से खनिजों के मूल्य बढ़ेंगे और इसलिए खनिजों की रॉयल्टीे भी बढ़ेगी। इसलिए किसी भी स्थिति में आईआईएम ए प्लॉट, आईआईएम, जेएनयू प्लॉट व हजारों अन्य प्लॉटों और खदानों, जिनके मालिक हम आम लोग है, से किराए के प्रस्ताव से हम आम लोगों को बहुत लाभ होगा। इसलिए जमीन किराया ओर खदान की रॉयल्टी के प्रस्तावों से आय बढ़ेगी और गरीबी कम होगी। गरीबों और मध्यम वर्ग के लोगों को जमीन और घर ज्यादा सस्ती दरों पर उपलब्ध होंगे। इस प्रकार इससे गरीबों और मध्यम वर्ग के लोगों की क्रयशक्ति बढेगी। क्रयशक्ति के बढ़ने से मांग बढ़ेगी और इस प्रकार उद्योग धंधे बढ़ेंगे और हमारी सेना भी मजबूत होगी।

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(5.9) जमीन का किराया वसूलने का कुप्रभाव . सार्वजनिक भूमि पर किराया जमा न करने का प्रभाव खुले अन्याय की तरह है। अमीरों द्वारा गरीबों का शोषण और आर्थिक असमानता अन्यायपूर्ण ढ़ंग से बढ़ेगा। उदाहरण के लिए, दिल्ली एयरपोर्ट पर विचार कीजिए। यह हर साल दो करोड़ यात्रियों को सेवा देता है। इसके पास 6000 करोड़ रूपए प्रतिवर्ष किराया मूल्य की संपत्ति है। अर्थात 6000 रूपया/2 =3000 रूपया प्रति यात्री। . (5.10) एक उच्च वर्ग के आदमी के बारे में विचार कीजिए जो एक वर्ष में 20 बार दिल्लीै एयरपोर्ट का उपयोग करता है। लेकिन 3000 रूपया प्रति उड़ान की दर से जमीन का किराया उससे न वसूलने के कारण उसकी अमीरी 6,00,000 रूपए बढ़ जाती है। और भारत के प्रत्येक आम आदमी को हर साल साठ रूपए की हानि होती है, क्यों कि आम आदमी को दिल्ली एयरपोर्ट के प्लॉट ,जो कि उसका अपना है, का कोई किराया नहीं मिल रहा। इस प्रकार किराया न वसूलने के कारण आय का अंतर बढ़ जाता है। .

राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी (एन एल आर ) को वापिस बुलाने/नौकरी से निकालने का तरीका .

राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी (एन एल आर ओ) नाम के अधिकारी के द्वारा किराया वसूलना और लोगों को भेजने का काम किया जाना है। किराए का निर्धारण बाजार मूल्य और ब्याज की दरों के आधार पर मानक गणना द्वारा किया जाएगा। इस क़ानून में राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी (एन एल आर ओ) के पास कोई विवेकाधीन शक्ति नहीं है। लेकिन उसके पास प्लाट के छोटे टुकडे बनाने के तरीके निर्धारित करने का विवेकाधिकार है। इसलिए राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी (एन एल आर ओ) को सारा किराया खुद की जेब में पहुंचा देने से कैसे रोका जाएगा ? देखिए, नागरिक और सेना के लिए खनिज रॉयल्टीके प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट में यह प्रक्रिया रखी गयी है जिससे हम आम नागरिक एन एल आर को बदल सकें। नागरिको द्वारा भ्रष्ट को बदलने का यह तरीका वह मुख्य बात है जो हम आम लोगों को एक ऐसा राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी (एन एल आर ) ढ़ूंढने में सक्षम बनाएगा जो किराया आम लोगों तक भेजने में विश्वास रखता हो।

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(5.11) खनिज रॉयल्टी सीधे नागरिको के खाते में भेजे जाने के लिए प्रस्तावित कानून (DDMRCM) का ड्राफ्ट .

