कांग्रेस की कमान इस वक़्त है भारतीय राजनीती के PK कहे जाने वाले प्रशांत किशोर के हाथ में जिनसे असहमति दिखाने की हिम्मत कांग्रेस पार्टी में अब किसी में भी नहीं l 130 सालो में कांग्रेस में पहली बार ऐसा हुआ है की एक बाहर का व्यक्ति पार्टी अंदरूनी मीटिंग में भाग लेता है न सिर्फ भाग लेता है बल्कि कांग्रेस के उपाध्यक्ष की बगल की कुर्सी में बैठ कर पार्टी की स्ट्रेटेजी तैयार करता है !
एक राइटर के तौर पर जब मैंने अपने पापा से ये जानकारी साझा करी और पुछा की हम भी उत्तर प्रदेश से है आपको क्या लगता है किसकी सरकार बनेगी ! तो उन्होंने कहा की हो सकता है मायावती की l मायावती इसलिए क्योंकि उसने बदमाशो यानि गुंडाराज कण्ट्रोल किया था, ब्राह्मण कांग्रेस को वोट देंगे नहीं और बीजेपी को एक नए चेहरे की ज़रूरत पड़ेगी l

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बहरहाल आईये जानते है प्रशांत किशोर की उत्तरप्रदेश में ब्राह्मणों को लेकर स्ट्रैटेजी !

1. रीता बहुगुणा जोशी और प्रमोद तिवारी बन सकते है यूपी में कांग्रेस की तरफ से ब्राह्मणों का  चेहरा !

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हाल ही में अभी जिस तरह से JNU और रोहित वेमुला का केस सामने आया उससे दलित वोट कटते भी नज़र आ रहे है और रीता बहुगुणा जोशी जिस परिवार से ताल्लुख रखती है उस परिवार का राजनैतिक अस्तित्व यूपी और उतराखंड में कही न कही दीखता है अगर हाल ही में उत्तराखंड में हुए घटना को नज़रंदाज़ कर दिया जाए तो l

 

2 ब्राह्मण जन्म की छटी पूजा भी करवाता है और अंतिम संस्कार भी वही करवाता है 

ऊपर दी हुई लाइन इस सन्दर्भ में है की एक बार एक मीडियाकर्मी ने उत्तरप्रदेश में जब एक ब्राह्मण से चुनाव को लेकर राय पूछी तो उसने ऊपर दी लाइन को उत्तर में दिया, यानी बाबरी से पहले यूपी था कांग्रेस का गढ़, उसके बाद बीएसपी, फिर एसपी l

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एक वरिष्‍ठ कांग्रेस नेता ने बताया कि किशोर का आइडिया है कि बाबरी मामले से पहले ब्राह्मण कांग्रेस का कोर वोट बैंक था। इस पर फिर से ध्‍यान दिया जाए। सूत्रों का कहना है कि किशोर ने बताया कि कांग्रेस के अपर कास्‍ट आधार के चलते ही सपा और बसपा का जन्‍म हुआ। पार्टी में कुछ नेता उनसे सहमत भी है।
उत्‍तर प्रदेश में 10 प्रतिशत जनसंख्‍या ब्राह्मणों की है। बाबरी मामले तक यह कांग्रेस के पाले में थे लेकिन…….अगले पेज पर continue 

 

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इसके बाद से भाजपा के समर्थक हैं। हालांकि लोकनीति सर्वे के अनुसार विधानसभा चुनावों में भाजपा का ब्राह्मण वोट बैंक कम हो रहा है। 2002 (50 प्रतिशत) और 2007 (44प्रतिशत) के बीच इसमें छह प्रतिशत की कमी रही। वहीं 2007 से 2012 (38 प्रतिशत) के बीच छह प्रतिशत की कमी और दर्ज की गई। समाजवादी पार्टी ने 2012 विधानसभा चुनाव जीतकर सरकार बनार्इ। उसे ब्राह्मणों के 19 प्रतिशत मत मिले, वहीं बसपा को 19 प्रतिशत वोट मिले। एक नेता के अनुसार इन आंकड़ों ने कांग्रेस के उम्‍मीद जगाई है। कांग्रेस 27 साल से उत्‍तर प्रदेश में सत्‍ता से दूर है।

 

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पूर्व सांसद और युवा कांग्रेस नेता ने कहा,’ब्राह्मण ही वह फल है जिसे कांग्रेस आसानी से तोड़ सकती है। वर्तमान में कांग्रेस के साथ कोई एक विशेष जाति का समर्थन नहीं है। यह उत्‍तर प्रदेश में कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी कमी है। जब तक कि हम कोर वोट बैंक नहीं बनाएंगे तब तक मुस्लिम भी हमारे साथ नहीं आएंगे। वे केवल जीतने वालों को ही वोट देते हैं।’ ब्राह्मण मतों को लेकर किशोर का आइडिया नया नहीं है।

 

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सपा, बसपा और भाजपा पूर्वी उत्‍तर प्रदेश में ब्राह्मण सम्‍मेलन कराते रहे हैं। यूपी में 20 प्रतिशत मत ब्राह्मणों के हैं। किशोर के आइडिया के समर्थन करने वाले नेताओं का कहना है कि कांग्रेस को ब्राह्मणों के साथ संबंध सुधारने के लिए काम करना चाहिए। जिससे कि दलितों, ब्राह्मणों और मुस्लिमों को मजबूत गठबंधन बनाया जा सके। हालांकि विपक्षी नेताओं का कहना है कि किशोर का आइडिया राहुल गांधी के कमजोर लोगों पर जोर देने के विचार से मेल नहीं खाता है। एक कांग्रेस नेता ने कहा,’ एक ऐसे राज्‍य में जहां जाति महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाती है और समाज को बांटती है। किसी एक जाति या समुदाय को विशेष लाभ केवल टिकट देकर ही दिया जा सकता है। क्‍या कांग्रेस यह जोखिम लेगी।’ 2007 में मायावती ने 89 ब्राह्मणों समेत 139 सवर्णों को टिकट दिया था।

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