उमर  खालिद  ने भी उसी अंदाज में भाषण दिया जैसे कि कन्हैया  ने दिया था, कहा ‘विद्रोह जारी रहेगा’

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दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय जो कि आजकल सबसे ज्यादा सुर्खियों में बना हुआ है, का नजारा शुक्रवार की शाम को एक बार फिर से वैसा ही दिखाई दिया जैसा कि कुछ दिनों पहले इस विश्वविद्यालय के छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार की रिहाई के बाद दिखाई दिया था।

 

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कन्हैया की तरह ही देशद्रोह के आरोपी छात्र उमर खालिद  और अनिर्बान अंतरिम जमानत पर रिहा होकर JNU परिसर पहुंचे और फिर रात को उन्होंने उसी अंदाज में छात्रों के समूह को संबोधित किया जैसे कि कि कन्हैया ने किया था।

जेल जाना अच्छी बात नहीं होती लेकिन जमानत पर छूटे उमर खालिद ने कहा कि उसे जेल जाने का कोई पछतावा नही, बल्कि गर्व है। अपनी बात को सही ठहराते हुए उसने आजादी के आंदोलन का भी हवाला दिया और कहा कि इस विशेष मामले में जेल जाने का कोई पछतावा नही है बल्कि गर्व है कि उन्हें राजद्रोह के मामले में गिरफ्तार किया गया, क्योंकि स्वतंत्रता सेनानियों को भी इसी मामले के तहत गिरफ्तार किया गया था।

उमर खालिद का जवाब था कि इससे उनका नाम उन लोगों की सूची में शामिल हो गया,जिन्हें अपनी आवाज उठाने की वजह से जेल जाना पड़ा है। एक ऐसा कानून जिसके तहत अरूंधति रॉय और बिनायक सेन जैसे लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

 

जेल जाकर किसी तरह की गलती महसूस करना तो दूर उमर खालिद का कहना था कि पिछले डेढ़ महीने में वो खुद को ज्यादा मजबूत महसूस कर रहा है। उमर ने अपने भाषण में PM Modi और शिव सेना के दिगज्ज नेता बाला साहब ठाकरे पर भी निशाना साधा। उसने कहा कि ‘हम यहां से चिल्ला-चिल्ला कर बोलना चाहते हैं कि सरकार के खिलाफ हमारा विद्रोह जारी रहेगा।

उमर खालिद ने सफाई देते हुए कहा कि उन लोगों ने कभी भी सैनिकों पर सवाल नहीं उठाए बल्कि  यहां की सरकारों पर सवाल उठाया है। जेल में अपने साथ हुई बातों का जिक्र करते हुए उसने कहा कि ‘मेरे साथ जेल में काफी कुछ हुआ, मैं बेल कन्डीशन की वजह से सब कुछ शेयर नहीं कर सकता। मेरे साथ मीडिया ट्रायल हुआ। हमें जेल में मारा नहीं गया बस, लेकिन गालियां और धमकियां दी गईं’।

उमर खालिद और अनिर्बान ने दिल्ली विवि के प्रतिष्ठित कालेज से स्नातक की पढ़ाई की है और JNU से एमए, एमफिल के बाद पीएचडी कर रहे हैं। दोनों 5-6 साल से जेएनयू में रह रहे हैं। दोनों को जमानत शर्तों के साथ मिली हुई है। कोर्ट ने कहा है कि दोनों बिना इजाजत दिल्ली नहीं छोड़ेंगे और जांच अधिकारी के कहने पर जांच में शामिल होंगे।

अदालत ने ये भी कहा कि दोनों का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, लिहाजा, ऐसा नहीं लगता कि वो कानून से भाग जाएंगे। कन्हैया को जमानत दी गई, समानता के आधार पर इनको भी जमानत मिलनी चाहिए।

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