सैक्शन 1 : राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी (एन एल आर ओ) उम्मीदवार के लिए नागरिकों के अनुमोदन/स्वीकृति दर्ज करना

सैक्शन 2 : राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी (एन एल आर ओ) को बदलना

सैक्शन 3: भारत सरकार के अधीन प्लॉटों का स्वामित्व/मालिकाना हक

सैक्शन 4 : भारत सरकार के स्वामित्व / मालिकी वाले प्लॉटों के किरायों की वसूली

सैक्शन 5: खनिज रॉयल्टी का कलेक्शन/वसूली

सैक्शन 6: जनता की आवाज़ . नागरिक एवं सेना को खनिज रॉयल्टी का प्रस्तावित ड्राफ्ट इस लिंक पर देखें —- www.facebook.com/pawan.jury/posts/811075642344007 . ======== .

(5.12) कृपया नागरिको और सेना के लिए खनिज रॉयल्टी प्रस्ताव के कानूनी ड्राफ्ट की अंतिम दो धाराओं पर ध्यान दें .

सैक्शन 6 : जनता की आवाज़ ( पूरा ड्राफ्ट ऊपर दिए गए लिंक में देखें) .

(6.1) [जिला कलेक्टर]यदि कोई नागरिक इस कानून में कोई बदलाव चाहता है तो वह जिलाधिकारी/डी सी के कार्यालय में जाकर एक एफिडेविट जमा करा सकता है और डी सी या उसका क्लर्क उस एफिडेविट को 20 रूपए प्रति पेज का शुल्क लेकर प्रधानमंत्री की वेबसाईट पर स्कैन करके डाल देगा ताकि कोई भी नागरिक उस एफिडेविट को बिना लॉग-इन के देख सकें। . (

6.2) [तलाटी अर्थात पटवारी अर्थात लेखपाल (या उसका क्लर्क)] यदि कोई नागरिक इस कानून या इसकी किसी धारा के विरूद्ध अपना विरोध दर्ज कराना चाहे अथवा वह ऊपर के धारा में प्रस्तुत किसी एफिडेविट पर हां/नहीं दर्ज कराना चाहे तो वह अपने वोटर आई कार्ड के साथ तलाटी के कार्यालय में आकर 3 रूपए का शुल्क देगा। तलाटी हां-नहीं दर्ज कर लेगा और उसे एक रसीद/पावती देगा। नागरिक द्वारा दर्ज किया गया यह हां/नहीं प्रधानमंत्री की वेबसाईट पर रखा जाएगा। .

कृपया ऊपर लिखित प्रस्तावित क़ानूनड्राफ्ट के अंतिम दो खंड पर ध्यांन दीजिए।

ये दो खंड जनता की आवाज – पारदर्शी शिकायत प्रणाली के अलावा कुछ नहीं है। मेरे प्रत्येक क़ानून-ड्राफ्ट में इन दो पंक्तियों को दोहराया गया है। यह दोहराव क्यों है ? सांकेतिक मूल्यों को एक ओर छोड़िए, इस दोहराव का राजनैतिक महत्व भी है। यह हो सकता है कि ‘नागरिक और सेना के लिए खनिज रॉयल्टी’ कार्यकर्ताओ को सेना के लिए खनिज रॉयल्टी (एम आर सी एम) विरोधी बुद्धिजीवियों से लड़ाई लड़नी पड़े। तब एम आर सी एम कार्यकर्ता उसे इस कानून का वैसा क़ानून-ड्राफ्ट उपलब्ध कराने की चुनौती दे सकता है, जो वह चाहता है। और तब कार्यकर्ता उनके द्वारा प्रस्तावित प्रक्रिया में 6.1 और 6.2 धाराओं में दर्ज लाइने जोड़ने को कह सकता है। यदि विरोधी पक्ष अंतिम दो लाइनों को जोड़े जाने का विरोध करता है तो उस पर आम आदमी का विरोधी होने का आरोप लगाया जा सकता है। और यदि वह इन दो पंक्तियों के जोड़े जाने को स्वीेकार करता है तब ‘जनता की आवाज-पारदर्शी शिकायत प्रणाली’ की इन दो पंक्तियों का उपयोग करके ‘नागरिक और सेना के लिए खनिज रॉयल्टी’ (एम आर सी एम) कानून जनता के समर्थन द्वारा लाया जा सकता है। . दो लाइनों का यह जोड़ दर्शाता है कि ‘पारदर्शी शिकायत/प्रस्ताव प्रणाली’ की मांग केवल दोहराई गयी सकारात्मक संकल्पना ही नहीं है, बल्कि ‘जनता की आवाज-पारदर्शी शिकायत प्रणाली’ एक ऐसी प्रक्रिया है जिसे किसी भी अन्य कानून में जोड़ा जा सकता है। और यदि एक बार यह कानून ‘जनता की आवाज-पारदर्शी शिकायत प्रणाली’ की धाराओं के साथ जोड़कर पारित कर दिया जाता है तो इन दोनो धाराओं को उन सभी 200 कानूनों को लागू करने में उपयोग में लाया जा सकता है जिसका प्रस्ताव मैने किया है। जनता की आवाजकी ये दो धाराएं किसी भी क़ानून में लोकतांत्रिक सुधार का रास्ता खोल देता है, और इन दो पंक्तियो का जोड़ा जाना किसी भी अलोकतांत्रिक कानून को बाहर का रास्ता दिखाने के लिए पर्याप्त है। क्यों कि यदि किसी अलोकतांत्रिक कानून में ये दो पंक्तियां शामिल हैं तो इसे कुछ ही दिनों या कुछ ही सप्ताह में नागरिकों द्वारा नकार दिया जाएगा।

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(5.13) 110 करोड़ नागरिकों को भुगतान भेजने में आनेवाली लागत .

जमीन का किराया और खदान की रॉयल्टी 110 करोड़ आम लोगों तक भेजना कितना आसान/कठिन है ? . इस काम को यूनिवर्सल बैंकिंग प्रणाली का उपयोग करके किया जा सकता है, जिसमें प्रत्येंक नागरिक के पास केवल और केवल एक ही नागरिक एकाउन्ट, भारतीय स्टेट बैंक ( अथवा किसी सरकारी बैंक या पोस्ट-आफिस) की उसकी अपनी पसंद की शाखा में होगा। राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी (एन एल आर ओ) द्वारा भेजी गई राशि नागरिक के खाते में जमा की जा सकती है और इससे किसी सप्ताह में ज्यादा से ज्यादा एक बार सौ रूपए के गुणक के रूप में अधिकतम 1000 रूपया प्रति माह निशुल्क निकाला जा सकता है। खाता धारक को फोटो वाली पासबुक और हस्ताक्षरित/अंगुठा लगा चेक लाना होगा जिसे बैंक में कैशियर और कैमरे के सामने प्रस्तु्त करना होगा। इस अत्यन्त सुरक्षित प्रक्रिया से कोई कैशियर प्रति घंटे 30 लोगो को अथवा अपने आठ घंटे की ड्यूटी के दौरान 200 लोगों को और एक महीने में 5000 लोगों को भुगतान कर सकता है। . इस तरह, 110 करोड़ नागरिकों को प्रति माह एक बार भुगतान करने के लिए भारतीय स्टेट बैंक को 110 करोड़/ 5000 = लगभग 220,000 कैशियर की जरूरत पड़ेगी। साथ ही, जब तक कि कोई बच्चा 14 वर्ष का नहीं हो जाता तब तक उसका भुगतान उसके माता-पिता के खाते में जाएगा और इसलिए क्लर्कों की जरूरी संख्या लगभग 30 प्रतिशत घटकर केवल 160,000 क्लर्क ही रह जाएगी। दूसरे शब्दों में, भारत भर में लगभग 160,000 कैशियरों, लगभग 10000 निरीक्षकों और 10000 अन्या स्टॉफ को काम पर लगाकर प्रतिमाह 110 करोड़ भुगतान भेजना संभव है। और क्यों कि एटीएम का प्रसार काफी हो रहा है, इसलिए इस संख्या में भी कमी लाई जा सकती है। और प्रतिमाह नकद भुगतान की संख्या बढ़ाई जा सकती है। . धोखाधड़ी करने वालों की संख्यां में कमी लाने के लिए लोग किसी मुहल्ले में कम से कम 10 व्यक्तियों और ज्यादा से ज्यादा 20 व्यक्तियों का एक दल बना सकते हैं। जिसे “आपसी गवाह समूह” का नाम दिया जा सकता है। यदि कोई व्यक्ति 10 के समूह का सदस्य है तो उस पर इस बात का प्रतिबंध होगा कि जब वह पैसा निकालने जाए तो उस समूह में से कम से कम 5 लोग उसके साथ अवश्य जाएं। आम तौर पर सभी 10 लोग एक ही दिन और एक ही समय पैसा निकालने जाएंगे। यदि कोई व्यक्ति ऐसे समूह का सदस्य है तो उस समूह में से सभी को एक ही साथ पैसा मिल जाएगा। और किन्हीं 5 लोगों के अंगुठे का निशान भुगतान रसीद पर ले लिया जाएगा। . एक दलील जो ‘नागरिक और सेना के लिए खनिज रॉयल्टी’ (एम आर सी एम) के विरूद्ध मुझे दी जाती है, वह यह है कि 200,000 क्लर्कों के नेटवर्क का संचालन करना असंभव होगा, और इसलिए क्यों न इस पैसे को शिक्षा, स्वास्थ्य आदि पर खर्च किया जाए। देखिए, 5 से 17 आयुवर्ग के 25 करोड़ बच्चों को पढ़ाने के लिए प्रति 100 छात्र कम से कम एक शिक्षक की जरुरत होगी। स्कूल में प्रति छात्र कम से कम एक वर्ग-मीटर क्षेत्र की जरूरत होगी। अर्थात 25 करोड़ वर्ग-मीटर क्षेत्र। अस्पतालों में 100 करोड़ नागरिको को सेवा प्रदान करने के लिए हमें प्रति 2000 नागरिकों पर कम से कम एक डॉक्टर की जरूरत होगी। अर्थात 500,000 डॉक्टर ओर लगभग 10,00,000 नर्स। इसके अलावा हमें अस्पताल के लिए हजारों भवनों की जरूरत पड़ेगी। दूसरे शब्दों में 25 करोड़ छात्रों को शिक्षा देने और 100 करोड़ नागरिकों को स्वास्थ्य सेवा देने के लिए हमें 20 से 100 गुना ज्यादा स्टाफ की जरूरत होगी। इसलिए शिक्षा, स्वास्थ्य आदि की बात मानने के बाद भी मै क्लर्कों की संख्या के आधार पर किराया भेजने की योजना को रद्द करने की जरूरत नहीं समझता। प्रत्येंक महीने 100 करोड़ भुगतान भेजने के लिए आवश्यक क्लेर्कों की संख्या 200,000 से अधिक नहीं है और यह दूसरी वैकल्पिक योजनाओं में लगने वाले स्टाफ से बहुत ही कम है।

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(5.14) क्या इससे सरकारी आय कम नहीं होगी ? नहीं। .

यदि खनिज की सारी रॉयल्टी नागरिकों को जाती है तो सरकार को पैसे की कमी नहीं पड़ेगी। सबसे पहले मेरे प्रस्ताव के अनुसार खनिज रॉयल्टी का 33 प्रतिशत हिस्सा सरकार (सेना) को ही जाएगा, जिसे प्रत्येक आम नागरिक पर, और खनिज रॉयल्टी से उसकी आय पर 33 प्रतिशत आयकर के रूप में देखा जा सकता है। अब यह 33 प्रतिशत हिस्सा तब बढ़ जाएगा जब नागरिकों को 67 प्रतिशत हिस्सा मिलेगा। कैसे ? .

आज की खनिज रॉयल्टी पर विचार कीजिए। आज एक ग्रेनाइट ब्लॉक जिसका मूल्य बाजार में 100 रूपए है, और जिस पर खनन और परिवहन की लागत 10 रूपए से कम है। उस पर सरकार 5 रूपए या उससे भी कम रॉयल्टी प्राप्त करती है। ये बोलियां इतनी कम क्यों हैं ?

क्योंकि स्थानीय खनन ठेकेदार यह सुनिश्चित करने के लिए अपराधियों को भाड़े पर लेते हैं कि ज्यादा खदान मालिक बोली जमा कराने के लिए कलेक्टर के कार्यालय में ना पाए और बोली ना लगा पाए। लकिन ये अपराधी अपना काम करने में इसलिए सफल हो जाते हैं कि उन्हें विधायकों, सांसदों, मंत्रियों, मुख्य्मंत्रियों, प्रधानमंत्री, भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारियों, भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों और जजों के सगेसंबंधी वकीलों का सहयोग प्राप्त होता है। दूसरे शब्दों में, आज अपराधियों के उपयोग से, विधायकों, सांसदों, मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों, प्रधानमंत्री, भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारियों, भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों और जजों के सगेसंबंधी वकील ये सुनिश्चित कर लेते हैं कि उस रॉयल्टी में से अधिकतर हिस्सा उनके हाथों मे आयेगा, जो खदान ऐसे ठेकेदारों और अपराधियों के हाथ में हो जिन पर उनका नियंत्रण है। इसलिए हम कार्यकर्ताओं को आम लोगों को यह सूचना देनी होगी कि आम लोगों को इन मंत्रियो, भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारियों, भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों और जजों के सगेसंबंधी वकीलों के खिलाफ लडाई लड़नी होगी .

तब दो प्रश्न उठते है .

(i) एक आम आदमी इन शक्तिशाली लोगों से कैसे लडाई लड़ सकता है ?

(ii) क्यों एक आम आदमी को अपना जीवन खतरे में डालना चाहिए या अपना समय बरबाद करना चाहिए ? .

‘नागरिक और सेना के लिए खनिज रॉयल्टी’ के कानूनी ड्राफ्ट में रिकॉल करने की प्रक्रिया (भ्रष्ट को हटाने का अधिकार) इन दोनों मुख्य प्रश्नों का उत्तर देता है। ‘नागरिक और सेना के लिए खनिज रॉयल्टी’ दूसरे प्रश्न का उत्तर इस प्रकार देता है कि, यदि खनिज की रॉयल्टी नागरिकों को मिल रही हो तो नागरिकों के पास यह सुनिश्चित करने का पर्याप्त कारण है कि वे अपराधी जो खदान के अच्छे ठेकेदारो को रोकते हैं, उन्हें जान से मार दिया जान चाहिए या बन्दी बना लेना चाहिए। और रिकॉल प्रक्रिया (भ्रष्ट तो हटाने का अधिकार) पहले प्रश्न का उत्तर इस प्रकार देता है कि — पुलिस वालों, जजों, मुख्यमंत्रियों आदि पर प्रजा अधीन राजा/राइट टू रिकॉल का उपयोग करके नागरिक यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि वे ऐसे पुलिस प्रमुखों, जजों, मंत्रियों आदि को बदल दें जो अपराधियों को बढ़ावा देते है, और ऐसे व्यक्तियों की नियुक्ति करें जो आम नागरिको का भला चाहते है। इसलिए एम आर सी एम क़ानून खनिज की रॉयल्टी कई गुना बढ़ा देगा और इससे वह रॉयल्टी भी बढ़ेगी जो सेना को जाती है। इसलिए खनिजों से सरकार की आय का कुल योग इस प्रस्तावित सरकारी आदेश से बढ़ेगा ही घटेगा नहीं। . इसी प्रकार, सरकारी प्लॉटों के मामले पर विचार कीजिए। आज प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री अनेक सरकारी प्लॉटों को बाजार मूल्य के आंशिक कीमत पर दे देते हैं। प्रजा अधीन राजा/राइट टू रिकॉल ( मुख्यमंत्रियों, प्रधानमंत्री को बदलने की प्रक्रिया) एक ऐसा साधन उपलब्ध कराता है जिससे नागरिक इसे रोक सकते हैं और एम आर सी एम अर्थात आम लोगों तथा सेना को जमीन का किराया देना नागरिकों को वह कारण उपलब्ध कराता है कि वे इसे रोकें। हर बार मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री जमीन को किराए के लिए बाजार के मूल्ये से कम पर दे देते है। तब नागरिक घाटे का अनुमान करेंगे और जब यह घाटा उनके संयम की सीमा पार कर जाएगा तो वे उसे (मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री) बदलने के लिए 3 रूपए खर्च करेंगे। और इससे भी बेहतर बात यह है कि बदले जाने और उसके बाद के दण्ड का डर मुख्यमंत्रियों, प्रधानमंत्री पर अंकुश लगाएगा। इससे कुल किराया बढ़ेगा और इस तरह किराए का तिहाई हिस्सा जो सरकार(सेना) को जाएगा, वह भी बढ़ेगा। . इसलिए ‘नागरिक और सेना के लिए रोयल्टी’ का प्रस्ताव खनिजों और भूमि किराया से सरकार की कुल आय बढ़ाएगा। इससे आम लोगों की आय भी बढ़ेगी। तब किसको हानि होगी ? अपराधी और ठेकेदार को कम ही हानि होगी। असली घाटा, भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारियों, भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों, मत्रियों, मुख्यमंत्रियों, प्रधानमंत्री, उच्चवर्गीय लोगों को होगा जो कि बड़ी खदानों के मालिको से गठजोड़ बनाये हुए है। और वे लोग जो एम आर सी एम-रिकाल प्रस्ताावों का विरोध करते हैं वे केवल अपराधियों, खनिज ठेकेदारों, भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारियों, भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों, जजों के सगे-संबंधी वकीलों और खदानों के मालिको को ही लाभ पहुंचाएंगे किसी और को नहीं। कई बुद्धिजीवी इनसे वेतन लेते हैं और इसलिए उनके हितों का ध्यान रखते हुए एम.आर.सी.एम-रिकाल क़ानून का जोरदार विरोध करते हैं।

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(5.15) पश्चिम में कोई ऐसा कानून नहीं है तो हमें इसकी जरूरत क्यों है ? . मैं उन प्रक्रियाओं के लिए अभियान चलाता हूँ जिससे हम आम लोग प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों और जजों को हटा सकते हैं।

सभी प्रमुख बुद्धिजीवियों ने इस मांग का विरोध किया है और यह दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है कि यह असंवैधानिक है। इसमें असफल होने के बाद वे कहते हैं – पश्चि़म के देशों में आम लोगों को रॉयल्टी देने की यह प्रक्रिया नहीं है और इसलिए हम लोगों के यहां यह प्रक्रिया क्यों होनी चाहिए ? . देखिए, अमेरिका में 40 प्रतिशत से 50 प्रतिशत तक आयकर है। और इसका उल्लंघन बहुत कम होता है। और कुछेक लोगों को ही इससे छूट प्राप्त है। अमेरिका में जमीन पर भी लगभग एक 1 प्रतिशत संपत्ति-कर है। और अमेरिका में मृत्यु पर 45 प्रतिशत विरासत कर है। इन करों का उपयोग कल्याणकारी योजनाओं के लिए किया जाता है। और इसका लाभ आम लोगों तक पहुँच ही जाता है। क्योंकि वहाँ पर जूरी प्रणाली होने से भ्रष्टाचार कम है। भारतीय बुद्धिजीवियों ने सम्पत्ति कर ,उच्च आयकर का विरोध किया है और वे उत्तराधिकार-कर के भी बिलकुल खिलाफ हैं। और इस तरह कल्याण कार्यों के लिए आबंटित धन न के बराबर है। इस पर भी भारतीय बुद्धिजीवियों ने जूरी प्रणाली को भी वर्ष 1956 में खत्म कर दिया, इसलिए भ्रष्टाचार बेलगाम हो गया और फंड हड़पे जाने लगे। . मैने 30 प्रतिशत आयकर, 2 प्रतिशत सम्पत्ति-कर और 35 प्रतिशत विरासत-कर का प्रस्ताव किया है, ताकि सेना से जुड़ी औद्योगिक इकाइयों/कॉम्प्लेक्सों में इंजिनियरिंग शिक्षा और हथियार के निर्माण के लिए आवश्यक सामान्य शिक्षा में सुधार आ सके। मैने भ्रष्टाचार कम करने के लिए जूरी प्रणाली का भी प्रस्ताव किया है, ताकि मिलने वाली सेवाओं में सुधार आए और गरीबी कम हो। लेकिन गरीबी कम करने और गरीबी/भुखमरी से होनेवाली मौतो को कम करने के इस तरीके में वर्षों लगेंगे जबकि हम आम लोगों को खनिज रॉयल्टी सीधे देने से गरीबी और भुखमरी को मात्र चार महीने के भीतर कम किया जाना संभव है।

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(5.16) नागरिक और सेना के लिए रोयल्टी (एम.आर.सी.एम) क़ानूनड्राफ्ट और मानवाधिकार .

भारत में प्रति वर्ष लगभग एक करोड़ लोगों की मौत हो जाती है। देखिए, मरना तो एक स्वभाविक प्रक्रिया है। लेकिन उन मरने वालों के पास प्रति महीने 100 रूपए का अधिक भोजन और दवाएं होती तो पिछले साल मरने वाले एक करोड़ लोगों में से कम से कम 5-20 लाख लोग 2-10 वर्ष ज्यादा जी सकते थे। भारत में पिछले वर्ष जन्में एक हजार बच्चों में से लगभग 55 की मौत हो गई जबकि यह संख्या चीन में 23 और क्यू्बा में 5 थी। प्रति हजार में से 55 के हिसाब से वर्ष 2007 में यह संख्या 11 लाख हो गई। इसलिए भारत में वर्ष 2007 में इन 11 लाख शिशुओं, जिनकी मौत हुई, उनमें से कम से कम 5 लाख बच्चों को तो बचाया जा सकता था, यदि उनके परिवारों के पास भोजन और दवा पर खर्च करने के लिए कुछ 100 रूपए प्रतिवर्ष अधिक होता। दूसरे शब्दों में, भारत में आज की स्थिति के अनुसार, गरीबी के कारण सबसे ज्यादा मौत होती है और यह मानवाधिकार का सबसे गंभीर उल्लंघन है। एक बार एक अर्थशास्त्री ने कहा था कि बम धमाकों मे होने वाली एक मौत ज्यादा ध्यान खींचती है लेकिन भुखमरी से होने वाली 10 हजार मौतें भी इतना ध्यान नहीं खींच पाती। ऐसा मुख्यत: इसलिए है क्योंकि समाचारपत्र 0.01 प्रतिशत भारतीयों द्वारा लिखा जाता है और केवल सबसे ऊपर की 15 प्रतिशत जनता उन्हें पढ़ती है। एक बम धमाका उन्हें दुख पहूँचा देता है लेकिन भुखमरी उनसे कोसों दूर है। यही कारण है कि बुद्धिजीवियों, गैर सरकारी संगठनों और मीडिया-मालिक और मीडिया-पाठक व्यक्तिगत मुद्दों पर ध्यान देने पर जोर देते हैं, और भुखमरी से होने वाली मौतों पर ध्यान न देने पर जोर देते हैं। . नागरिक और सेना के लिए खनिज रॉयल्टी‘ (एम आर सी एम) क़ानूनड्राफ्ट मानवाधिकारों की मांग की दिशा में एक मील का पत्थर है। क्योंंकि यह भोजन और दवाएं खरीदने के लिए पैसे की कमी के कारण होने वाली मौतों की संख्या कम करेगी। दुख की बात है कि सभी बुद्धिजीवियों ने इस मांग का विरोध किया है और मेरे विचार से, कार्यकर्ताओं को इन बुद्धिजीवियों से तो सदैव के लिए किनारे कर ही लेना चाहिए।

. ========== . (5.17) अभ्यास .

1. भारत में कच्चे तेल का उत्पादन वर्ष 2008 में कितना था ? यह मानते हुए कि वर्ष 2006 में हुए उत्पादन की लागत से वर्ष 2008 में हुए उत्पादन की लागत में कोई बदलाव नहीं आया, और यदि खरीददारों से 135 डॉलर प्रति बैरल वसूला गया तो आपके आकलन के अनुसार भारतीय नागरिकों को कितना पैसा मिलेगा ? और यदि प्रति बैरल केवल 50 डॉलर ही खरीददारों से वसूला गया तो आपके आकलन के अनुसार भारतीय नागरिकों को कितना पैसा मिलेगा ? 2. मुंबई एयरपोर्ट का भू-क्षेत्रफल कितना है ? प्रति वर्ग-मीटर अनुमानित कीमत कितनी है ? भारत के नागरिकों को कितना धन प्राप्त होगा यदि किराया बाज़ार मूल्य का तीन प्रतिशत प्रतिवर्ष हो ?

  1. आपके जिले में सबसे बड़े विश्व विद्यालय का भू-क्षेत्रफल कितना है ? उस भूमि का अनुमानित दाम क्या होगा और उससे भारतीय नागरिकों को प्राप्त प्रति व्यक्ति किराया कितना होगा यदि किराया बाज़ार मूल्य का तीन प्रतिशत प्रति वर्ष हो ?
  2. क्या भारतीय बजट में जमीन के किराए को सब्सीडी के रूप में या इसके समतुल्य देखा जाता है ?
  3. क्यों भारत के बुद्धिजीवी इस बात पर अड़े है कि हम आम लोगों को खदान की रॉयल्टी सीधे नहीं मिलनी चाहिए बल्कि किसी योजना के माध्यम से ही मिलनी चाहिए ?
  4. क्यों भारत के बुद्धिजीवी इस बात पर जोर देते हैं कि आम लोगों को जमीन का किराया का लाभ सीधे नहीं मिलना चाहिए बल्कि किसी योजना के माध्यम से मिलना चाहिए ?

 

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